गौ-माता सर्वस्व प्रदाता है : पं. रामकिंकर शर्मा
सिलवानी। तहसील के ग्राम बीकलपुर में चल रही सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के षष्ठम सत्र की कथा का वाचन करते हुए कथाव्यास पं. रामकिंकर जी ने कहा कि जहां जिस घर में गौ-पालन, गौ-संवर्धन गौ-संरक्षण हो रहा है वही गौवर्धन है एवं भगवान श्रीकृष्ण ने गौवर्धन की पूजा कराके यही संदेश दिया है कि जो देवता भी नही दे सकते वह गौमाता की सेवा से सहज प्राप्त हो जाता है एवं यह हुआ भी है जब भगवान श्रीराम ने त्रेता में जन्म लिया तब उन्होंने रघुवंश को चुना क्योंकि राजा रघु नंदिनी गाय की सेवा महाराज दिलीप द्वारा करने के पश्चात देवादिदेव महादेव की कृपा से प्राप्त हुए थे। महाराज दिलीप चतुर्थ अवस्था में भी जब नि:संतान थे तब उनको महर्षी बशिष्ठ जी ने कहा कि हे राजन गौ सर्वस्व प्रदान करने वाली है इस नंदिनी गाय को लेकर जाओ एवं इस गौमाता की आराधना,सेवा करो इन्ही की सेवा एवं कृपा से तुमको संतान की प्राप्ति होगी एवं जब महाराज दिलीप नन्दिनी गाय को वन में चरा रहे थे तब सिंह ने उसको अपना आहार बनाना चाहा तब महाराज दिलीप ने गौ रक्षा के लिए स्वयं को सिंह के समक्ष निवेदित कर दिया तब सिंह के रूप में आये महादेव ने प्रशन्न होकर महाराज दिलीप को पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया एवं नंदिनी गाय ने कहा कि इसी पुत्र के नाम से अब आपका वंश जाना जाएगा तब महाराज दिलीप का सूर्यवंश, महाराज रघु के नाम रघुवंश से जाना गया इसलिए भगवान ने सूर्यवंश में भी रघुवंश को जन्म लेने के लिए चुना।
व्यास महाराज द्वारा यह भी कहा गया कि भगवान ने जब द्वापर में जन्म लिया तब भी चंद्रवंश में उस कुल को चुना जिसकी प्रमुख आराध्या गौमाता थी ,जिनका मुख्य कार्य ही गौ-सेवा था इसलिए भगवान ने यदुवंश में जन्म लिया।
भगवान का अवतार केवल गौ,
संत, विप्र एवं धर्म की रक्षा के लिए होता है एवं आज की स्थिति क्या है कि हम गौ-पालन नही कर रहे यह सबसे बड़ा अपराध कर रहे है इससे बचने के लिए प्रत्येक घर में एक गौ का पालन एवं गौ की सेवा अवश्य करें।




