ज्योतिष

आज का पंचाग मंगलवार 18 अक्टूबर 2022

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 18 अक्टूबर 2022

हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🪙 18 अक्टूबर 2022 दिन मंगलवार को राधाष्टमी का पावन व्रत है। आज अरुणोदय में मथुरा के राधा कुण्ड में स्नान करना एवं राधा रानी का दर्शन एवं पूजन करना चाहिये। क्योंकि आज राधा रानी की जन्म जयन्ती है। महाराष्ट्र में आज के इस व्रत को कराष्टमी के रूप में मनाया जाता है। आज भगवान सूर्य तुला राशी में 09:40 AM पर प्रवेश करेंगे। आज सूर्योदय के उपरान्त संक्रान्ति का पुण्यकाल होगा। आज गोदावरी में स्नान के उपरान्त तिल का दीप एवं दुग्धादी का दान करना चाहिये। आप सभी सनातनियों को राधा जयन्ती की हार्दिक शुभकामनायें।।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए । मंगलवार को बजरंगबली की पूजा का विशेष महत्व है।
*मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है। *मंगलवार के व्रत से सुयोग्‍य संतान की प्राप्ति होती है, बल, साहस और सम्मान में भी वृद्धि होती है।* 🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022_
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – कार्तिक माह
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथिः- अष्टमी तिथि 11:59:00 तक तदोपरान्त नवमी
🖍️ तिथि स्वामीः- अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान शिव जी हैं तथा नवमी तिथि की स्वामिनि दुर्गा जी हैं।
💫 नक्षत्रः- पुष्य 32:02:44 तक तदोपरान्त अश्लेषा
🪐 नक्षत्र स्वामीः- पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि देव हैं तथा अश्लेषा नक्षत्र के स्वामी बुध है।
📣 योगः- सिद्ध 16:51:27 तक तदोपरान्त साध्य
प्रथम करण : कौलव – 11:57 ए एम तक
द्वितीय करण :- तैतिल – 01:08 ए एम, अक्टूबर 19 तक गर
🔥 गुलिक कालः- शुभ गुलिक 12:06:00P.M से 01:31:00 P.M तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से गुड़ खाकर जायें।
🤖 राहुकालः- राहु काल 02:57:00P.M से 04:23:00P.M तक राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया हैं।
🌞 सूर्योदय – प्रातः 05:52:48
🌅 सूर्यास्त – सायं 17:21:12
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:43 ए एम से 05:33 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:08 ए एम से 06:23 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:43 ए एम से 12:29 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:00 पी एम से 02:46 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:37 पी एम से 06:01 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:49 पी एम से 07:04 पी एम
💧 अमृत काल : 12:53 ए एम, अक्टूबर 19 से 02:40 ए एम, अक्टूबर 19
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:41 पी एम से 12:32 ए एम, अक्टूबर 19
☄️ परिघ योग- दोपहर बाद 3 बजकर 9 मिनट तक
🕉️ आर्द्रा नक्षत्र- देर रात 2 बजकर 15 मिनट तक
💥 स्वर्ग लोक की भद्रा- सुबह 7 बजकर 3 मिनट से रात 8 बजकर 16 मिनट तक
🚕 यात्रा शकुन- दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-हनुमान मंदिर में पंचमुखा दीपक प्रज्ज्वलित करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – ओम पुरी – हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता, देवदर्शन, शुक्र गोचर
✍🏽 *विशेष – अष्टमी को नारियल एवं नवमी को काशीफल अर्थात कोहड़ा एवं कद्दू दोनों ही त्याज्य होता है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। 🗺️ *_Vastu tips* 🗽
किचन सिंक और नल होना चाहिए इस दिशा में !
*न ही सिर्फ घर का निर्माण करते समय बल्कि अंतरिक्ष के विभिन्न खंडों को डिजाइन करते समय भी वास्तु शास्त्र एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आज हम रसोई की आंतरिक व्यवस्था पर कुछ प्रकाश डालेंगे।बता दे की, किचन का इंटीरियर डिजाइन करते समय कुछ चीजें बहुत जरूरी होती हैं। किचन सिंक, पानी के नल से लेकर पानी लगाने तक, ये सभी चीजें किचन की ईशान कोण में होनी चाहिए। *वास्तु शास्त्र के मुताबिक कोई भी स्वतंत्र घर और साथ ही बंद घर, जिसका अर्थ है कि आप स्वतंत्र रूप से बने घर में रहते हैं या फ्लैट, रसोई घर का निर्माण उसकी स्थिति को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए जो कि उत्तर पूर्व की ओर होना चाहिए। बता दे की, रसोई के अंदर नल, सिंक, पानी के बर्तन आदि को उत्तर से पूर्व दिशा के बीच रखना चाहिए। इस नियम में किसी भी हालत में कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
दालचीनी फेस पैक बनाने की विधि
*सबसे पहले दालचीनी, नींबू और शहद को साइड में रख लें। अब दालचीनी की एक छाल को मिक्सी में पीस लें। अब इसे छानकर महीन भाग अलग कर लें। इस पाउडर में नींबू और शहद का रस डालकर मिक्स कर लें। इस पेस्ट को चेहरे पर लगा लें और 15 मिनट के लिए छोड़ दें। जब पेस्ट सूख जाएं तो इसे साफ पानी से साफ कर लें। चेहरा धुलने के बाद माॉश्चराइजर जरूर लगाएं। *दालचीनी में एंटी फंगल और एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो पिंपल्स को आने से रोकता है। अच्छे रिजल्ट के लिए सप्ताह में दो बार दालचीनी फेस पैक का इस्तेमाल करें। एक बात का ख्याल रखें कि दाल चीनी फेस पैक लगाने से पहले चेहरे को साफ पानी या फेसवॉश से जरूर साफ करें। इससे चेहरे पर मौजूद गंदगी हट जाएगी। दालचीनी पिंपल की वजह से होने वाले दाग-धब्बों को भी कम करता है। दालचीनी को खाने से त्वचा से जुड़ी बीमारियां भी नहीं होती है जैसे- पिम्पल्स, रिंकल्स, झुर्रियां।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
*डिस्टर्ब होता है इंसुलिन प्रोसेस आपके दिमाग में भी सवाल आ रहा होगा कि आखिर ठंड के मौसम में डायबिटीज के मरीजों की मुश्किल क्यों बढ़ जाती है। तो आपको बता दें कि इस मौसम में इंसुलिन बनने का प्रोसेस डिस्टर्ब होता है। ऊपर से ब्लड गाढ़ा हो जाता है और जब टेम्परेचर डाउन हो तो शरीर को अच्छे से चलाने के लिए ज्यादा एनर्जी और फिर ज्यादा इंसुलिन की जरूरत पड़ती है। सर्दी में खाने-पीने की चीजें भी खूब मिलती हैं और भूख भी खूब लगती है और ओवरइंटिग की वजह से शुगर लेवल भी बिगड़ जाता है। *वर्कआउट रखेगा आपको फिट* *ऐसे में मौसम में ठंडक आने पर जो लोग रेगुलर वर्कआउट करते हैं, वो कितना भी खाएं उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी। दिक्कत उन्हें होती है जो सिर्फ बैठे-बैठे खाते रहते हैं और पसीना नहीं बहाते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि आप रोज कम से कम आधे घंटे करसत, योग या फिर तेज वॉक करें।
📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️
*हम लोग साधारण स्वच्छ पानी से रोज स्नान करते हैं। स्नान करने से रिलेक्स महसूस होता है और शरीर की बदबू दूर होती है। भारत को प्रकृति का खूब उपहार मिला है नदी, तालाब, झरने, पर्वत, पठार, समुद्र तट और समतल मैदान हमें सशक्त करते हैं। बहुत कम लोग हैं जो गर्म जल कुंड से परिचित हैं। ठंड के मौसम में गर्म जल कुंड में स्नान करने जैसा मजा कहीं और नहीं मिल सकता है। ठंड में लोग गीजर का खूब इस्तेमाल करते हैं। कहीं-कहीं प्रकृति खुद पानी को गर्म करके उनमें औषधी गुण धोल देती है। जहां कहीं भी इस प्रकार का पानी प्रवाहित होकर इकट्ठा होता है उसे गर्म जल कुंड बोला जाता है। हेल्थ के लिहाज से इस प्रकार के गर्म जल कुंड खूब फायदेमंद होते हैं। इसलिए यहां पर्यटकों की भीड़ लगती है। भारत के अलावा अन्य देशों के पर्यटक भी यहां स्वास्थ्य लाभ के लिए आते हैं। *दरअसल, गर्म जल कुंडों में पर्वत से पानी प्राप्त होता है। जिस पर्वत में सोडियम, गंधक और सल्फर की ज्यादा मात्रा पाई जाती है वह सामान्य पानी के मुकाबले ज्यादा गर्म और औषधीय गुणों से परिपूर्ण पानी प्रवाहित करते हैं। इस प्रकार के गर्म जल कुंड में स्नान करने से इंसान के तनाव, स्किन संबंधी बीमारियां और अन्य परेशानियां दूर होती हैं।
*राजगीर के गर्म जल कुंड यहां वैभवगिरी पहाड़ी पर अनेकों गर्म कुंड हैं। ऐसा माना जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने यहां गर्म कुंडों का निर्माण देवी देवताओं के लिए किया था। यहां के ऋषि कुंड, गंगा यमुना कुंड, गौरी कुंड, चन्द्रमा कुंड और राम लक्ष्मण कुंड खूब विख्यात हैं। *तुलसी श्याम कुंड गुजरात के जूनागढ़ में स्थित यह गर्म जल कुंड तीन भागों में बंटा है। तीनों कुंडों का तापमान अलग-अलग है। यहीं पास में 700 साल पुराना मंदिर भी है।
*मणिकरण यह हिमाचल प्रदेश का गर्म जल कुंड है। इसके पानी से गुरुद्वारे के चावल भी पकाए जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस कुंड में स्नान करने से सभी बीमारियां दूर होती हैं। *पनामिक कुंड यह लद्दाख के नुब्रा वैली के एक गांव में स्थित है। ये गर्म कुंड औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। इस कुंड का पानी इतना अधिक गर्म रहता है कि इसको छूने पर अंगुलियां जल सकती हैं। आप इस कुंड में स्नान नहीं कर सकते किंतु इस कुंड के बहाने इस खूबसूरत जगह की यात्रा जरूर कर सकते हैं।◄┉┉┉┉┉┉༺✦ᱪ✦༻┉┉┉┉┉┉►
⚜️ *अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है। *मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।
*_अष्टमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह व्यक्ति धर्मात्मा होता है। मनुष्यों पर दया करने वाला तथा हरेक प्रकार के गुणों से युक्त गुणवान होता है। ये कठिन से कठिन कार्य को भी अपनी निपुणता से पूरा कर लेते हैं। इस तिथि के जातक सत्य का पालन करने वाले होते हैं यानी सदा सच बोलने की चेष्टा करते हैं। इनके मुख से असत्य तभी निकलता है जबकि किसी मज़बूर को लाभ मिले।

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