मध्य प्रदेश

गरीबों को गेहूं की जगह अब ज्यादा मात्रा में चावल थमाया जा रहा है, गरीब परेशान

पीडीएस में बदलाव : सरकार ने गोदामों में रखा 223 करोड़ का 10,97,697 क्विंटल गेहूं प्राइवेट कंपनियों और व्यापारियों को बेचा
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन।
केंद्र की मोदी सरकार ने गरीबों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत दिए जाने वाले राशन में बड़ा बदलाव किया है। इस बदलाव के कारण गरीबों को गेहूं की जगह अब ज्यादा मात्रा में चावल थमाया जा रहा है । ऐसी स्थिति में गरीब परिवारों को मजबूरी चावल बेचकर गेहूं की व्यवस्था जुटाना पड़ रही है। हालांकि गेहूं खरीदना इन परिवारों के लिए महंगा पड़ रहा है।लेकिन उन्हें इसके लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
इस बदलाव का यह है कारण ,…
रूस-यूक्रेन युद्ध को माना जा रहा है। इस युद्ध के कारण विदेशों में गेहूं की डिमांड बढ़ गई तो प्रदेश सरकार ने भी अपने गोदामों में सालों से भरे पड़े गेहूं को ठिकाने लगाने के लिए प्राइवेट कंपनियों और व्यापारियों को बेच दिया। जिले से ही 222 करोड़ 91 लाख 81 हजार 576 रुपए का करीब 10,97,697 क्विंटल सरकारी गेहूं बेचा गया है। सरकार को उम्मीद थी कि वह समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी करके अपने गोदामों को फिर से भर लेगी, लेकिन इस बार मंडियों में गेहूं के अच्छे दाम मिलने से किसानों ने समर्थन केंद्रों पर गेहूं बेचने में ज्यादा रुचि नहीं ली।जिसका असर यह हुआ की खरीदी का लक्ष्य ही पूरा नहीं हो पाया ।
2 लाख 31 हजार परिवारों को मिलता है पीडीएस का राशन….
रायसेन जिले में 2 लाख 31 हजार परिवारों को पीडीएस का राशन मिलता है। अब इन परिवारों को गेहूं की जगह ज्यादा मात्रा में चावल दिया जा रहा है। केंद्र सरकारी की प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) में पहले गेहूं मिलता था।लेकिन इस योजना में अभी सिर्फ 5 किलो चावल दिया जा रहा है।जबकि मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना में पहले चार किलो गेहूं और एक किलो चावल दिया था। लेकिन अब इसमें तीन किलो चावल और दो किलो गेहूं देना प्रारंभ दिया है । मतलब इस योजना में भी गरीब परिवारों को चावल ही ज्यादा थमाया जा रहा है, जिससे गरीब परिवारों के सामने संकट खड़ा हो गया है ।
लक्ष्य अधूरा : 4.50 लाख टन गेहूं की ही हो पाई खरीदी….
रायसेन जिले में समर्थन मूल्य पर 6.50 लाख टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन इस बार सिर्फ 4.50 लाख टन गेहूं की ही खरीदी हो पाई । मतलब लक्ष्य से दो लाख टन कम गेहूं की खरीदी हुई । इसका असर यह हुआ कि जिले के गोदाम खाली रह गए। पिछले साल 6.50 लाख टन गेहूं की खरीदी हुई थी। इस कारण जिला प्रशासन ने भी इस बार इतना ही गेहूं खरीदी केंद्रों पर आने की उम्मीद में व्यवस्थाएं जुटाई थीं।
अब भी जिले के गोदामों में रखा है 10 लाख टन गेहूं….
नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक चतुर्वेदी ने बताया कि जिले में 2020-21 में समर्थन मूल्य पर हुई खरीदी वाला 10,97,697 क्विंटल गेहूं प्रदेश सरकार द्वारा प्राइवेट कंपनियों और व्यापारियों से टेंडर मांगकर बेच दिया है । यह गेहूं करीब 222 करोड़ 91 लाख 81 हजार 576 रुपए मूल्य का था । इसके बाद भी अभी जिले भर के गोदामों में 10 लाख टन गेहूं का भंडारण है ।
गरीब परिवारों की व्यथा: रोज चावल तो नहीं खा सकते, गेहूं भी चाहिए।
शहर के वार्ड 8 स्थित राशन दुकान पर राशन सामग्री लेने आई संध्या रैकवार, कमला देवी, गुलशन बी आफताब जहां और रामकली रैकवार ने बताया कि पहले चार किलो गेहूं और एक किलो चावल प्रति सदस्य मिलता था, लेकिन अब उन्हें दो किलो गेहूं और तीन किलो चावल दिया जा रहा है। पीएमजीकेएवाई योजना में तो गेहूं दिया ही नहीं जा रहा । सिर्फ चावल ही मिल रहा है। रोज-रोज चावल तो नहीं खा सकते है, इसलिए उन्हें चावल बेचकर महंगा गेहूं खरीदकर लाना पड़ रहा है। ऐसा ही कहना वार्ड 5 के हिमांशु तमोली का था, उन्हें भी गेहूं की जगह चावल ही दिया गया है।
गेहूं, चावल का है पर्याप्त स्टॉक
जिले भर में गेहूं और चावल का पर्याप्त स्टॉक है । पीडीएस योजना में जिले में 2 लाख 31 परिवारों को पीडीएस योजना का लाभ मिल रहा है। वर्तमान में प्रति सदस्य दो किलो गेहूं और तीन किलो चावल दिया जा रहा है । इस मान से ही राशन दुकानों को आवंटन उपलब्ध कराया गया है । – पीएम सिंह, जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी रायसेन

Related Articles

Back to top button