मध्य प्रदेश

प्राथमिक शाला भवन जर्जर, दो साल से सामुदायिक भवन में लग रही कक्षाएं

स्कूल नहीं, आपकी व्यवस्था ही जर्जर है साहब ! सामुदायिक भवन में चल रही कक्षाएं -छात्राये
ब्यूरो चीफ: भगवत सिंह लोधी
बटियागढ । सब पढ़ें, सब बढ़ें। स्कूल चलो, घर-घर दीप जलाओ। यह सभी स्लोगन अब रटे रटाए हो गए हैं। ऐसे स्लोगनो से शिक्षा विभाग शिक्षा की अलख जगाने का दम भरता है. लेकिन बच्चों को जब स्कूल भवन ही नसीब न हो तो भला ये बच्चे आखिर अपनी जिंदगी कैसे संभालेंगे !हर साल करोड़ों रुपये फूंकने के बावजूद सरकारी स्कूल खुद को अस्तित्व में नहीं ला पा रहे हैं। यदि बेसिक शिक्षा विभाग की हालत पर गौर करें तो यहां नि:शुल्क शिक्षा घुटनों के बल चल ही रही है, साथ ही बच्चों के बैठने तक की सुरक्षित व्यवस्था नहीं है। जिले में तमाम ऐसे परिषदीय विद्यालय है जो सालों से जर्जर है। इनमें अधिकांश स्कूलों को जर्जर घोषित किया जा चुका है, लेकिन इनमें कई जर्जर स्कूलों में बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं।ऐसा ही ताजा मामला बटियागढ़ जन शिक्षा के अंतर्गत संकुल केंद्र फुटेरा कलां के प्राथमिक शाला पिपरोधा का सामने आया है जहा पर भवन जर्जर हो चुका है। इस भवन की स्थिति इतनी खराब है कि बच्चों को यहां बैठने की व्यवस्था तक संभव नहीं है। जिसके चलते ग्राम पंचायत द्वारा सामुदयिक भवन में बच्चों के पढ़ने के लिए हाल उपलब्ध करवाया है स्कूल में 49 बच्चे अध्यन रत है।प्राथमिक शाला भवन की स्थिति इतनी अधिक जर्जर है जिसे देख कर नहीं लगता कि कभी इसकी मरम्मत कराई गई हो। वहीं सोचने की बात यह है कि गिरने की कगार पर है स्कूल और विकासखंड स्तर के शिक्षा अधिकारियों, जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सुध तक नहीं है। वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों के द्वारा स्थिति की जानकारी होने के बाद भी अब तक कोई कदम नहीं उठाए गए जो क्षेत्र में शिक्षा की घोर उपेक्षा का नमूना है। कई बार भवन की स्थिति और नए भवन की जरूरत से विभाग के अधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है फिर भी अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। बच्चों को खतरे से बचा कर सामुदायिक भवन में शाला का संचालन किया जा रहा है।एक ओर शासन और प्रशासन के द्वारा शिक्षा के हित में बड़ी बड़ी बाते और वायदे किए जाते है। स्कूल भवन को लेकर जहां शिक्षक और बच्चे परेशान है वहीं अभिभावक प्रशासन की इस उपेक्षा से निराश है। यहां स्कूल भवन का हाल यह है तब आसपास के दूरस्थ ग्रामों में शिक्षा की क्या व्यवस्था होगी और विभाग के आला अफसर उनकी कितनी सुध लेते होंगे इसका अनुमान लगाया जा सकता है।शिक्षा विभाग के अफसरों की आंखे बन्द प्राथमिक विद्यालय पिपरोधा की ही तरह बटियागढ़ क्षेत्र के कई दर्जन ग्रामों में शाला भवनों की स्थिति जर्जर है। किन्तु जिले और विकासखंड स्तर पर पदस्थ अधिकारी सिर्फ कुर्सी तोड़ने पर आमादा है उनकी आंखे बन्द है। समय समय पर यदि अधिकारी भ्रमण करते होते, शिक्षकों और ग्रामीणजन की शिकायते सुनते होते, समय पर भवनों की मरम्मत करवाई जाती तो इस भवन की स्थिति इतनी जर्जर नहीं होती। जबकि शाला भवनों की मरम्मत हेतु प्रतिवर्ष शासन द्वारा राशि भी आवंटित की जाती है। जिला और विकासखंड स्तर पर शिक्षा विभाग का खासा अमला है ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और बीआरसी पदस्थ है जिनके कार्यालयों की गतिविधियों पर शासन मोटी रकम खर्च करता है। पर ये सिर्फ कागजी खानापूर्ति और बैठकों में मस्त है। मैदानी स्थिति देखी जाए तो पूरी तरह निष्क्रियता और शून्यता ही नज़र आती है। शिक्षा विभाग, बेसुध आंखे बंद किए समझ में आता है। जिन पर जिले के वरिष्ठ अधिकारी और शासन जब तक कठोर कार्यवाही नहीं करेगे स्थितियों में सुधार नहीं आने वाला।छात्रा देविका लोधी,ने बताया कि स्कूल का भवन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त व जर्जर हो चुका था तो शिक्षकों के द्वारा स्कूल पंचायत के सामुदायिक भवन में लग रहा है छात्रा भावना लोधी का कहना है की उन्ही स्कूल जो कभी भी गिर सकता है। दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ी हुई हैं। आए दिन कोई न कोई हादसा होने का डर बना रहता था छात्रा अनुश्री लोधी का कहना है बारिश के दिनों में छतों से पानी टपकता है, जिससे बरसात के दिनों में हम लोगो का बैठना भी मुश्किल हो जाता था छात्रा अंकिता लोधी का कहना है स्कूल नहीं, आपकी व्यवस्था ही जर्जर है स्कूल के छत से पूरा मलबा गिर गया था उन्ही जल्द ही स्कूल की मरमंत नही हुई तो स्कूल गिर भी सकता है स्कूल प्रभारी शिक्षक हाकम सिंह का कहना है की स्कूल की बिल्डिंग पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है दो साल से हम लोग पंचायत के सामुदायिक भवन में कक्षाएं संचालित की जा रही है जर्जर हालत की जानकारी वरिष्ठ अधिकारी को लिखत में कई बार दे चुके है बटियागढ़ बीआरसी उमेश पाठक का कहना है की बटियागढ़ क्षेत्र में कई स्कूलों की स्थिति जर्जर है उन स्कूलों के नाम भेज दिया गया है राशि तो भोपाल से आती है

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