
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 18 दिसम्बर 2025
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
*मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
*मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥ ☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति) *गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
*गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है । *गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
*इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है । 🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
👸🏻 शिवराज शक 352_
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – पौष मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – गुरुवार पौष माह के कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि 04:59 AM तक उपरांत अमावस्या
🖍️ तिथि स्वामी :- चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी है। प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है । चतुर्दशी को चौदस भी कहते हैं। चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र अनुराधा 08:06 PM तक उपरांत ज्येष्ठा
🪐 नक्षत्र स्वामी – अनुराधा नक्षत्र के देवता मित्र देव (जो 12 आदित्यों में से एक हैं) जबकि इस नक्षत्र के स्वामी ग्रह शनिदेव हैं और राशि स्वामी मंगल है।
⚜️ योग – धृति योग 03:05 PM तक, उसके बाद शूल योग
⚡ प्रथम करण : विष्टि – 03:47 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : शकुनि – 04:59 ए एम, दिसम्बर 19 तक चतुष्पाद
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 09:45:00 से 11:10:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 2:00 से 3:25 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:44:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:09:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:19 ए एम से 06:13 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:46 ए एम से 07:08 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:57 ए एम से 12:38 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:01 पी एम से 02:42 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:25 पी एम से 05:52 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:28 पी एम से 06:50 पी एम
💧 अमृत काल : 08:27 ए एम से 10:14 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:51 पी एम से 12:45 ए एम, दिसम्बर 19
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 07:08 ए एम से 08:07 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शमी पूजन करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थ सिद्धि योग/ शिवरात्रि/ अमावस्या प्रारंभ उ. रात्रि 04.59/ भारतीय व्यवसायी विजय माल्या जन्म दिवस, भारतीय क्रिकेटर विजय हजारे पुण्य तिथि, अरबी भाषा दिवस, राष्ट्रीय धातुविज्ञान दिवस, भारतीय पत्रकार बरखा दत्त जन्म दिवस, अल्पसंख्यक अधिकार दिवस, अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी दिवस, सतनामी संप्रदाय के संस्थापक गुरु घासीदास जयन्ती, लोक-कलाकार भिखारी ठाकुर जयन्ती
✍🏼 तिथि विशेष – चतुर्दशी तिथि को शहद त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि को एक क्रूरा तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं चतुर्दशी तिथि को उग्रा तिथि भी माना जाता है। यह चतुर्दशी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्दशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। इस चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिवजी हैं।।
🗺️ Vastu tips 🗽
पितर की फोटो से जुड़े वास्तु नियम
*पितरों की तस्वीर हमेशा दक्षिण दिशा की दीवार पर लगानी चाहिए क्योंकि ये दिशा पितरों की मानी जाती है। कहते हैं इस दिशा में पूर्वजों की फोटो लगाने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। *पितरों की फोटो कभी भी पूर्व, उत्तर और पूर्वोत्तर दिशा में नहीं लगानी चाहिए। कहते हैं इससे पाप लग जाता है।
*आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार पितरों की तस्वीर कभी भी देवी-देवताओं की मूर्ति के साथ नहीं लगानी चाहिए। इससे जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। साथ ही घर में कलह का माहौल रहता है। *इसके अलावा बेडरूम, रसोई घर, मुख्य द्वार या घर के मंदिर में भी पितरों की तस्वीर लगाने से बचना चाहिए। कहते हैं ऐसा करना अशुभ माना जाता है।
*पूर्वजों की तस्वीर घर के ड्राइंग रूम में लगानी चाहिए। पितरों की तस्वीर समय-समय पर साफ करते रहें। उस पर धूल-मिट्टी इकट्ठा न होने दें। साथ ही उसकी माला भी बदलते रहें। ❇️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ जिस घर में जब कोई रोग आ जाता है तो उस रोगी के साथ साथ उस घर के सभी व्यक्ति भी मानसिक रूप से चिंता और आशांति का अनुभव करने लगते है , लेकिन कुछ छोटी छोटी बातो को ध्यान में रखकर हम हालत पर काबू पा सकते है , शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकते है । *यदि आपके परिवार में कोई व्यक्ति बीमार है तो अगर संभव हो तो उसे शनिवार,, रविवार,, सोमवार को डॉक्टर को दिखाएँ और उसकी दवा की पहली खुराक भगवान मृत्युंजय शिव को अर्पित करके कुछ राशि भी चड़ा दें और रोगी व्यक्ति के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना करें , व्यक्ति के बहुत जल्दी ही ठीक हो जाने की सम्भावना बन जाती है ।
*हर पूर्णिमा को किसी भी शिव मंदिर में भगवान भोलेनाथ से अपने परिवार को निरोग रखने की प्रार्थना रखें ,तत्पश्चात मंदिर में और गरीबों में कुछ ना कुछ फल,मिठाई और मंदिर के पुनरोत्थान सौंदर्करण के लिए दान अवश्य दें । *रोगी व्यक्ति को मंगलवार और शनिवार किसी भी दिन हनुमान जी की मूर्ति से सिंदूर लेकर उसके माथे पर लगाने से उसका दिल मजबूत होता है और रोगी जल्दी स्वस्थ भी होता है ।
*यदि कोई बीमार व्यक्ति प्रात: काल एक गिलास पानी लेकर पूर्व दिशा की ओर मुंह करके खड़े होकर एँ मन्त्र का 21 बार जाप करके पी जाय एवं ईश्वर से अपने रोग को दूर करने के लिए प्रार्थना करें तो शीघ्र ही स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है। यह प्रयोग सोमवार से शुरू करके रविवार तक लगातार 7 दिन तक करना चाहिए । 🫘 आरोग्य संजीवनी 🌰
जायफल को दूध में घिसकर चेहरे पर लेप लगाने से मुहांसों में फायदा होता है।
*सोते समय गुनगुने दूध में जायफल पाउडर मिलाकर पीने से नींद अच्छी आती है। पुरुषों में कामेच्छा बढ़ाने के लिए भी इसका इस्तेमाल होता है।
*बच्चों को बाहर का दूध हजम करने में कई बार परेशानी होती है। ऐसे में दूध में आधा भाग पानी और आधा जायफल मिलाकर उबाले और हल्का गुनगुना होने पर छानकर पीने के लिए दे। *जायफ़ल, गर्म तासीर के कारण खांसी और जुकाम के इलाज में मदद करता है, ब्लड शुगर के स्तर को संतुलित करता है।
*यह मूत्र पथ के संक्रमण (यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन) के लिए भी फायदेमंद है। *जायफ़ल में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द और सूजन को कम करने में मदद करते हैं। गठिया और मांसपेशियों की चोटों से पीड़ित व्यक्तियों के लिए यह बहुत फायदेमंद साबित होता हैं|
*जायफ़ल में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो सांस की बदबू खत्म कर सकते हैं और ओरल कैविटी में मौजूद बैक्टीरिया को कम कर सकते हैं। 📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
मत्स्य अवतार, भगवान विष्णु के दस अवतारों में से पहला अवतार है. इस अवतार में भगवान विष्णु ने मछली का रूप धारण करके पृथ्वी और उसके जीवों को प्रलय से बचाया था. मत्स्य अवतार से जुड़ी कुछ खास बातेंः
*मत्स्य अवतार भगवान विष्णु के प्रथम अवतार है। मछली के रूप में अवतार लेकर भगवान विष्णु ने एक ऋषि को सब प्रकार के जीव-जन्तु एकत्रित करने के लिये कहा और पृथ्वी जब जल में डूब रही थी, तब मत्स्य अवतार में भगवान ने उस ऋषि की नाव की रक्षा की। इसके पश्चात ब्रह्मा ने पुनः जीवन का निर्माण किया।
*एक दूसरी मन्यता के अनुसार एक राक्षस ने जब वेदों को चुरा कर सागर की अथाह गहराई में छुपा दिया, तब भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप धारण करके वेदों को प्राप्त किया और उन्हें पुनः स्थापित किया। मत्स्य अवतार की कथा एक बार ब्रह्माजी की असावधानी के कारण एक बहुत बड़े दैत्य ने वेदों को चुरा लिया। उस दैत्य का नाम हयग्रीव था। वेदों को चुरा लिए जाने के कारण ज्ञान लुप्त हो गया। चारों ओर अज्ञानता का अंधकार फैल गया और पाप तथा अधर्म का बोलबाला हो गया। *तब भगवान विष्णु ने धर्म की रक्षा के लिए मत्स्य रूप धारण करके हयग्रीव का वध किया और वेदों की रक्षा की। भगवान ने मत्स्य का रूप किस प्रकार धारण किया। इसकी विस्मयकारिणी कथा इस प्रकार है- कल्पांत के पूर्व एक पुण्यात्मा राजा तप कर रहा था। राजा का नाम सत्यव्रत था। सत्यव्रत पुण्यात्मा तो था ही, बड़े उदार हृदय का भी था। प्रभात का समय था। सूर्योदय हो चुका था। सत्यव्रत कृतमाला नदी में स्नान कर रहा था। उसने स्नान करने के पश्चात जब तर्पण के लिए अंजलि में जल लिया, तो अंजलि में जल के साथ एक छोटी-सी मछली भी आ गई। सत्यव्रत ने मछली को नदी के जल में छोड़ दिया। मछली बोली- राजन! जल के बड़े-बड़े जीव छोटे-छोटे जीवों को मारकर खा जाते हैं। अवश्य कोई बड़ा जीव मुझे भी मारकर खा जाएगा। कृपा करके मेरे प्राणों की रक्षा कीजिए। सत्यव्रत के हृदय में दया उत्पन्न हो उठी।
*उसने मछली को जल से भरे हुए अपने कमंडलु में डाल लिया। तभी एक आश्चर्यजनक घटना घटी। एक रात में मछली का शरीर इतना बढ़ गया कि कमंडलु उसके रहने के लिए छोटा पड़ने लगा। दूसरे दिन मछली सत्यव्रत से बोली- राजन! मेरे रहने के लिए कोई दूसरा स्थान ढूंढ़िए, क्योंकि मेरा शरीर बढ़ गया है। मुझे घूमने-फिरने में बड़ा कष्ट होता है। सत्यव्रत ने मछली को कमंडलु से निकालकर पानी से भरे हुए मटके में रख दिया। यहाँ भी मछली का शरीर रात भर में ही मटके में इतना बढ़ गया कि मटका भी उसके रहने कि लिए छोटा पड़ गया। दूसरे दिन मछली पुनः सत्यव्रत से बोली- राजन! मेरे रहने के लिए कहीं और प्रबंध कीजिए, क्योंकि मटका भी मेरे रहने के लिए छोटा पड़ रहा है। *तब सत्यव्रत ने मछली को निकालकर एक सरोवर में डाल किया, किंतु सरोवर भी मछली के लिए छोटा पड़ गया। इसके बाद सत्यव्रत ने मछली को नदी में और फिर उसके बाद समुद्र में डाल दिया। आश्चर्य! समुद्र में भी मछली का शरीर इतना अधिक बढ़ गया कि मछली के रहने के लिए वह छोटा पड़ गया। अतः मछली पुनः सत्यव्रत से बोली- राजन! यह समुद्र भी मेरे रहने के लिए उपयुक्त नहीं है। मेरे रहने की व्यवस्था कहीं और कीजिए।
*अब सत्यव्रत विस्मित हो उठा। उसने आज तक ऐसी मछली कभी नहीं देखी थी। वह विस्मय-भरे स्वर में बोला- मेरी बुद्धि को विस्मय के सागर में डुबो देने वाले आप कौन हैं? मत्स्य रूपधारी श्रीहरि ने उत्तर दिया- राजन! हयग्रीव नामक दैत्य ने वेदों को चुरा लिया है। जगत में चारों ओर अज्ञान और अधर्म का अंधकार फैला हुआ है। मैंने हयग्रीव को मारने के लिए ही मत्स्य का रूप धारण किया है। *आज से सातवें दिन पृथ्वी प्रलय के चक्र में फिर जाएगी। समुद्र उमड़ उठेगा। भयानक वृष्टि होगी। सारी पृथ्वी पानी में डूब जाएगी। जल के अतिरिक्त कहीं कुछ भी दृष्टिगोचर नहीं होगा। आपके पास एक नाव पहुँचेगी। आप सभी अनाजों और औषधियों के बीजों को लेकर सप्त ऋषियों के साथ नाव पर बैठ जाइएगा। मैं उसी समय आपको पुनः दिखाई पड़ूँगा और आपको आत्मतत्त्व का ज्ञान प्रदान करूँगा। सत्यव्रत उसी दिन से हरि का स्मरण करते हुए प्रलय की प्रतीक्षा करने लगे।
*सातवें दिन प्रलय का दृश्य उपस्थित हो उठा। समुद्र भी उमड़कर अपनी सीमाओं से बाहर बहने लगा। भयानक वृष्टि होने लगी। थोड़ी ही देर में सारी पृथ्वी पर जल ही जल हो गया। संपूर्ण पृथ्वी जल में समा गई। उसी समय एक नाव दिखाई पड़ी। सत्यव्रत सप्त ऋषियों के साथ उस नाव पर बैठ गए। उन्होंने नाव के ऊपर संपूर्ण अनाजों और औषधियों के बीज भी भर लिए। नाव प्रलय के सागर में तैरने लगी। प्रलय के उस सागर में उस नाव के अतिरिक्त कहीं भी कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा था। *सहसा मत्स्य रूपी भगवान प्रलय के सागर में दिखाई पड़े। सत्यव्रत और सप्त ऋषि गण मतस्य रूपी भगवान की प्रार्थना करने लगे भगवान से आत्मज्ञान पाकर सत्यव्रत का जीवन धन्य हो उठा। वे जीते जी ही जीवन मुक्त हो गए। प्रलय का प्रकोप शांत होने पर मत्स्य रूपी भगवान ने हयग्रीव को मारकर उससे वेद छीन लिए। भगवान ने ब्रह्माजी को पुनः वेद दे दिए। इस प्रकार भगवान ने मत्स्य रूप धारण करके वेदों का उद्धार तो किया ही, साथ ही संसार के प्राणियों का भी अमित कल्याण किया।
*_••••✤••••┈•✦ 👣✦•┈••••✤•••
⚜️ चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना करवाना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये। आज चतुर्दशी तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है। जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है।



