ज्ञान का और क्षमा का दान सबसे बड़ा दान है : स्वामी सदा शिव नित्यानंद गिरी जी महाराज
ब्रह्मचारी जी महाराज बापौली धाम ने भी किया कथा का वाचन
भक्ति भाव से मनाया गया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
पूर्व विधायक देवेंद्र पटेल ने की कथा श्रवण
सिलवानी। तहसील के ग्राम हमीरपुर में झरा परिवार द्वारा आयोजित श्री मद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर हिमालय ऋषिकेश से पधारे हुए स्वामी सदाशिव नित्यानंद गिरी जी महाराज ने भक्तों को कथा श्रवण कराते हुए कहा की सत्संग, दान, विचार, संतोष इन से संसार का राग हटेगा, जीव को कथा श्रवण करना चाहिए, महापुरुषों के वचनों और साहित्य के द्वारा अपना मन परमात्मा से जोड़ना चाहिए, जिस से मानव का मानसिक चिंतन होगा।महापुरुष कभी अप्रत्यक्ष नहीं होते है। सत और सत्य में थोड़ा अंतर है। सत को महापुरुषों ने अविनाशी कहा गया है।
स्वामी नित्यानद गिरी महाराज ने कहा की दान और क्षमा की बड़ी महिमा हैं। किसी भी वस्तु से मोह बंध कर दो इस से बड़ा दान कुछ नहीं है। जगत की वस्तु जगत के लिए छोड़ दो ममता, मोह, अहंकार आदि, आत्मा परमात्मा की वस्तु है। यह परमात्मा को सौंप दो ये दान महादान हैं।
कथा श्रवण करके कथा का सार जीवन में जरूर उतारे, जीव को अपना जीवन धर्म और शास्त्र के अनुसार जीना चाहिए, ये संसार से जीव कुछ न मांगे, मांगना है तो परमात्मा से माँगों भक्ति जिस से जीव आत्मा का कल्याण हो। मनवचन से भगवान नाम कीर्तन करते चलो, भगवान नाम कीर्तन से ही कलयुग के दोषों से जीव बचा रहेगा।
जीव को अपने कर्म का फल जरूर भोगना पड़ता है। चाहे वो बुरा कर्म का फल हो चाहे अच्छे कर्म का फल। इसी कर्मनुसार जीव आत्मा करोड़ों योनि में भटकता रहता हैं। अत सत कर्म करें भगवान भजन करे। संतों की कभी आलोचना नहीं करना चाइए। ग्रस्त जीव को भक्ति को कभी प्रगट नहीं करना चाहिए, प्रदर्शन नहीं करना चाइए भक्ति का, मन ही मन में भगवान का चिंतन करें।
होली को भक्त विजय दिवस के रूप में मनाना चाइए। रामनवमी, शिवरात्रि, तुलसी विवाह ये सब पर्व को बड़ी धूम से मनाना चाइए जिस से बच्चों को संस्कार प्राप्त हो सनातन धर्म की ध्वजा बढ़ेगी।
ब्रह्मचारी जी महाराज बापौली धाम ने भी किया कथा का वाचन। भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया।
आयोजित परिवार ने सभी धर्म प्रेमी बंधुओ से कथा श्रवण करने का आग्रह किया है।
पूर्व विधायक एवं कांग्रेस जिला अध्यक्ष देवेंद्र पटेल ने कथा श्रवण की एवं कथा वाचक स्वामी सदाशिव नित्यांद गिरी जी महाराज के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया।




