मध्य प्रदेश

धुंधले बिलों को पोर्टल पर चढ़ाकर पंचायत सचिव करवा रहे भुगतान, जिसमें न कार्य का पता न राशि

मूल्याकंन कर्ता और अफसर भी भुगतान की दे रहे अनुमति, सवाल- कैसे रुकेंगा भ्रष्टाचार
सरकार का दावा ऑनलाईन से आएगी पारदर्शिता, मेन्युअल से भी बुरी स्थिति

सिलवानी। भ्रष्टाचार और पंचायत सचिवों द्वारा की जा रही गडबड़ियों को रोकने के लिए शासन ने पंचायत दर्पण पोर्टल लॉंच किया था, जिसमें कार्य से सबंधित जानकारी अपलोड करना है ताकि आम आदमी भी पोर्टल पर काम की हकीकत को देख सकें और य​दि पोर्टल के हिसाब से काम नहीं हुआ है तो उसकी शिकायत कर सके। लेकिन यहां पर पंचायत सचिव पोर्टल पर जो जानकारी अपलोड कर रहे है, वह ऐसी जानकारी अपलोड कर रहे हैं, जो न तो पढ़ने में आ रहा है न समझने में आ रहा है। खास बात यह है कि इस जानकारी को मूल्याकंनकर्ता और अफसर भी एप्रूव करके भुगतान करवा रहे हैं, जिससे न केवल शासन की आंखों में धूल झोंक रहे हैं तो दूसरी ओर बड़ पैमाने पर फर्जी बिल लगाकर शासन को राजस्व का नुकसान पहुंचाया जा रहा है।। एक ओर प्रदेश की सरकार चाह रही है कि सब कुछ पारदर्शिता हो जो हो रहा वह ऑनलाईन और पोर्टल के जरिये सब देख सके कि क्या कार्य हुए, कितना कार्य हुआ, बिल किसका लगा, कौन सही या गलत, सब दिखाई पड़े की सही गलत क्या हैं। लेकिन धुंधले बिलों को पोर्टल में लग कर फर्जी बिलों का भुगतान करा रहे है।
सीमेंट की दुकान से स्टेशनरी, किराना दुकान से लोहा खरीदा
गौरतलब यह है कि जिन सरकारी पोर्टल को पारदर्शिता के मंशा से बना गया था आज उन्हें सरकारी पोर्टल में खुल के भ्रष्टाचार किया जा रहा है, फर्जी बिल लगा रहे है। ऐसे-ऐसे बिल लग रहे है कि सीमेंट के दुकान से स्टेशनरी खरीदी जा रही है और किराना दुकान से रेत लोहा खरीदने के बिल पोर्टल में लग रहे और भुगतान हो रहे, आज कोई इन बिलों की रेख-देख नहीं कि जा रही और इन फर्जी बिलों से बेजा फर्जी भुगतान लिया जा रहा है कुछ बिल ऐसा भी है जो पोर्टल में बिल लगे है वह पढने भी नहीं जा सकते है। धुंधले बिलों के जरिए लाखों का फर्जी भुगतान किया जा रहा है।
धुंधले बिलों से लाखों की निकासी, पोर्टल पर नहीं दिख रहा काम
ग्राम पंचायत पड़रिया खुर्द में सरपंच और सचिव ने इस व्यवस्था को दरकिनार कर दिया है। उन्होंने पोर्टल पर धुंधले बिल लगाकर लाखों रुपए की राशि निकाल ली।
पोर्टल पर यह साफ नहीं है कि किस काम के लिए भुगतान हुआ। कौन-सा निर्माण कार्य हुआ, यह भी नहीं दिख रहा। जो बिल अपलोड किए गए हैं, वे इतने धुंधले हैं कि पढ़े नहीं जा सकते। कई बिलों में जीएसटी नंबर तक नहीं है। इसके बावजूद भुगतान कर दिया गया।
17/11/ 2025 को पंचायत पड़रिया खुर्द ने 57000 हजार का भुगतान किया। यह राशि बिल नंबर 88, 10, 05, 88 और 11 के आधार पर दी गई। लेकिन पोर्टल पर ये बिल दिखाई नहीं दे रहे। इससे पहले 11/10 2025 को 125000 हजार रुपए का भुगतान तीन विक्रेताओं को किया गया। इन सभी के बिल भी धुंधले हैं।
बिलों की जांच नहीं हो रही। बिना स्पष्ट दस्तावेजों के भुगतान हो रहा है। इससे पोर्टल की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
इस संबंध में धुंधले बिलों को पोर्टल पर चढ़ाकर पंचायत सचिव करवा रहे भुगतान, जिसमें न कार्य का पता न राशि
मूल्याकंन कर्ता और अफसर भी भुगतान की दे रहे अनुमति, सवाल- कैसे रुकेंगा भ्रष्टाचार
सरकार का दावा ऑनलाईन से आएगी पारदर्शिता, मेन्युअल से भी बुरी स्थिति
सिलवानी। भ्रष्टाचार और पंचायत सचिवों द्वारा की जा रही गडबड़ियों को रोकने के लिए शासन ने पंचायत दर्पण पोर्टल लॉंच किया था, जिसमें कार्य से सबंधित जानकारी अपलोड करना है ताकि आम आदमी भी पोर्टल पर काम की हकीकत को देख सकें और य​दि पोर्टल के हिसाब से काम नहीं हुआ है तो उसकी शिकायत कर सके। लेकिन यहां पर पंचायत सचिव पोर्टल पर जो जानकारी अपलोड कर रहे है, वह ऐसी जानकारी अपलोड कर रहे हैं, जो न तो पढ़ने में आ रहा है न समझने में आ रहा है। खास बात यह है कि इस जानकारी को मूल्याकंनकर्ता और अफसर भी एप्रूव करके भुगतान करवा रहे हैं, जिससे न केवल शासन की आंखों में धूल झोंक रहे हैं तो दूसरी ओर बड़ पैमाने पर फर्जी बिल लगाकर शासन को राजस्व का नुकसान पहुंचाया जा रहा है।। एक ओर प्रदेश की सरकार चाह रही है कि सब कुछ पारदर्शिता हो जो हो रहा वह ऑनलाईन और पोर्टल के जरिये सब देख सके कि क्या कार्य हुए, कितना कार्य हुआ, बिल किसका लगा, कौन सही या गलत, सब दिखाई पड़े की सही गलत क्या हैं। लेकिन धुंधले बिलों को पोर्टल में लग कर फर्जी बिलों का भुगतान करा रहे है।
सीमेंट की दुकान से स्टेशनरी, किराना दुकान से लोहा खरीदा
गौरतलब यह है कि जिन सरकारी पोर्टल को पारदर्शिता के मंशा से बना गया था आज उन्हें सरकारी पोर्टल में खुल के भ्रष्टाचार किया जा रहा है, फर्जी बिल लगा रहे है। ऐसे-ऐसे बिल लग रहे है कि सीमेंट के दुकान से स्टेशनरी खरीदी जा रही है और किराना दुकान से रेत लोहा खरीदने के बिल पोर्टल में लग रहे और भुगतान हो रहे, आज कोई इन बिलों की रेख-देख नहीं कि जा रही और इन फर्जी बिलों से बेजा फर्जी भुगतान लिया जा रहा है कुछ बिल ऐसा भी है जो पोर्टल में बिल लगे है वह पढने भी नहीं जा सकते है। धुंधले बिलों के जरिए लाखों का फर्जी भुगतान किया जा रहा है।
धुंधले बिलों से लाखों की निकासी, पोर्टल पर नहीं दिख रहा काम
ग्राम पंचायत पड़रिया खुर्द में सरपंच और सचिव ने इस व्यवस्था को दरकिनार कर दिया है। उन्होंने पोर्टल पर धुंधले बिल लगाकर लाखों रुपए की राशि निकाल ली।
पोर्टल पर यह साफ नहीं है कि किस काम के लिए भुगतान हुआ। कौन-सा निर्माण कार्य हुआ, यह भी नहीं दिख रहा। जो बिल अपलोड किए गए हैं, वे इतने धुंधले हैं कि पढ़े नहीं जा सकते। कई बिलों में जीएसटी नंबर तक नहीं है। इसके बावजूद भुगतान कर दिया गया।
17/11/ 2025 को पंचायत पड़रिया खुर्द ने 57000 हजार का भुगतान किया। यह राशि बिल नंबर 88, 10, 05, 88 और 11 के आधार पर दी गई। लेकिन पोर्टल पर ये बिल दिखाई नहीं दे रहे। इससे पहले 11/10 2025 को 125000 हजार रुपए का भुगतान तीन विक्रेताओं को किया गया। इन सभी के बिल भी धुंधले हैं।
बिलों की जांच नहीं हो रही। बिना स्पष्ट दस्तावेजों के भुगतान हो रहा है। इससे पोर्टल की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
इनका कहना है सचिवों के साथ बैठक के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए गए थे किसी भी पंचायत पोर्टल पर धूदले बिल ना लगाये इसके बाद भी अगर कोई धुंधले बिल लगाता है तो जांच करा कर नियम अनुसार कार्रवाई की जायेगी नीलम रायकवार सीईओ जनपद पंचायत सिलवानी का कहना है कि सचिवों के साथ बैठक के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए गए थे किसी भी पंचायत पोर्टल पर धूदले बिल ना लगाये इसके बाद भी अगर कोई धुंधले बिल लगाता है तो जांच करा कर नियम अनुसार कार्रवाई की जायेगी।

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