धार्मिक

ज़मीन से निकलीं थी चौंसठ योगिनी की प्रतिमाएं चमत्कार देख भक्तों ने बनवाया मंदिर

मान्यता 500 वर्ष पुरानी है चौंसठ योगनियों स्थित मंदिर दर्शनों के लिए दूर दूर से आते है भक्त
ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
दमोह । जिला मुख्यालय से 18 किमी दूर व्यारमा और सदधरू नदियों के संगम तट हटरी गांव में देवी के रूप में चौंसठ योगिनी की प्रतिमाएं विराजमान हैं। बताते हैं कि पुरातन काल में यहां घनघोर जंगल हुआ करते थे जहां के भू भाग में चौंसठ योगनियों की प्रतिमाएं कुछ भूभाग के ऊपर तो कुछ अंदर विराजमान थी। निर्जन स्थान हुआं करता था। जहां कुछ ही लोग पूजन करने पर्व विशेष पर जाया करते थे। लेकिन इस स्थान के देवीय चमत्कारों से अभिभूत होकर धीरे धीरे भक्तों की आस्था बढ़ती गई और मां की ख्याति गांव में लेकर दृश्य जिले सहित आसपास के जिलों में बढ़ती गई। जहां भक्तों को हर मनोकामना पूर्ण होने पर नवरात्रि में परिवार की सुख समृद्धि के लिए मां के दरबार में घट स्थापना करवाने लगे और नवरात्र में भक्तिभाव से मां के दरबार में नौ दिनों तक भक्त मां के चरणों के सेवादार। चौंसठ योगनियों की प्रतिमाएं पांच सौ वर्ष पुरानी होने अनुमान है। लेकिन लिखित इतिहास या कोई प्रमाण नहीं। अन्य चौंसठ योगनियों जैसा किलेनुमा मंदिर नहीं है। लेकिन पुरातन समय की पाषाण प्रतिमाओं जरूर आसपास मिलते हैं जिससे हटरी की चौंसठ योगनियों माता की प्रतिमाओं का नाम सुनकर भक्तों मे मन में यह सवाल जरूर आता है कि यहां देवी रूप में चौंसठ प्रतिमाएं पुरातन काल में विराजित होगी। लेकिन ऐसा कहते हैं कि यहां मात्र चौंसठ योगनियों की प्रतिमाएं राजा महाराजा के जमाने में विराजित रहीं होगी। यह की मान्यता है कि पांच सौ वर्ष प्राचीन देवी स्वरुप की प्रतिमाएं पूर्णतया मूर्ति खंडन काल सुरक्षित है।

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