जीएसटी की व्यापारियों को नई सुविधा : टैक्स क्रेडिट ज्यादा तो निगेटिव वैल्यू मिलेगी, अगले महीने का टैक्स दे सकेंगे

रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन। व्यापारियों को अब इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) रिफंड कराने या फिर एडजस्ट कराने के लिए बार-बार क्लेम नहीं करना पड़ेगा। क्योंकि जीएसटी विभाग ने अब व्यापारियों को निगेटिव वैल्यू की नई सुविधा दी है। इसका नोटिफिकेशन दो दिन पहले ही जारी हुआ है। इसके तहत अगर व्यापारी की टैक्स क्रेडिट उस पर बन रहे टैक्स से अधिक हो तो जो भी शेष बची क्रेडिट होगी, उसकी निगेटिव वैल्यू मिल जाएगी।
वह इस निगेटिव वैल्यू को अगले महीने के टैक्स पेमेंट रिटर्न जीएसटीआर-3बी में एडजेस्ट करा सकेगा। मौजूदा व्यवस्था के तहत व्यापारी को टैक्स देनदारी के बाद बची क्रेडिट एडजस्ट कराने के लिए तीन-चार महीने इंतजार करना होता था। क्योंकि दूसरे राज्यों से कारोबार करने में उसे इंटीग्रेटेड जीएसटी की क्रेडिट मिलती थी।
नए नियम में केवल एक महीने में सारी क्रेडिट का निपटारा हो जाएगा। जीएसटी विशेषज्ञ सरवर अली एडवोकेट का कहना है कि हर साल हजारों कराेड़ रुपए की टैक्स क्रेडिट के क्लेम पेंडिंग रह जाते हैं। नए नियम से यह पेंडेंसी सीमित होगी।
लेकिन, ये मुश्किलें भी बढ़ेंगी…..
नए नियम में व्यापारी पूरे माह या साल के कारोबार की टैक्स क्रेडिट एक ही बार में न तो क्लेम कर सकता है और न ही ज्यादा ली गई टैक्स क्रेडिट रिवर्स कर सकेगा। उसे हर सप्लाई के आधार पर टैक्स क्रेडिट बतानी पड़ेगी।आप इनवाॅइस के आधार पर टैक्स क्रेडिट क्लेम नहीं कर पाएंगे। आपके जीएसटी में टैक्स खाते जीएसटीआर-2बी में जितनी टैक्स क्रेडिट दिखाई गई है आप इतनी ही क्लेम कर सकेंगे। जीएसटीआर-2बी में यह दिखता है कि कौन सी सप्लाई पर तत्काल टैक्स क्रेडिट क्लेम की जा सकती है, किस पर दो से तीन माह बाद टैक्स क्रेडिट बनेगी। साथ ही यह भी बताया जाता है कि किस पर टैक्स क्रेडिट नहीं बनती। अगर व्यापारी टैक्स फ्री वस्तुओं का कारोबार करता है उस पर कोई क्रेडिट नहीं मिलती। अगर वह उधारी पर माल लेता है तो वह इसकी टैक्स क्रेडिट तभी क्लेम कर सकेगा, जब वह पेमेंट करेगा।
गणना के नियम सख्त बनाए….
सरकार ने भले ही टैक्स क्रेडिट को अगले माह ही एडजेस्ट करने की सुविधा दे दी है।लेकिन टैक्स क्रेडिट की गणना के नियमों को सख्त बनाया है। अब व्यापारी को हर इंट्री में बताना होगा कि उसकी टैक्स क्रेडिट कितनी बनी।



