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Today Panchang आज का पंचांग सोनवार, 24 जून 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 24 जून 2024
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
🌤️ मास – आषाढ़ मास
🌘 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – सोमवार आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष तृतीया तिथि 01:23 AM तक उपरांत चतुर्थी
✏️ तिथि स्वामी : तृतीया तिथि के देवता हैं यक्षराज कुबेर। इस तिथि में कुबेर का पूजन करने से व्यक्ति धनवान बन जाता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तराषाढ़ा 03:54 PM तक उपरांत श्रवण
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। राशि स्वामी गुरु है तो नक्षत्र स्वामी सूर्य है।
⚜️ योग – इन्द्र योग 11:51 AM तक, उसके बाद वैधृति योग
प्रथम करण : वणिज – 02:25 पी एम तक
द्वितीय करण : विष्टि – 01:23 ए एम, जून 25 तक बव
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:31:00 A.M से 09:49:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:13:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:47:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:04 ए एम से 04:45 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:24 ए एम से 05:25 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:56 ए एम से 12:52 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:43 पी एम से 03:39 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:21 पी एम से 07:41 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 07:23 पी एम से 08:23 पी एम
💧 अमृत काल : 09:48 ए एम से 11:20 ए एम 04:44 ए एम, जून 25 से 06:14 ए एम, जून 25
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:04 ए एम, जून 25 से 12:44 ए एम, जून 25
सर्वार्थ सिद्धि योग : 03:54 पी एम से 05:25 ए एम, जून 25
🚓 यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।
🤷🏻 आज का उपाय-किसी विप्र चांदी भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि योग/भद्रा, अंतर्राष्ट्रीय परी दिवस, राष्ट्रीय पैच दिवस, राष्ट्रीय भाई दिवस, बाल जागरूकता माह, पासपोर्ट सेवा दिवस, वीरांगना रानी दुर्गावती बलिदान दिवस, कूटनीति में महिलाओं का अंतर्राष्ट्रीय दिवस, प्रसिद्ध कलाकार अतुल अग्निहोत्री जन्म दिवस, भारतीय अभिनेत्री सुमोना चक्रवर्ती जन्म दिवस, क्रांतिकारी अमर शहीद दामोदर हरी चापेकर जन्म दिवस, ‘ओम जय जगदीश हरे’ आरती के रचयिता पंडित श्रद्धाराम शर्मा पुण्यतिथि
✍🏼 विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी जाती है।
🛕 Vastu tips 🗽
जिस व्यक्ति को उत्तम संतान एवं सुख देने वाले पुत्र की कामना हो, उसे पलाश का पेड़ लगाना चाहिए। जिस व्यक्ति को राहु के दोष दूर करना हो उसे चंदन का वृक्ष लगाना चाहिए। जिस व्यक्ति को शनि से संबंधित बाधा दूर करना हो उसे शमी का वृक्ष लगाना चाहिए। अनार का पौधा घर में लगाने से कर्जे से मुक्ति मिलती है। हल्दी का पौधा लगाने से घर में नकारात्मक उर्जा नहीं रहती।
नीले फूल वाली कृष्णकांता की बेल से आर्थिक समस्याएं खत्म होती हैं। नारियल के पेड़ से मान-सम्मान में खूब वृद्धि होती है। अशोक का वृक्ष लगाने से घर के बच्चों की बुद्धि तेज होती है। तुलसी, आंवला और बहेड़ा का पौधा घर में लगाने से बीमारी नहीं आती। गेंदा लगाने से बृहस्पति मजबूत होता है और वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है।
बांस का पेड़ लगाने से तरक्की होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है। निगेटिव एनर्जी भी दूर होती है। गुड़हल का पौधा लगाने से कानून संबंधी सभी काम पूरे हो जाते हैं। बेलपत्र का पौधा लगाने से पीढ़ी दर पीढ़ी लक्ष्मी जी का वास बना रहता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
कब्ज़ होने का असली कारण क्या है? पेट साफ़ न होना आज एक आम लोगों की समस्या है |इसका मुख्य कारण हमारा गलत खान पान, गलत दिनचर्या है | मैं अपने अनुभव के आधार से कह सकता हूँ की आप निम्न नुस्खे अपनाएं तो कुछ लाभ अवश्य होगा |
ज्यादा तला हुआ भोजन, मैदे की बनी सामग्री का कम उपयोग करें| रेशेदार भोजन को अपने भोजन में शामिल करें जैसे दलिया, छिलके सहित दाल, लोकी की सब्जी, पालक |
चाय का उपयोग कम करें व् लाइट कम पत्ती की व् कम उबली चाय का कम से कम मात्र में उपयोग करें | कभी भी चाय पीकर पेट साफ़ करने की आदत न डालें नहीं तो जीवन भर परेशान रहेंगे |
सुबह उठते ही बासी मुंह कम से कम 1 लीटर गुनगुना पानी अवश्य पियें | इसके 1 घंटे तक चाय आदि न पियें |
अजवायन, सौंफ, जीरा को सामान मात्रा में मिला कर व् उसमें कला नमक मिला कर चूर्ण तैयार करें| इसे एक चम्मच खाने के पश्चात पानी के साथ सेवन करें |
सुबह जल्दी उठकर पैदल करें व् व्यायाम भी करें |
तनाव मुक्त व् सदा खुश रहें | ख़ुशी जैसी कोई खुराक नहीं | इसके लिए राजयोग मैडिटेशन का अभ्यास करें|
🫖 आरोग्य संजीवनी 🍶
अगर इससे भी लाभ नहीं हो रहा है और शरीर में कमजोरी अधिक है तो इन परीक्षित घरेलू दवाओं का सेवन करें
💊 काम चूड़ामणि रस ( स्वर्ण युक्त) 1 गोली
💊 वीर्य स्तंभन बटी 1 गोली
💊 विगोजेम टेबलेट 2 गोली
इन सभी दवाओं को सुबह-शाम खाली पेट या नास्ते और भोजन करने के एक घंटे बाद दिन में दो बार सेवन करें। इन सभी गोलियों को एक साथ अच्छी तरह से चबा-चबाकर खाएं और मिश्री मिलाया हुआ गुनगुना दूध का सेवन करें।
कौंच पाक एक बड़ा चम्मच (10 ग्राम) अच्छी तरह से चबा-चबाकर खाएं और ऊपर से गुनगुना मिश्री मिला दूध पीना चाहिए। इसे भी सुबह-शाम दो बार सेवन करें। कौंच पाक को गर्मी मौसम में कम मात्रा में सेवन करना चाहिए। आप यदि ठण्डे स्थान पर रहते हैं तो इसे सभी ऋतुओं में सेवन कर सकते हैं।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
आज की कहानी: मन का पाप एक व्यक्ति गंगा के किनारे-किनारे जा रहे थे। उन्होंने देखा कि एक जवान उम्र की लड़की है और पचास वर्ष का पुरुष। आपस में हँस रहे हैं। लड़की एक गिलास दे रही है और पुरुष पीने जा रहा है।
उस देखने वाले व्यक्ति के मन में आया कि देखो गंगा के तट पर भी ये पाप की भावना करते हैं। यह स्त्री और वह पुरुष। ये हँस रहे हैं। इनके मन में पाप आ गया। यह शराब का गिलास दे रही है और वे पुरुष पीने जा रहे हैं। यह उसने सोच लिया।
थोड़ी देर में वहाँ एक नाव निकली। नदी में एक भंवर था। उस भंवर में नाव फंस गयी। नाव डगमगायी और उसमें पानी आ गया। वह उलट गयी। उसमें बीसों आदमी थे।
पुरुष ने गिलास को फेंक दिया और तुरंत उस नदी में कूद पड़ा। बड़ी मुश्किल से अपनी जान को जोखिम में डालकर उसने उन आदमियों को बचा लिया। अब देखने वाला सोचने लगा कि भाई, क्या बात है ? अगर वह व्यभिचारी था, शराबी था, कामी था, तो इतना त्यागी कैसे था कि अपनी जान जोखिम में डालकर, प्राणों पर खेलकर उसने इतने लोगों को बचा लिया। यह बात कैसे हुई ? उसे सन्देह हो गया अपने विचार पर।
वह पास आया और पूछने लगा कि आप कौन हैं ?उन्होंने कहा, यह बात तो पीछे करना। अभी हमारी सहायता करो। इन लोगों के पेट में पानी भर गया है। पहले इसे निकालें।
इस प्रकार उसे भी सेवा में संयुक्त कर लिया। वह लड़की भी सेवा करने लगी। तीनों सेवा में जुट गये।
अब कुछ देर बाद जब सब ठीक हो गया तब पूछा, आप कौन हैं ? यह लड़की कौन है ? संदेह मन में था ही।
उन्होंने उत्तर दिया-यह मेरी बेटी है। ससुराल से आज ही आयी है। हम बगल के गाँव में रहते हैं। घूमते-घूमते, बात करते हुए गंगाजी के किनारे आ गये। यह हँस-हँसकर अपने घर की बात सुना रही थी और मुझे बड़ी प्रसन्नता हो रही थी।
इतने में मुझे प्यास लगी। मैंने कहा, जा बेटी, गंगाजल तो ले आ। यह गंगाजल का गिलास ले आयी। मैं पीने जा रहा था कि इतने में नाव आ गयी।
अब उसने सोचा-‘देख, तू कितना बड़ा पापी है। शराब और व्यभिचार तो तेरे मन में था। तेरे मन में, तेरे मस्तिष्क में शराब था, व्यभिचार था। इस पवित्र गंगाजल में तूने शराब की भावना की। पवित्र बाप-बेटी के विशुद्ध व्यवहार में व्यभिचार की भावना की। तू पवित्र कहाँ है। तेरे मन में तो अभी तक कलुष भरा है।
ऐसा बहुत बार होता है। हम लोग अपने मन का पाप, अपने-आप की बुराई दूसरे पर आरोपित कर देते हैं और हम दोषी मान लेते हैं।’
▬▬▬▬▬▬๑ ⁂❋⁂ ๑▬▬▬▬▬▬
⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।
तृतीया तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर होता है अर्थात उनकी बुद्धि भ्रमित होती है। इस तिथि का जातक आलसी और मेहनत से जी चुराने वाला होता है। ये दूसरे व्यक्ति से जल्दी घुलते मिलते नहीं हैं बल्कि लोगों के प्रति इनके मन में द्वेष की भावना भी रहती है। इनके जीवन में धन की कमी रहती है, इन्हें धन कमाने के लिए काफी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है।

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