अपनी बेटी डॉ. रोहिनी आचार्य के साहस व ज़िद के आगे लालू प्रसाद यादव हार गए
रिपोर्टर : तारकेश्वर शर्मा
पटना । खुद एमबीबीएस डिग्रीधारी डॉ. रोहिनी आचार्य के तीन छोटे बच्चे हैं, उनके पति समरेश सिंह सिंगापुर में ही एवरकोर पार्टनर्स नाम की कंपनी में मैनेजिंग डायरेक्टर हैं।
ऐसी परिस्थिति में कोई अपनी किडनी अपने जर्जर हो चुके 75 साल के बूढ़े पिता को दे तो यह साहस बेटियां ही कर सकती हैं।
रोहिणी ने कहा कि “पापा के लिए मैं कुछ भी कर सकती हूं , मैं तो अभी सिर्फ अपने शरीर का मांस ही दे रही हूं।”
अपनी बेटी के साहस और ज़िद के आगे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव हार गए।
दरअसल बेटियों के रहते बेटे की चाहत में बच्चे पैदा करते लोगों के लिए भी यह एक सबक है कि बेटियां ही अधिक विश्वसनीय हैं , बेटे भी होते हैं मगर बेटी को पराई समझ लेना कोरी मुर्खता से अधिक कुछ नहीं।
बधाई रोहिनी आचार्य अपने पिता को दूसरा जन्म देने के लिए , विश्व की सारी बेटियां आप पर गर्व कर रहीं होंगी। रोहिनी आचार्य आप सभी नए पीढ़ी के लिए हमेशा प्रेणास्रोत रहेंगी l



