आज की नौजवान पीढ़ी की जिंदगी मोबाइल ने बदल दी है : प्रभु नागर
ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । उंगली अब माला पर नही मोबाइल पर चल रही है। अब तो धंधे वाला व्यक्ति भी नही सोच रहा है कि कोई नई योजना बनाऊं वह भी ग्राहक को सामान देकर फिर से मोबाइल मैं लग जाता है। अब तो कई व्यापारियों की दुकानें भगवान भरोसे ही चल रही है। बच्चे स्कूल से आए बस्ता फेका मोबाइल उठाया और लग गए। वही हाल महिलाओं और अस्सी साल के लोगों का हो गया। आज की नौजवान पीढ़ी कहां जा रही है। मोबाइल ने इनकी जिंदगी बदल दी है। पहले लोग मंदिर जाते थे वह मूर्तियों को हाथ में लेते थे। भगवान के भजन और भक्ति करते थे। लेकिन आज की पीढ़ी मोबाइल हाथ में रखती है और क्या- क्या देखती है यह मुझे बताने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि कथा नौका का काम करती है। जबकि शब्द पार लगाने का काम करते हैं। धर्म का काम खर्चा जोड़ने से नहीं होता है। वह केवल हाथ जोड़ने से हो जाता है।
ज्ञान गंगा यज्ञ समिति द्वारा उत्कृष्ट स्कूल के मैदान पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस पर संत प्रभु नागर ने उक्त बात कही। कल कथा मैं संत प्रभु नागर ने कहा था कि अपनी दाड़ी हटाओ आज दूसरे दिन दो सौ युवाओं ने दाढ़ी साफ करा ली और सभी युवाओं ने अपने नाम सहित गुरुदेव से भेंट की जिसपर संत श्री ने सभी का अभिवादन करते हुए उनके माता पिता को धन्यवाद दिया।
उन्होंने कहा कि आप सीधे द्वारकाधीश से जुड़े जिनका मन चंचल होता है वह सीधा द्वारकाधीश से जोड़ता है आज धर्म में व्यक्ति का ना मन लग रहा है और ना श्रद्धा और धन लग रहा है सिर्फ दुनिया भर के आडंबर में उलझा हुआ है। समय शक्ति संपत्ति यह तीनों भगवान के कार्य मैं न लगे तो आप समझ लेना कि जिसका धन अच्छा है वह खुले मैं है और जिनका धन गलत है वह ताले मै है। उसी तरह अच्छा व्यक्ति खुले मैं घूमता है और दुर्जन व्यक्ति जेल मे होता है।
उन्होंने कहा कि जिनको अच्छी प्रेरणा आती है उसका धन धान्य कई गुना बढ़ जाता है। इसका बढ़ा उदाहरण है ये जिन दो सौ बालकों ने अपनी दाढ़ी कटवा ली। वह भी पुण्य का कार्य है। क्योंकि इन्होंने दूसरो को प्रेरणा दी है। परमात्मा नाम मैं निराकार है और जब हम माला जपते है तो परमात्मा आकर हो जाता है।
श्री नागर ने कहा कि वर्तमान में ऐश्वर्य की चर्चा तो सभी करते हैं, किंतु ईश्वर की चर्चा करने में कोताही बरतते हैं। जीवन में कांड कभी मत करो, कर्मकांड के साथ सुंदरकांड भी करो। क्योंकि दुनियादारी त्याग, भक्ति और समपर्ण से चलती है। झूठ, धोखेबाजी, छल, कपट से नहीं। इससे बचने के लिए ईश्वर के प्रति आस्था और विश्वास रखना आवश्यक है।
कार्यक्रम के शुरू में क्षेत्रीय विधायक पूर्व कैबिनेट मंत्री ठाकुर रामपाल सिंह मुख्य द्वार पर कथा सुनने आने वालों का अभिनंदन करते नजर आए। कथा के समापन पर यजमान सहित उपस्थित लोगों ने व्यासपीठ की आरती की ।




