मध्य प्रदेश

जिस इंसान के जीवन में परोपकार की भावना न हो, उसके जीवन का क्या लाभ : सोलंकी

हरीश मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार
रायसेन । संघ कार्यालय में संघ के अनुषांगिक संगठन सेवा भारती की बैठक संपन्न हुई। जिसमें 10 जनवरी से 25 जनवरी तक चलने वाले निधि संग्रह अभियान के संबंध में विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक को संबोधित करते हुए सुरेंद्र सोलंकी प्रांतीय संगठन मंत्री ने कहा कि परोपकार की भावना की अपनी अनोखी महत्ता है। जैसे मेंहदी पीसने वाले को मेहंदी का रंग दिखाई नहीं देता, रचने पर दिखाई देता है। वैसे ही पूरे देश में सेवा भारती संगठन के कार्यकर्ताओं ने जो परोपकार की भावना से शिक्षा, संस्कार, सामाजिक जागरूकता, चिकित्सा, स्वावलंबन , धर्म परिवर्तन से वनवासियों की रक्षा आदि के क्षेत्र में जो कार्य किए हैं, उसके रंग आजादी के अमृत वर्ष में दिखाई देने लगे हैं। समाज के हर व्यक्ति का दायित्व है कि वह संसार को उतना तो अवश्य लौटा दे, जितना उसने समाज से लिया है। चाणक्य भी मानते थे कि परोपकार ही जीवन है। जिस इंसान के जीवन में परोपकार की भावना न हो, उसके जीवन का क्या लाभ ? वास्तव में परोपकार के बारे में गोस्वामी तुलसीदास की ये उक्ति सब कुछ बयां कर देती है-‘परहित सरिस धर्म नहीं भाई । परोपकार से बढ़कर दूसरा धर्म नही है । इसी परोपकारी भावना को लेकर सेवा भारती संगठन द्वारा 10 से 25 जनवरी तक निधि संग्रह अभियान प्रारंभ किया जा रहा है। इस अभियान में आहुति देकर हमें सत्य संकल्प लेना है । निर्मल, पावन भावना, सभी के सुख की कामना।
बैठक में नवीन जोशी विभाग कार्यवाह, सौरभ जी विभाग प्रचारक, गोविंद गौर जिला कार्यवाह, मनु जी जैन जिला प्रचारक, राजेश भार्गव सेवा भारती विभाग संयोजक, अवध नारायण सक्सेना, राजकुमार ठाकुर, रजनी अग्रवाल,
नारायण सिंह कुशवाह, हरीश मिश्र, संतोष साहू, चंद्रशेखर शर्मा, कैलाश ठाकुर, कंछेदी चक्रवर्ती, मनोज कुशवाह, शंभू दयाल ठाकुर, राघवेंद्र सिंह ठाकुर, जितेंद्र शर्मा, राजेश लोधी, शक्ति सिंह बघेल, राम कुमार ठाकुर उपस्थित थे।

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