आज का पंचांग रविवार, 11 दिसम्बर 2022
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 11 दिसम्बर 2022
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर हेमन्त ऋतु
🌤️ मास – पौष माह
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि : तृतीया 04:14 पी एम तक उसके बाद चतुर्थी
✏️ तिथी स्वामी : तृतीया (तीज) के देवता हैं यक्षराज कुबेर। इस तिथि में कुबेर का पूजन करने से व्यक्ति धनवान बन जाता है। यह बलप्रदायक तिथि हैं।
💫 नक्षत्र : पुनर्वसु – 08:36 पी एम तक पुष्य
🪐 नक्षत्र स्वामी : पुनर्वसु नक्षत्र का अधिष्ठाता देवता अदिति हैं. पुनर्वसु नक्षत्र का अर्थ होता है पुन: धन, मान सम्मान की प्राप्ति होना, प्राचीन समय में पुरुष प्रकृति तारे को ही मिथुन राशि के चिन्ह रुप में मान्यता मिली है.
🔔 योग : ब्रह्म – 05:15 ए एम, दिसम्बर 12 तक इन्द्र
⚡ प्रथम करण : विष्टि – 04:14 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बव – 05:31 ए एम, दिसम्बर 12 तक बालव
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🤖 राहु काल: रविवार को शाम 4.30 से 6.00 बजे तक राहुकाल होता है राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 07:03 एम
🌅 सूर्यास्त – सायं 17:25 पी एम
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:14 ए एम से 06:09 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:42 ए एम से 07:04 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:54 ए एम से 12:35 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:58 पी एम से 02:39 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:15 पी एम से 05:39 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:25 पी एम से 06:47 पी एम
💧 अमृत काल : 05:55 पी एम से 07:42 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:47 पी एम से 12:42 ए एम, दिसम्बर 12
🌸 रवि पुष्य योग : 08:36 पी एम से 07:04 ए एम, दिसम्बर 12
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 08:36 पी एम से 07:04 ए एम, दिसम्बर 12
☄️ पुनर्वसु नक्षत्र – रात 8 बजकर 36 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-गणेश मंदिर में गुड़ से बने लड्डू अर्पित करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : सर्वार्थसिद्धि योग/रविपुष्य योग, अखुरथ संकष्टी चतुर्थी, विश्व बाल कोष दिवस, संत ज्ञानेश्वर समाधि दिवस, अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस, भारत रत्न सम्मानित- रवि शंकर जयन्ती, अखिल भारतीय हस्तशिल्प सप्ताह (08-14 दिसम्बर), हवाई सुरक्षा दिवस (सप्ताह), यूनीसेफ़ दिवस, गणेश संकष्टी चतुर्थी व्रत, चन्द्रोदय 08 : 40
✍🏽 विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी मानी जाती है।
🗼 Vastu tips 🗽
विंड चाइम्स क्या है
फेंगशुई के अनुसार विंड चाइम्स प्रकृति के पांच तत्वों का सूचक होता है और इसकी आवाज इन पांच तत्वों यानी हवा, अग्नि, पृथ्वी, धातु और पानी के बीच सामंजस्य स्थापित करता है। यह हवा की झंकार से निकलने वाली सकारात्मक ऊर्जा को संदर्भित करने के लिए ‘ची’ को दर्शाता है। ‘ची’ यानी पांच तत्वों की आवाज।
विंड चाइम्स कहां लगाएं_
विंड चाइम्स आमतौर पर एक खिड़की के पास या बालकनी में लगाना चाहिए। ताकि, प्राकृतिक हवा के साथ घर में पॉडिटिविटी बनी रहे। आप इसे घर के केंद्र में भी लगा सकते हैं ताकि सभी दिशाओं में झनझनाहट की आवाज फैल सके और पूरे इंटीरियर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सके।
साथ ही, सामने के दरवाजे के दोनों ओर विंड चाइम लगाना भी एक अच्छा विचार है, लेकिन इसे ऊपर या सामने के दरवाजे पर नहीं लगाना चाहिए। विंड चाइम्स वास्तु का कहना है कि इसे दरवाजे, दीवारों या फर्नीचर से टकराने वाली जगहों पर ना लगाएं। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संतुलन बिगड़ सकता है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
सर्दियों में क्यों बढ़ने लगता है वजन? सर्दियों के मौसम में अक्सर लोग बहुत ज्यादा आलसी हो जाते हैं। लोग इतने ज्यादा आलसी हो जाते हैं कि कंबल-रजाई से बाहर निकलने का नाम नहीं लेते। यहां तक कि जिम जाकर अपना वर्कआउट रुटीन फॉलो करने को भी कल पर टाल देते हैं। जिसकी वजह से शारीरिक एक्टिविटी में कमी आ जाती है। फिर क्या ऐसे में बैठे रहने से शरीर में फैट जमा होने लगती है जिसके चलते वजन बढ़ने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है।
अगर आप भी सर्दियों के मौसम में वजन बढ़ने की समस्या से परेशान हैं तो आप बथुआ रायता को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। आज हम आपको स्वादिष्ट बथुआ रायता की एक रेसिपी बताएंगे जिसे आप वजन घटाने के लिए घर पर आजमा सकते हैं।
🍵 आरोग्य संजीवनी 🍶
डायबिटीज के कारण भी आपको पैरों में जलन की समस्या हो सकती है। दरअसल, डायबिटीज में आपका ब्लड शुगर लेवल बढ़ने से न्यूरोपैथी की समस्या होने लगती है। इसके नस डैमेज होने लगती है और ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है जो कि पैरों में जलन का कारण बनता है।
हाइपोथायरायडिज्म के कारण हाइपोथायरायडिज्म में शरीर थायरायड हार्मोन का प्रोडक्शन सही से नहीं कर पाती है। इसकी कमी शरीर में कई प्रोसेस को धीमा कर देता है और ब्लड फ्लो को प्रभावित करता है। दरअसल, इस समस्या में कई बार शरीर में वॉटर रिटेंशन होने लगता है, सूजन आने लगती है जिससे पैरों की नसों पर जोर पड़ता है और पैरों में जलन महसूस होती है।
नसों में सूजन के कारण नसों में सूजन कई कारणों से हो सकता है। ये लिवर, किडनी और मोटापे जैसी गंभीर बीमारी के कारण भी हो सकता है। ऐसे में पैरों पर प्रेशर क्रिएट होता है जिसकी वजह से हम अपने पैरों में जलन महसूस करते हैं। तो, अगर आपके पैरों में लगातार जलन रहती है तो आपको अपने डॉक्टर को दिखाना चाहिए और सही कारणों का पता करके समय से अपना इलाज करवाना चाहिए।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
जीवन में एक पल ऐसा आता है जब व्यक्ति की बुद्धि पर ताला लग जाता है. फिर चाहे वह कितना ही बुद्धिमान और विवेकवान ही क्यों न हो. सोचने समझने की शक्ति जीरो हो जाती है. यह हालात मनुष्य को न चाहते हुए भी गलत रास्ते पर ले जाते हैं और समस्या का समाधान निकलने की बजाय परेशानी और बढ़ जाती है. आचार्य श्री गोपी राम ने बताया है कि व्यक्ति की बुद्धि कब भ्रष्ट हो जाती है और इन हालातों में व्यक्ति को क्या करना चाहिए जिससे वह संकटों से बाहर आ सके. आइए जानते हैं.
न निर्मिता केन न दृष्टपूर्वा न श्रूयते हेममयी कुरङ्गी ।
तथाऽपि तृष्णा रघुनन्दनस्य विनाशकाले विपरीतबुद्धिः ।।
इसलिए कहते हैं कि जब चारों तरफ से जीवन संकट में घिर हो, विनाश के समय मनुष्य की बुद्धि और विवेक उसका साथ छोड़ देते हैं. कहते हैं कि विपरीत हालातों में महान बुद्धिमान व्यक्ति भी कई बार सही-गलत की सोच में फर्क नहीं कर पाता. उसकी समझ पर पर्दा पड़ जाता है और वह नुकसान कर बैठता है.
श्लोक में आचार्य श्री गोपी राम ने श्रीराम का उदाहरण देकर समझाया है कि स्वर्ण का हिरण न कभी होता, न ही इसे किसी ने देखा है लेकिन वनवास के समय सीता के कहने पर श्रीराम हिरण को पकड़ने के लिए उसके पीछे जाते हैं और इधर रावण माता सीता का हरण कर लेता है.
विनाश काले विपरीत बुद्धि, जब बुरा समय आता तो दिमाग काम करना बंद कर देता है. ये आम बात है लेकिन हम कहते हैं कि अगर संकट के समय मन पर काबू कर लिया, कई समस्याएं टल सकती है. अहंकार, लालच, और क्रोध भी व्यक्ति की बुद्धि भ्रष्ट कर देते हैं. ऐसे समय में धैर्य रखें और सही समय का इंतजार करें. सफलता जरूर मिलेगी.
●●●●●★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●●●●●
⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।
तृतीया तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर होता है अर्थात उनकी बुद्धि भ्रमित होती है। इस तिथि का जातक आलसी और मेहनत से जी चुराने वाला होता है। ये दूसरे व्यक्ति से जल्दी घुलते मिलते नहीं हैं बल्कि लोगों के प्रति इनके मन में द्वेष की भावना भी रहती है। इनके जीवन में धन की कमी रहती है, इन्हें धन कमाने के लिए काफी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है।

