अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति पुनः प्रारंभ किए जाने की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा
सिलवानी । सोमवार को सिलवानी सब धर्म एकता समिति ने अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति बंद किए जाने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए ज्ञापन सौंपकर प्रस्ताव वापस लेने की मांग की है।
अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को कक्षा पहली से आठवीं तक मिलने वाली अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति बंद किए जाने का प्रस्ताव लाने की जानकारी सामने आने के बाद अल्पसंख्यक समुदाय में चिंता का माहौल है। इसे लेकर सोमवार सुबह धर्म एकता समिति के पदाधिकारी की ओर से कुछ लोग ज्ञापन देने एसडीएम कार्यालय पहुंचे। राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार रामजीलाल वर्मा को सौंपे गए ज्ञापन में मांग की गई कि यह प्रस्ताव वापस लिया जाना चाहिए। अल्पसंख्यक छात्रों की छात्रवृत्ति बंद करने से सभी समाजों में आक्रोश है। राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल के माध्यम से अल्पसंख्यक छात्र छात्रवृत्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन करते थे। इस वर्ष भी पहली कक्षा से आठवीं कक्षा तक के अल्पसंख्यक छात्रों ने छात्रवृत्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन जमा किया, लेकिन 15 नवंबर को अल्पसंख्यक मंत्रालय ने केंद्र सरकार ने रद्द कर दिया। देश में कक्षा पहली से आठवीं तक जो अल्पसंख्यकवर्गों के छात्रों को छात्रवृत्ति दी जाती थी। राइट टू इंफॉर्मेशन 2009 में जो पारित हुआ था छात्रों को 1000 रूपये प्रतिमाह देने के बनाई गई थी वह बंद कर दी गई है । जिससे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है । आज देश में बच्चो को सरकारों के कारण बड़ी परेशानी का समाना करना पड़ रहा है। राइट टू एजुकेशन के तहत योजना बनी थी कि 25 प्रतिशत बच्चो को शिक्षा निशुल्क देने का प्रस्ताव पारित हुआ था मगर सिर्फ मदरसे के छात्रों को बंद करने के चक्कर में सरकार ने सभी स्कूल की छात्रवृत्ति बंद कर दी। आज देश में लाखों करोड़ों बच्चे मजबूरी में मजदूरी करने को सड़क पर आ गए हैं। शिक्षा वैसे भी बहुत महंगी हो गई थी और उस पर सरकार ने छात्रवृत्ति बंद करके उनकी कलम और उनके भविष्य को रोक दिया है।
अकेले मध्य प्रदेश राज्य में मुस्लिम, ईसाई, जैन के करीब 10 लाख छात्र हैं। सिख, जैन और नव बौद्धों को नुकसान होने की संभावना है। अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) से प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति राज्य और देश भर में अल्पसंख्यक समुदाय के लाखों छात्रों के लिए एक जीवन रेखा थी।
इस बात पर हैरानी जाहिर की क्योंकि इसे रद्द करना रिलीज के अंतिम चरण में था! एनएसपी में छात्रवृत्ति के लिए आवेदन एक लंबी प्रक्रिया है और आवेदक के फॉर्म भरने के साथ शुरू होता है, फिर यह स्कूल सत्यापन से लेकर जिला और राज्य सत्यापन तक और बाद में मंत्रालय द्वारा सत्यापन की एक श्रृंखला से गुजरता है।
सर्व धर्म एकता समिति के संस्थापक कामरान खान ने कहा कि अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति बंद किए जाने के प्रस्ताव की जानकारी सामने आने से समाज में चिंता है। इससे गरीब और असहाय बच्चे शिक्षा से वंचित होजाएंगे। साथ ही अशिक्षा बढ़ेगी सरकार एक तरफ सबका साथ सबका विकास की बात करती है, लेकिन सही मायनों में अल्पसंख्यक समुदाय को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित कर रही है। उन्हें शिक्षा से वंचित करने के लगातार षडयंत्र हो रहे हैं इस प्रस्ताव अल्पसंख्यक समुदाय शिक्षा के क्षेत्र में पहले से ही पिछड़ा हुआ है। बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक छात्र छात्रवृत्ति के माध्यम से शिक्षा प्राप्त करते थे, लेकिन इस छात्रवृत्ति के बंद होने से एक बड़ी अल्पसंख्यक आबादी शिक्षा से बाहर हो जाएगी। अल्पसंख्यक समुदाय के शैक्षिक और संवैधानिक अधिकारों के लिए हम संघर्षरत हैं अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति बंद करने के फैसले पर केंद्र सरकार को पर विचार किया जाना चाहिए। अल्पसंख्यक मंत्रालय एक प्रस्ताव ला रहा है, इसमें कक्षा पहली से आठवीं तक अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को मिलने वाली प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति बंद करने का निर्णय लिया गया है। केंद्र सरकार को इस पर विचार करना चाहिए।अल्पसंख्यक समाज बड़ा आंदोलन करेगी अगर सरकार अल्पसंख्यक छात्रों की छात्रवृत्ति अगर चालू नहीं करेगी तो सड़को पर आकर विरोध प्रदर्शन करेंगे ।
इस अवसर पर नगर मुस्लिम विकास परिषद अध्यक्ष नासिर खान बड़े गुड्डू, यूथ कांग्रेस नगर अध्यक्ष मजहर खान, मोहम्मद सईद, शराफत खान, मोहम्मद मुख्तार, आकिल खान, मोहम्मद मसूद, गुलाबास खान, जोएव पटेल इत्यादि उपस्थित रहे।



