तारण जयंती पर सिलवानी में उमड़ा श्रद्धा व भक्ति का जनसैलाब

प्रभात फेरी से महाआरती तक आध्यात्मिक उल्लास में डूबा रहा पूरा नगर
सिलवानी । महान आध्यात्मिक संत श्रीमद् जिन तारण तरण मंडलाचार्य महाराज की 577वीं जयंती के पावन अवसर पर गुरुवार को सिलवानी नगर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिकता से सराबोर दिखाई दिया। तारण तरण जैन समाज द्वारा आयोजित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों ने पूरे नगर को दिव्य आभा से भर दिया। सुबह से देर रात तक णमोकार महामंत्र की पवित्र ध्वनि फिज़ा में गुंजायमान होती रही, जिससे वातावरण में अद्भुत शांति, ऊर्जा और भक्ति का संचार हुआ।
प्रभात फेरी ने रचा आध्यात्मिक माहौल
दिन की शुरुआत प्रभात फेरी से हुई, जिसमें समाजजन धार्मिक गीतों, स्तुतियों और जयघोषों के साथ नगर के मुख्य मार्गों से गुजरते हुए उत्साहपूर्वक शामिल हुए। लोगों ने अपने घरों के बाहर आकर पुष्पवर्षा कर भक्ति यात्रा का स्वागत किया। प्रभात फेरी ने नगर में आध्यात्मिक उत्सव का वातावरण निर्मित कर दिया।
अखंड तारण त्रिवेणी पाठ का गरिमामय समापन
प्रभात फेरी के उपरांत जैन चैत्यालय में चल रहे अखंड तारण त्रिवेणी पाठ का विधि-विधान से समापन किया गया। पूरे परिसर में णमोकार महामंत्र की सतत ध्वनि गुंजायमान होती रही, जिसने वातावरण को अत्यंत पवित्र और शांतिमय बना दिया। इसके बाद आरती, चंदन और प्रसाद वितरण का आयोजन सम्पन्न हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने बड़े भाव से सहभागिता की।
मंगलगान और जयघोषों के बीच चैत्यालय के शिखर पर केसरिया धर्म ध्वजा का आरोहण किया गया। ध्वजा फहराते ही उपस्थित समाजजन उत्साह और भक्ति से भर उठे। यह क्षण जयंती समारोह का सबसे पवित्र और अविस्मरणीय दृश्य बन गया। दोपहर में जैन समाज द्वारा नगर में भव्य चल समारोह निकाला गया। चांदी से सुसज्जित पालकी में तारण स्वामी विरचित जिनवाणी ग्रंथ को विराजित किया गया। श्रद्धालु पालकी को कंधों पर उठाकर पूरे नगर में भक्ति के साथ जयकारा लगाते हुए चले।
मार्ग में विभिन्न स्थानों पर समाजजनों द्वारा पालकी की आरती उतारी गई और पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। शोभायात्रा में भजन–कीर्तन मंडली की मनमोहक प्रस्तुति ने वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया। गाजे-बाजे, डीजे और आकर्षक धार्मिक झांकियों से सजी शोभायात्रा में बड़े-बुजुर्गों से लेकर महिलाएं और युवा तक पारंपरिक परिधान में बड़ी संख्या में शामिल हुए।
पात्र भावना, महाआरती और पालना ने दी जयंती समारोह को पूर्णता
चल समारोह के समापन के पश्चात पात्र भावना का आयोजन किया गया, जिसमें समाजजन ने मिलकर तारण स्वामी के उपदेशों, उनके दर्शन और जयंती के महत्व पर विचार साझा किए। संध्याकाल में चैत्यालय में आयोजित महा आरती और पालना कार्यक्रम ने पूरे आयोजन को चरम पर पहुंचाया। पालना झूले के साथ गूंजते भजन, स्तुतिगान और णमोकार महामंत्र की पावन ध्वनि ने संपूर्ण वातावरण को दिव्यता से भर दिया।


