मध्य प्रदेश

सुबह 7 बजे खुला दवाइयों का स्टोर, 108 में बोरियो में भरकर लाद रहे थे दवाइया,

हाफ चड्डा (निकर) पहनकर कर्मचारी कर रहे थे ड्यूटी
ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
तेंदूखेड़ा । सरकार की तरफ से सभी सरकारी संस्थान खुलने ओर  बंद होने का एक निश्चित समय ओर एक गाइड लाइनभी होती है जिसके अनुसार सारी रूप रेखा क्रियांनवित होती है।मगर तेंदूखेड़ा के सरकारी अस्पताल में इस सरकारी गाइड लाइन का उल्हन्न हुआ है।तेंदूखेड़ा में दवाइयों का जो स्टोर है वह दिनाक 12 जून 23 को सुबह 7 बजे ही खुल गया था और इमरजेंसी वाहन 108 में दवाइया लाद रहे थे जो कि प्रथम दृष्टि में नाजायज कार्य लग रहा था।आज सुबह CG04 NT 1848 जो कि एक इमरजेंसी वाहन कहलाता जिसमे तेंदूखेड़ा के सतीश वर्मा फर्मासिस्ट द्वारा क्रीम कलर की टीशर्ट एवम ब्लेक कलर का हाफ चड्डा पहनकर उक्त वाहन में चार बोरियो में दवाइया भरकर लोड कर रहे थे इस कार्य मे मेष राम तेजगढ़ फार्मासिस्ट मोके पर मुह में टाविल लपेट कर खड़े थे तथा तेंदूखेड़ा के वाटर मेन मुकेश पटेल भी दवाइयों को रखवाने में ब्यस्त थे।इस कार्य मे सुलभ शौचालय में पदस्थ नगर परिषद का कर्मचारी मोती बाल्मीक भी मदद करवा रहा था।
*इतनी सुबह कार्यलय कैसे खुला* सरकारी नियमसनुसार से सरकारी ऑफिस या संस्थान सुबह 10 बजे के बाद ही खुलते हैं तेंदूखेड़ा अस्प्ताल का दवाइयों का स्टोर आज सुबह7 बजे से पहले ही खुल गया था जहाँ पर अवैध तरीक़े से दवाइयों की हेर फेर करने में लगे थे कर्मचारी, प्रत्यक्षकदर्शीयो ने बताया है कि यह दवाइयों का स्टोर खुलने का कोई समय नही रहता है यह रात को भी अक्सर खुल जाता है और कुछ इसी तरह का कार्य किया जाता है।
*समय से पहले पहुचे कर्मचारी अमानक वेशभुसा में* तेंदूखेड़ा अस्प्ताल में समय से पहले दवाइयों का स्टोर 7 बजे से पहले तो खुल गया था और उसमें जो कर्मचारी भी 7 बजे से पहले आकर काम पर लग गए थे वो भी हाफ चड्डा एवम टीशर्ट पहनकर, जिसमे से मेश्राम अपना मुंह टाविल से छुपाकर रखे हुए था। और 108 का ड्राइवर भी सुबह 7 से पहले गाड़ी लगाकर हाजिर था।ओर नगर परिषद का कर्मचारी मोती बॉलमिक अपना सुलभ शौचालय छोड़ कर दवाइया रखवा रहे थे।इन कर्मचारियों को अक्सर ड्यूटी टाइम में अस्प्ताल में नही देखा जाता है।
आज सुबह 7 बजे108 में दवाइयों को लादा जा रहा थाकी तभी मीडिया की टीम ने पकड़ा और पूछ ताश की तो108 के ड्राइवर सन्दीप अहिरवार ने कापते हुये कहा कि तेजगढ़ अस्प्ताल लिए जा रहे हैं मेश्राम ने भी बताया है कि यह दवाइया तेजगढ़ अस्प्ताल के लिये लादी जा रही है। जब टीम की छान बिन तेज हुई तो सतीश वर्मा ने तुरंत तेजगढ़ के लिये कागज बनाये।आनन फानन में गाड़ी रवाना की महज 20 मिनिट का रास्ता 108 ने करीब 1 घण्टे लिया यह भी एक सन्देह वाली बात है कि रास्ते मे रुक कर कुछ तो किया होगा।
*बीएमओ रूपराम बागरी की सहमति से हो रहा है सब काम*  इस तरह की दवाइयों की सप्लाई कर्मचारी या तो सुबह करते हैं या रात को करते हैं इस तरह की लापरवाही सरेआम की जाती हैं और बीएमओ को कैसे मालूम नही होगा अस्प्ताल परिसर में होने वाली हर गतिविधि की जवाबदारी बी एम ओ की रहती है तो जाहिर है आज जो कुछ भी नैतिक अनैतिक हुआ है उसमें रूप राम बागरी की सहमति भी आवश्यक जान पड़ती है। क्योकि108 वाहन बिना किसी अधिकारी की परमिशन या शह पर ही चलता है।
*दवाइयों के परिवहन पर मिलता है आने जाने का पैसा, फिर 108 क्यो*
सरकारी सूत्रों से पता चला है कि अगर दवाइया तेंदूखेड़ा से दूसरे अस्पतालों में जाति है तो उनका परिवहन के खर्च का बाउचर बनता ओर जिला अस्पताल द्वारा उसका भुगतान किया जाता है।जब सब प्रावधान है तो अस्प्ताल के कर्मचारी क्यो108 बाहन चुना है।
*108 का उपयोग मरीजो के लिये सरकारी वाहन का दुरुपयोग*
जिस समय 108 वाहन से तेंदूखेड़ा से तेजगढ़ अस्प्ताल दवाइया पहुचाई जा रही थी जिसने 108 वाहन करीब 4घण्टे फसा रहा है उस दौरान अगर कहि क्षेत्र में कोई एक्सीडेंट हो जाता या कोई और एमरजेंसी आ जाती तोतुरन्त में दूसरा वाहन कहा से आता।इस गाड़ी के ड्राइवर ने गाइडलाइन के खिलाफ कार्य किया है। 108 का संचालन भोपाल हेडक्वाटर से होता है और जब कोई मरीज फोन करता है तब चलती है यह गाड़ी ओर तेंदूखेड़ा से तेजगढ़ बिना फोन के कैसे चल गई गाड़ी।ड्राइवर सन्दीप अहिरवार ने सरकारी वाहन का दुरुपयोग किया है।
*तेजगढ़ अस्प्ताल में एक दिन पहले ही पहुची थी दवाइया* तेजगढ़ अस्प्ताल से पूजा सिस्टर से पता चला है कि दवाइया तो एक दिन पहले ही आ चुकी थी।आज किसने मंगाई है यह मालूम नही है। मगर अचानक इसी प्रकार ही इहा दवाइया ऐसे ही आती है। तेजगढ़ में पदस्थ मेश्राम जो कि वहाँ के फ़र्मासिष्ठ है वे वहां 7 बजे तेंदूखेड़ा में मौजूद थे जो अपना मुंह टाविल से छिपाए हुए था।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी संगीता त्रिवेदी ने बताया की दवाईया 108 से नहीं जा सकती दवाई परिवहन के लिए अलग प्रावधान है वही बी एम ओ रूप राम बागरी को फोन लगाया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।

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