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होलिका दहन की पूजा इस विधि के साथ करें, नोट कर लें पूजा की सामग्री

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🔥 होलिका दहन की पूजा इस विधि के साथ करें, नोट कर लें पूजा की सामग्री की लिस्ट
🔥 होलिका दहन की तारीख- 7 मार्च 2023
⚛️ होलिका दहन शुभ मुहूर्त
होलिका दहन मुहूर्त- शाम 6 बजकर 24 मिनट से 8 बजकर 51 मिनट तक
होलिका दहन के लिए कुल समय- 2 घंटे 27 मिनट
🧫 रंगों का उत्सव होली का पर्व आने में अब बस चंद दिन ही बाकी है। इस साल 8 मार्च को होली मनाई जाएगी। वहीं इससे एक दिन पहले होलिका दहन होगा। यानी 7 मार्च को होलिका दहन किया जाएगी। होलिका को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, होलिका दहन की विधिवत पूजा करने से घर में नकरात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं। साथ ही धन की देवी मां लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है। इतना ही नहीं होलिका दहन की पूजा विधिवत के साथ करने से परिवार के सदस्यों को बीमारियों से मुक्ति मिलती है। चलिए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से होलिका दहन की पूजा में क्या-क्या सामग्री लगती है और इसकी विधि क्या है।
👉🏻 होलिका दहन पर नरसिंह मंत्र-1
नमस्ते नरसिंहाय प्रह्लादाह्लाद दायिने
हिरण्यकशिपोर्वक्षः शिला-टङ्क-नखालये
इतो नृसिंहः परतो नृसिंहो
यतो यतो यामि ततो नृसिंहः
बहिर्नृसिंहो हृदये नृसिंहो
नृसिंहमादिं शरणं प्रपद्ये
नरसिंह मंत्र-2
उग्रं वीरं महा विष्णुम ज्वलन्तम सर्वतो मुखम्
नृसिंहं भीभूतम् भद्रम मृत्युर्मृत्युम् नाम: अहम्
उग्र वीरम महा विष्णुम ज्वालां सर्वतो मुखम्
नृसिंहमं भेशंम् भद्रं मृत्योर्मित्यं नमाम्यहम्
🗣️ होलिका दहन पर महालक्षमी मंत्र का जाप
मस्तेस्तु महामाये श्री पीठे सुर पूजिते!
शंख चक्र गदा हस्ते महालक्ष्मी नमोस्तुते!!
नमस्तेतु गरुदारुढै कोलासुर भयंकरी!
सर्वपाप हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते!!
सर्वज्ञे सर्व वरदे सर्व दुष्ट भयंकरी!
सर्वदुख हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते!!
सिद्धि बुद्धि प्रदे देवी भक्ति मुक्ति प्रदायनी!
मंत्र मुर्ते सदा देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते!!
🍱 होलिका दहन पूजा सामग्री
कच्चा सूती धागा
नारियल
गुलाल पाउडर
रोली, अक्षत, धूप और फूल
गाय के गोबर से बनी माला
बताशा, नया अनाज और मूंग की साबूत दाल
हल्दी का टुकड़ा
एक कटोरी पानी
💥 होलिका दहन पूजा विधि
▪️ होलिका दहन के लिए इक्ट्ठा की गई लकड़ी को कच्चा सूत से तीन या सात बार लपेटें।
▪️ इसके बाद उसपर गंगाजल या शुद्ध पानी, फूल और कुमकुम छिड़कर कर पूजा करें।
▪️ पूजा के लिए माला, रोली, अक्षत, बताशे-गुड़, साबुत हल्दी, गुलाल, नारियल सब का प्रयोग करें।
▪️ असृक्पाभयसंत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै:। अतस्त्वां पूजायिष्यामि भूते भूतिप्रदा भव।।’ का उच्चारण करते हुए होलिका की सात परिक्रमा करें।
▪️ पूजा करते समय होलिका के पास पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए।
🦪 होली की राख से लाभ
किसी ग्रह की पीड़ा होने पर होलिका दहन के समय देशी घी में भिगोकर दो लोंग के जोड़े,एक बताशा और एक पान के पत्ते पर रखकर अर्पित करना चाहिए।अगले दिन होली की राख लाकर अपने शरीर पर तेल की तरह लगाकर एक घंटे बाद हल्के गर्म पानी से स्नान करना चाहिए।ग्रह पीड़ा से मुक्ति मिलेगी।
🗣️ होलिका दहन कथा
नारद पुराण के अनुसार आदिकाल में हिरण्यकश्यप नामक एक राक्षस हुआ था।दैत्यराज खुद को ईश्वर से भी बड़ा समझता था।वह चाहता था कि लोग केवल उसकी पूजा करें,लेकिन उसका खुद का पुत्र प्रहलाद परम विष्णु भक्त था।भक्ति उसे उसकी मां से विरासत के रूप में मिली थी। हिरण्यकश्यप के लिए यह बड़ी चिंता की बात थी कि उसका स्वयं का पुत्र विष्णु भक्त कैसे हो गया और वह कैसे उसे भक्ति मार्ग से हटाए।हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र को भक्ति छोड़ने को कहा परंतु अथक प्रयासों के बाद भी वह सफल नहीं हो सका। कई बार समझाने के बाद भी जब प्रहलाद नहीं माना तो हिरण्यकश्यप ने अपने ही बेटे को जान से मारने का विचार किया।कई कोशिशों के बाद भी वह प्रहलाद को जान से मारने में नाकाम रहा।बार बार की कोशिशों से नाकाम होकर हिरण्यकश्यप आग बबूला हो गया। इसके बाद उसने अपनी बहन होलिका से मदद ली,जिसे भगवान शंकर से ऐसा वरदान मिला था जिसके अनुसार अग्नि उसे जला नहीं सकती थी।तब यह तय हुआ कि प्रहलाद को होलिका के साथ बैठाकर अग्नि में स्वाहा कर दिया जाएगा। होलिका अपने इस वरदान के साथ प्रहलाद को गोद में लेकर बैठ गई लेकिन विष्णु जी के चमत्कार से होलिका जल गई और प्रह्लाद की जान बच गई।इसी के बाद से होली की संध्या को अग्नि जलाकर होलिका दहन का आयोजन किया जाता है।

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