मध्य प्रदेश

अधिकारी विधायक काम न आये, ढेर सारी योजनाएं भी बेकार- चंद घंटों में बेजुबान ने तोड़ा दिया दम 

ब्यूरो चीफ : मनीष श्रीवास 
जबलपुर । जबलपुर जिले के  विधानसभा क्षेत्र के ब्लाक सिहोरा तहसील का मामला बड़ा ही विचित्र स्थिति में देखने को मिला हैं । 
सिहोरा नगर सीमा में स्थापित पशु चिकित्सा अस्पताल के चंद कदम की दूरी पर एक लाल रंग की बछिया सड़क किनारे कमजोर हालत में लेटी हुई थी । शनिवार की शाम 4 बजे के दौरान अनुविभगीय अधिकारी पुलिस कार्यालय के स्टॉफ ने देखा कि उस गाय की बछिया को कुछ दो चार आवारा श्वान (कुत्ते ) परेशान कर उसे नोच रहें थे । इस घटना को देख तत्काल उन्होनें श्वानो को वहा से भगाया । और नजदीक ही बने हुए पशु चिकित्सा केन्द्र को इसकी सूचना दी । पर दो घन्टे से अधिक सयम बीत जाने के बाद भी किसी ने उसके इलाज हेतु कोई रुचि नहीं दिखाई । 
लम्बे समय तक सभी लोग फोन से डॉ के सम्पर्क में लगे रहें फिर भी कोई जवाब नहीं दिया गया ।
जन सेवा युवा संगठन के अखिल राज तिवारी ने इस घटना की जानकारी से क्षेत्रीय विधायक को अवगत कराया लेकिन उससे भी निराशा हाथ लगी ।
मजबूर होकर उन्होनें मीडिया का सहारा लिया । शाम 6 बजे के दौरान जब मीडिया वहा पहुँची तो पशु चिकित्सा अस्पताल बन्द था । और शासन प्रशासन की चलाई जा रही एम्बुलेंस सेवा का समय शाम 5 बजे के बाद सेवा नही उप्लब्ध कराई जा सकतीं हैं । 
मजबूर होकर मीडिया ने अस्पताल प्रभारी से इस घटना की पुष्टि कराई तब जाकर सिहोरा पशु चिकित्सा अस्पताल में ड्रॉ खान ने आकर अस्पताल परिसर का गेट खोला और बेजुबान पशु के गले से निकल रहें खून को साफ किया और बछिया को बैठा कर बताया कि मैं इस गाय की बछिया का इलाज एक दिन पहले से कर रहा हूँ ये कमजोर है कुछ खायेंगी तो ठीक हो जायेगीं । 
शाम 7 बजे के दौरान बछिया और अनफिट दिखाई दे रही थी । जिसे सिहोरा से उसे उपस्थित लोगों ने उसकी रक्षा को लेकर गोसलपुर गौ सेवा केन्द्र में भेजने की मांग की ।
बारिश शुरू होते ही नगर में दिखने लगतीं हैं पशुओं की भरमार देखने-सुनने वाला कोई नहीं ।
मेरी गलती या पशु पालक की गलती ये बताये कौन ।
नियम कानून बने और बने उपाय । नगर पालिका परिषद क्षेत्र में इनकी संख्या भरमार । 
काजी हाऊस खाली पड़े- भूसा गया बेकार ।
रात 7:20 बजे के दौरान जब बछिया को गोसलपुर गौ सेवा केंद्र के लिए वाहन चालक प्रवीण बर्मन के माध्यम से वहा भेजा गया । गाड़ी जैसे ही गौ सेवा केन्द्र गोसलपुर गैट के सामने पहुची उसने दम तोड़ दिया । 
अब सवाल उठता है कि पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा बीमार बछिया का जब इलाज किया जा रहा था तो बेजुबान की हालत में सुधार आना चाहिए था न कि उसकी मौत । 
सिहोरा पशु चिकित्सा अस्पताल में समुचित सुविधाएँ नहीं है, सरकार को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना चाहिए।

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