भगवान भक्तों से दूर नहीं, सच्चे मन से याद करने पर कृपा करते है : पंडित सुरेंद्र कृष्ण शास्त्री
बड़ी धूम धाम से कृष्ण जन्म उत्सव मनाया गया
रिपोर्टर : राजकुमार रघुवंशी
सिलवानी। सिलवानी तहसील के ग्राम कला पठा में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन कथावाचक पंडित सुरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी ने भगवान वामन अवतार, राम कथा व कृष्ण जन्म की कथा सुनाई। इस दौरान भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव की झांकी का भी भक्तों ने दर्शन लाभ लिया। श्री शास्त्री जी ने कहा कि भगवान भक्तों से कभी भी दूर नहीं है। सच्चे मन से याद कर उनकी कृपा पायी जा सकती है। कथा सुनने के दौरान कई बार मन भटकता है। ऐसी परिस्थिति में मन को प्रभु के स्मरण में लगाएं और कथा सुनें। आज के जीवन में बहुत कम ऐसे मौके मिलते हैं जब भगवान की कथा होती है।
ऐसे में इस समय का सदुपयोग करें और भगवान की कथा में मन लगाकर जीवन को धन्य बनाएं। सच्चे मन से सेवाभावी कार्य करते रहें इससे भी प्रभु प्रसन्न होते हैं। भगवान भक्तों से दूर नहीं है। वे अपने भीतर ही है। सच्चे मन से उन्हें याद कर उनकी कृपा पायी जा सकती है। जिन्होंने भी ऐसा किया है उनके पास इसका अनुभव भी है।
श्रीकृष्ण जन्म उत्सव मनाते हुए पंडित सुरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं। भक्ति से ही मुक्ति मिलती है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग व उनके जन्म लेने के गूढ़ रहस्यों को कथा व्यास श्री शास्त्री ने बेहद संजीदगी के साथ सुनाया। कथा प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास ने बताया कि जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए। कथा का संगीतमयी वर्णन सुन श्रद्धालुगण झूमने लगे।



