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बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की सहायता के लिए दिए गए हैं नंबर हेल्पलाइन नंबरों पर मिल रही मदद

लेकिन करना पड़ रहा इंतजार, जिले में फील्ड रिस्पॉन्स अधिकारी मिलते हैं
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन । भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और राज्य शासन के सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग के माध्यम से हेल्पेज इंडिया ने देश में वरिष्ठ नागरिकों के लिए एल्डर हेल्पलाइन नंबर 14567 का संचालन किया जा रहा है। कॉल ऑफिसर के मुताबिक सरकार इस हेल्पलाइन नंबर का उपयोग वरिष्ठजन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पूरे देश में एक साथ यह नंबर काम करता है। जिस स्टेट की सिम होगी वहां के सेंटर से उनकी समस्याएं सुनी जाती हैं। पीड़ित लोगों की समस्याओं को सुना जाता है और उनका समाधान किया जाता है। अगर बातचीत से निदान नहीं होता है तो फिर प्रत्येक जिले में फील्ड रिस्पांस अधिकारी उनसे मिलकर परेशानियों हो हल करते हैं।
सरकार ने मुसीबत में फंसने वाले बच्चों, महिलाओं एवं प्रताड़ना झेलने वाले बुजुर्गों की समस्याओं का समाधान करने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। जिनका लोग उपयोग करके सहायता पा रहे हैं। चौबीस घंटे काम करने वाले इन हेल्पलाइन नंबरों पर प्रतिदिन किए जा रहे हैं। किंतु अन्य नंबर पर काफी देर तक कॉल करने पर भी प्रतीक्षा में रखा जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार चाइल्ड लाइन 1098 परेशानी में फंसे बच्चों के लिए 24 घंटे काम करने वाला हेल्पलाइन नंबर है। कॉल ऑफिसर ने बताया कि प्रतिदिन बच्चों की मदद के लिए सैकड़ों कॉल आ रहे हैं, जिनमें बच्चों के गुम होने, लावारिस मिलने, मानसिक और शारीरिक शोषण, बाल विवाह, बाल मजदूरी करने सहित अन्य शामिल हैं। सूचना मिलते ही चाइल्ड लाइन के सदस्यों को मौके पर भेजकर बच्चों को अपने अधीन लिया जाता है और उनकी मदद की जाती है।
महिलाओं की मदद का नंबर व्यस्त ….
सरकार ने पीड़ित महिलाओं की मदद के लिए इंडिया वुमंस हेल्पलाइन नंबर 1090 संचालित किया है। किंतु इस नंबर पर अपनी समस्याएं हल कराने के लिए महिलाओं को इंतजार करना पड़ रहा है। हेल्पलाइन नंबर पर लगातार फोन करके पर कॉल व्यस्त होने का संदेश सुनाई देता है। ऐसे में पीड़ितों को परेशान होना पड़ता है।
चाइल्ड लाइन के वालेंटियर राकेश शर्मा, शिवनारायण सेन ने बताया कि कोई भी पीड़ित महिला अपनी शिकायत इस नंबर पर निशुल्क दर्ज करवा सकती है। महिला की पहचान गोपनीय रखी जाती है। पीड़िता को किसी भी हालत में पुलिस थाने या किसी आफिस में नहीं बुलाया जाएगा।

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