मध्य प्रदेश

कयासबाजी का दौर…किसकी बनेगी नगर सरकार ! फिर भाजपा या कांग्रेस को मौका

निकाय चुनाव: ईवीएम में कैद प्रत्याशियों का भाग्य 17 को खुलेगा
पहली बार अप्रत्यक्ष प्रणाली से हो रहे चुनाव से चुनी जाएगी नगर सरकार, सामने होंगी तमाम चुनौतियां
सिलवानी में दो बार से बीजेपी की परिषद, फिर भी आस, कांग्रेस को उम्मीद जनता से
सिलवानी।
हाल ही में संपन्न हुए नगरीय निकाय चुनाव में अप्रत्यक्ष तौर पर चुनी जाने वाली परिषद को लेकर तमाम तरह की कयासबाजी लगाई जा रही है। तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं किसी को सत्ता के बलबूते पर बीजेपी की ही परिषद बनने की उम्मीद है तो किसी को बदलाव के चलते कांग्रेस की परिषद बनने की उम्मीद है। कयासबाजी यहां तक है कि फिर भाजपा आएगी या कांग्रेस को जनता मौका देगी। यह सुनिश्चत ईवीएम में कैद पार्षदों का भविष्य ही कर पाएगा।
सिलवानी को नगर परिषद बनने के बाद हुए प्रथम चुनाव में भाजपा की मेनकाश्याम साहू को चुना गया था। इसके बाद हुए द्वितीय चुनाव में मतदाताओं ने भाजपा एवं कांग्रेस को नकारते हुए कांग्रेस से बगावत कर मैदान में कूदे निर्दलीय प्रत्याशी मुकेश राय पर भरोसा जताते हुए अध्यक्ष बनाया था। परंतु प्रदेश में भाजपा की सरकार होने से वह विकास कार्यो को गति नहीं दे पा रहे थे। एक साल बाद वह भाजपा की शरण में पहुंच गये और इस तरह द्वितीय परिषद भाजपामय हो गई थी।
दरअसल, सिलवानी में लगातार बीजेपी की परिषद है, बावजूद इसके पार्टी को उम्मीद है कि हमारी ही परिषद बन रही है। वहीं, कांग्रेस को जनता से उम्मीद है कि मौका देगी? बदलाव के बहाने और नप की खामियों को सतत रूप से देखने और जनता के मुद्दों के बलबूते पर वे जीत की आस कर रहे हैं। हालांकि अभी स्पष्ट स्थिति किसी की नहीं है। वैसे यह भी देखा गया है कि हर वार्ड में हर पार्टी अपनी जीत पक्की मान रही है। 1 से 15 वार्ड तक के समीकरण अपने हिसाब से ही मान रहे हैं लेकिन यह भी अंदेशा लगाया जा रहा है कि 9 और 6 का रेशो रहेगा, जिसमें से हो सकता है कि 9 सीटें कांग्रेस को मिल जाए या यह भी हो सकता है कि 9 सीटें बीजेपी को मिल जाए, बाकि का गणित जनता के भरोसे है।
चुनावी चौपाल : भिया… कुछ के नी सकते अपन
चाय और पान की दुकानों पर की जाने वाली चर्चा में लोग तरह-तरह की कयासबाजी लगा रहे हैं। इसके तहत कोई कह रहा है कि भिया कुछ भी हो सकता है, कुछ भी के पाना मुश्किल है…। स्थानीय भाषा में लोग तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। हर वार्ड का अपना-अपना गणित बता रहे हैं। कोई आधी-आधी सीटें बीजेपी-कांग्रेस की बात रहे हैं तो कोई अपने हिसाब का आंकड़ा बता रहे। हालांकि चुनावी चौपाल में चर्चा है कि सिलवानी के वार्ड-04, 09, 10, 13, 14, 15 वार्डों में भी कांटे की टक्कर है। हो सकता है यहां से चौंकाने वाले परिणाम आएं।
कांग्रेस की चुनौतियां… कमजोर विपक्ष और निष्क्रियता
भले लगातार सिलवानी में बीजेपी की नगर परिषद हो लेकिन कांग्रेस को नगर की जनता का विरोध झेलना पड़ रहा है। उसके पीछे कारण है बेहतर विपक्ष नहीं बन पाना। कांग्रेस से जनता को शिकायत है कि उनकी आवाज वे नहीं बन पाए, न परेशानियों में खुलकर सामने आए। पानी को लोग परेशान हैं लेकिन कोई कांग्रेसी यह नहीं पूछने आया कि परिषद आपकी सुन भी रही या नहीं? इसी कारण लोगों में रोष है, विरोध है। यह कांग्रेस को झेलना पड़ सकता है।
बीजेपी की चुनौतियां… परिषद की नाकामियां और जनता की दिक्कतें
10 साल से सतत राज करने के बाद भी व्याप्त अव्यस्थाएं बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती है। हर दिन उजागर होती परेशानियों, खामियों और पानी, सड़क की किल्लत ने बीजेपी को टारगेट किया है। लोगों का कहना है कि जब केंद्र, राज्य में आपकी सरकारें हैं तो हम परेशान क्यों हैं? हमारी तकलीफें क्यों नहीं समझी गईं? ऐसी स्थिति में बीजेपी के सारे दावे और वादे यहां अधूरे साबित हो सकते हैं, यह विरोध इस निकाय चुनाव में उन्हें झेलना पड़ सकता है।

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