बुंदेलखंड राज्य आज के परिवेश में प्रसांगिक, बुंदेलखंड की घोषणा शीघ्र हो

रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर । बड़े-बड़े राज्यों पर जनसंख्या के बढ़ते दबाव को देखते हुए ऐसे बड़े राज्यों का विभाजन छोटे राज्यों में होना आज के युग की आवश्यकता ही नही प्रसांगिक भी हैं भारत वर्ष को यदि उन्नति के शिखर पर और विकसित राष्ट्रके रूप में देखना है तो हमें राज्यों के विकास की तरफ झांकना होगा और राज्यों का विकास तभी संभव है जब हम राज्यों को बड़े राज्यों से छोटे राज्यों के रूप में करके आगे बढ़ेंगे बड़े-बड़े राज्यों का विकास राजनीति के चलते तेजी से नहीं हो पा रहा है इसका प्रमाण बड़े-बड़े राज्य , जिन छोटे राज्यों को बड़े राज्यों से अलग कर उन्हें अलग राज्य का दर्जा दिया गया है वह राज्य आज प्रगति के शिखर पर हैं आजादी के आठ दसको बाद भारत की आबादी सर्वोच्च शिखर पर पहुंच गई है आजाद भारत में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दो राज्य भारत में सबसे बड़े राज्य हैं इन दोनों राज्यों के मध्य में एक तीसरे राज्य के अभ्युदय के लिए क्रांतिकारी बिगुल आजादी के समय से ही बज रहा है इस बिगुल की पृष्ठभूमि में बुंदेलखंड राज्य बनाने की मांग जोर पकड़ती जा रही है जो आज के परिवेश में प्रसांगिक है बुंदेलखंड के विकास हेतु इसे राज्य का दर्जा मिलना बहुत ही जरूरी है तभी हम बुंदेलखंड में विकास की गंगा को प्रवाहित कर सकते हैं ऐतिहासिक प्रसंगों से ताल्लुक रखने वाला बुंदेलखंड प्रागैतिहासिक महत्वो से परिपूर्ण रहा है और आज भी है बुंदेलखंड को उत्तराखंड छत्तीसगढ़ की तरह अभिलंब अलग राज्य का दर्जा प्रदान किया जाए जिससे बुंदेलखंड का विकास तेजी से हो सके।



