मुरवारी सचिव योजनाओं में कर रहे हैं भ्रष्टाचार, जबसे नौकरी मे हैं तबसे ढीमरखेड़ा ब्लॉक में

अंतर्वेद से मुरवारी तो मुरवारी से अंतर्वेद, इनका स्थानांतरण जनपद ढीमरखेड़ा के बाहर होना चाहिए
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान | ढीमरखेड़ा जनपद के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत मुरवारी में सचिव के पद पर कार्यरत बशरूल हक मंसूरी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगते रहे हैं । ग्रामवासियों का कहना है कि जब से वे इस पंचायत में पदस्थ हुए हैं, तब से उन्होंने योजनाओं में भारी अनियमितताएं और वित्तीय गड़बड़ियां की हैं । सचिव बशरूल हक मंसूरी का स्थानांतरण मुरवारी से अंतर्वेद और अंतर्वेद से मुरवारी के बीच हुआ है, लेकिन वे हमेशा इसी जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के दायरे में बने रहे हैं । इससे यह शंका और गहराती है कि कहीं न कहीं अंदरूनी मिलीभगत के कारण ही उन्हें बाहर के किसी जनपद में भेजा नहीं जा रहा। मुरवारी सचिव बशरूल हक मंसूरी पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा ) में फर्जी हाजिरी लगाने का आरोप हैं । प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत दिए जाने वाले आवासों में भी भ्रष्टाचार की बू आती है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत किये गए कार्य में भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं । निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने बताया कि ग्राम सभा की बैठकें सिर्फ कागजों में हुईं । पंचायत को मिलने वाली शासकीय राशि का दुरुपयोग हुआ है । सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं के कार्यों में बजट के अनुसार काम नहीं हुआ ।
*पदस्थापना में पारदर्शिता की कमी*
सचिव बशरूल हक मंसूरी को हमेशा जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के ही किसी ग्राम पंचायत में ही पदस्थ किया गया है । कभी अंतर्वेद तो कभी मुरवारी, यह स्थानांतरण प्रणाली केवल एक दिखावा बनकर रह गई है। उनकी नियुक्ति की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं क्योंकि एक ही क्षेत्र में लगातार वर्षों तक रहना और वहीं से भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है । मुरवारी सचिव का गांवों में जबरदस्त विरोध है। ग्रामवासियों ने जिला कलेक्टर दिलीप कुमार यादव से मांग की है कि मुरवारी सचिव बशरूल हक मंसूरी का स्थानांतरण जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के बाहर किया जाए ।



