मध्य प्रदेश

गरीबों की थाली अब रह गई खाली, सस्ते अनाज के नाम पर वाहवाही लूटने वाली शिवराज, मोदी सरकार

राशन दुकानों से गरीबों को बजाय गेंहू बांटने की बजाय सड़ा घुना चावल वितरित करवा रहीं, फ्री में बांटने वाले गेहूं पर लगाम लगा दी। पीडीएस राशन दुकानों से गरीबों को दे रहे चावल, वह उसे बाजार में बेचकर खाने के लिए खरीद रहे हैं गेहूं
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन।
प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, मोदी सरकार के भाजपा सांसद विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा गरीबों को राशन दुकानों से बांटे जाने वाले सस्ता अनाज ,गरीबों की थाली अब बिल्कुल नहीं रहेगी खाली के ढिंढोरे पीटकर वाहवाही लूट रहे।लेकिन अब इसकी सच्चाई अलग ही है।बताया जाता है कि गरीबों के नाम सस्ते पीडीएस गेंहूँ की खरीदी इस साल सरकारों ने नहीं की।बल्कि पूरा अनाज विदेशों में निर्यात कर खजाना भर लिया गया है।अब स्टॉक में वेयर हाउस में रखा घुना घटिया चावल ही गरीबों के लिए वितरित किया जा रहा है।
फ्री अनाज पर लगाई लगाम….
युवा कांग्रेस अध्यक्ष विकास शर्मा, रूपेश तन्तवार एनएसयूआई अध्यक्ष हर्ष वर्धन सोलंकी ने बताया कि बाजार में गेहूं के दाम में तेजी आने के बाद अब सरकार ने फ्री में बांटने वाले गेहूं पर लगाम लगा दी है। ऐसे में गरीब की थाली से गेहूं की रोटी गायब हो गई है और उसे मजबूरी में चावल खाकर अपना जीवन यापन करना पड़ रहा हैं। गेहूं का आवंटन कब होगा यह अभी स्पष्ट नहीं हैं। ऐसे में अब गरीबों के सामने बाजार से मंहगे दाम पर गेहूं खरीदकर खाना परेशानी बना हुआ है।ऐसे में सरकार की नि:शुल्क खाद्यान वितरण (अन्नपूर्णा योजना) गरीब परिवारों को सहारा नहीं दे पा रही है।
इस मामले में जिम्मेदार भी जानकारी देने से बच रहे हैं। पिछले दो माह से ऐसी स्थिति क्षेत्र के सहकारी उपभोक्ता भंडारों पर देखने को मिल रही है। जिसकी वजह से गेहूं के स्थान पर गरीब परिवारों को चावल का वितरण किया जा रहा हैं, जो परिवारों के लिए आर्थिक समस्या पैदा कर रहा हैं।
20 से 22 रुपए किलो में खरीद रहे गेहूं…..
गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों से जब बात की तो पता चला कि सहकारी उपभोक्ता भंडार का चावल उपभोक्ताओं के द्वारा खुले बाजार में 12 से 14 रुपए प्रति किलो बेच रहे हैं। इसके बदले में वह 20 से 22 रुपए प्रति किलो के दाम पर गेहूं बाजार से खरीदकर अपना गुजारा कर रहे हैं। ऐसे में एक उपभोक्ता पर लगभग 8 रुपए प्रतिकिलो का भार आ रहा है।
दिक्कत कम नहीं, लोगों को अलग से करना पड़ रहा है रुपयों का इंतजाम…..
इस संबंध में जब गरीब परिवारों के मुखिया अनुसूइया बाई, पर्वत सिंह, सरोज अहीरवार ,जानकी देवी, अनोखीलाल जाटव, देवी सिंह व मनोहरलाल, मुबीन खान रेशमा बी से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि पिछले दो माह से उन्हें गेहूं के स्थान पर चावल का वितरण किया जा रहा है। कई बार इस संबंध में सहकारी उपभोक्ता भंडार के सेल्समेन से गेहूं देने को कहा भी, लेकिन उन्होंने कहा कि गेहूं का आवंटन नहीं होने से चावल दिया जा रहा है। ऐसे में हमारे सामने दिक्कत खड़ी होने लगी है। प्रति सदस्य 4 किलो गेहूं मिलने से हमें पूरे महीने भर का राशन उपलब्ध हो जाता था और हमें बाजार में खरीदने नहीं जाना पड़ता था। लेकिन अब गेहूं खरीदने के लिए अलग से पैसे का इंतजाम करना पड़ रहा है, जो हमारे लिए गंभीर आर्थिक समस्या बना हुआ है।
गेहूं के लिए बेचना पड़ रहा चावल….
जिला खाद्य विभाग के सूत्रों के अनुसार क्षेत्र के 1 लाख 51 हजार 616 गरीब व अति गरीब उपभोक्ताओं को पहले दो माह से प्रधानमंत्री गरीब कल्याण व मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना में के तहत प्रति व्यक्ति 8 किलो गेहूं व 2 किलो चावल उपभोक्ताओं को दिया जाता था। लेकिन पिछले दो माह से इसे संशोधित कर गेहूं के स्थान पर चावल की आपूर्ति बढ़ा दी गई हैं।
अब 4 हजार 688 क्विंटल गेहूं व 10 हजार 822 क्विंटल चांवल का आवंटन हो रहा है। ऐसे में गरीबों को अपनी थाली में गेहूं की रोटी खाने के लिए सरकारी राशन दुकान से मिलने वाले चावल को बाजार में बेचना पड़ रहा हैं, जिसकी वजह से उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना भी करना पड़ रहा है।

Related Articles

Back to top button