Today Panchang आज का पंचांग शुक्रवार, 27 दिसम्बर 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 27 दिसम्बर 2024
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
🌤️ मास – पौष मास
🌘 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – शुक्रवार पौष माह के कृष्ण पक्ष द्वादशी तिथि 02:26 AM तक उपरांत त्रयोदशी
✏️ तिथि स्वामी – द्वादशी के देवता हैं विष्णु। इस तिथि को भगवान विष्णु की पूजा करने से मनुष्य सदा विजयी होकर समस्त लोक में पूज्य हो जाता है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र विशाखा 08:28 PM तक उपरांत अनुराधा
🪐 नक्षत्र स्वामी – विशाखा नक्षत्र का स्वामी गुरू है। विशाखा नक्षत्र के देवता इंद्र और अग्नि हैं।
⚜️ योग : धृति योग 10:37 PM तक, उसके बाद शूल योग
⚡ प्रथम करण : कौलव – 01:39 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : तैतिल – 02:26 ए एम, दिसम्बर 28 तक गर
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 10:30 से 12:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:47:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:13:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:23 ए एम से 06:18 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:50 ए एम से 07:12 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:02 पी एम से 12:43 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:06 पी एम से 02:47 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:30 पी एम से 05:57 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 05:32 पी एम से 06:54 पी एम
💧 अमृत काल : 10:49 ए एम से 12:35 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:55 पी एम से 12:50 ए एम, दिसम्बर 28
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 08:28 पी एम से 07:13 ए एम, दिसम्बर 28
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-लक्ष्मी मंदिर में सफेद ऊनी वस्त्र चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : स्थायीजययोग/ परंसर्वार्थसिद्धियोग/ सर्वार्थसिद्धि योग/ ज़ोर मेला जारी (पंजाब)/ विश्व बैंक दिवस/ अभिनेता फ़ारुख़ शेख़ पुण्य तिथि, अभिनेता सलमान ख़ान जन्म दिवस, लांस नायक अल्बर्ट एक्का परमवीर चक्र सम्मानित जयन्ती, राजनेता शंकर दयाल सिंह जन्म दिवस, कृषि मंत्री पंजाबराव देशमुख जन्म दिवस, मिर्जा ग़ालिब जयंती, महामारी की तैयारी का अंतर्राष्ट्रीय दिवस, राजनीतिज्ञ नित्यानंद स्वामी जन्म दिवस
✍🏼 विशेष – द्वादशी तिथि को मसूर की दाल एवं मसूर से निर्मित कोई भी व्यंजन नहीं खाना न ही दान देना चाहिये। यह इस द्वादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण हैं। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से पूजन करना चाहिये। साथ ही भगवान नारायण के नाम एवं स्तोत्रों जैसे विष्णुसहस्रनाम आदि के पाठ एवं जप से धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।
🗽 Vastu tips_ 🗼
बाँसुरी का उपयोग वास्तु शास्त्र और ग्रह दोष निवारण में बहुत ही उपयोगी है। वास्तु में बीम संबंधी दोष, द्वार वेध, वृक्ष वेध आदि के निराकरण में इसका प्रयोग होता है। द्वार वेध में बांसुरी को लाल या पीले रिबन से लपेटकर मुख्य द्वार पर कर थोड़ा तिरछा करके लगाना चाहिए तथा इसका मुंह नीचे की तरफ होना चाहिए।
द्वार वेध के दोष को दूर करने के लिए शंख, सीप, कौड़ी या समुद्री झाग को लाल कपड़े में बांधकर मौली से दरवाजे पर लटकाना चाहिए।
घर के मुख्य द्वार पर सिंदूर से स्वस्तिक का नौ अंगुल लंबा तथा नौ अंगुल चौड़ा बनाने से वास्तुदोष के प्रभाव में कमी आती है।
चांदी का एक तार घर के मुख्य फाटक के नीचे दबाने और पंचमुखी हनुमान जी का फोटो लगाने से भी द्वार वेध दूर होता है।
भवन के किसी भी प्रकार के द्वार वेध और वास्तु दोष को दूर करने के लिए मुख्य द्वार के एक तरफ केले का वृक्ष दूसरी ओर तुलसी का पौधा गमले में लगायें।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
वजन संतुलन के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव:
संतुलित आहार: फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ: फल, सब्जियां, साबुत अनाज जैसे कि ब्राउन राइस, ओट्स, जौ आदि। प्रोटीन: दालें, मछली, चिकन, अंडे, पनीर आदि। स्वस्थ वसा: बादाम, अखरोट, जैतून का तेल आदि। कम चीनी और संतृप्त वसा: जंक फूड, मिठाई, तला हुआ भोजन आदि से बचें। पानी: दिन भर में पर्याप्त पानी पिएं।
नियमित व्यायाम: कार्डियो: दौड़ना, तैराकी, साइकिल चलाना आदि। शक्ति प्रशिक्षण: मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए। योग या ध्यान: तनाव कम करने और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए।
स्वस्थ जीवनशैली: पर्याप्त नींद: रोजाना 7-8 घंटे की नींद लें। तनाव प्रबंधन: योग, ध्यान या अन्य तनाव कम करने वाली गतिविधियों का अभ्यास करें। नियमित स्वास्थ्य जांच: किसी भी स्वास्थ्य समस्या को समय पर पहचानने के लिए।
💊 आरोग्य संजीवनी 🩸
अगर आप देर रात तक जागते हैं तो जुकाम होने की संभावना लगभग 80% तक बढ़ जाती है । क्योंकि आयुर्वेद में ऐसा माना जाता है कि सोते समय हमारे शरीर में क्षतिग्रस्त हो चुकी कोशिकाओं और अंगों की रिपेयरिंग की जाती है परंतु यह प्रक्रिया कम सोने से नहीं हो पाती । प्रतिरक्षा प्रणाली भी काम करना बंद कर देती है नतीजतन साधारण फ्लू वायरस जिसे जुकाम कहते हैं, आपको बीमार बना देती है ।
मानव शरीर रात 2 बजे से सुबह 4 बजे के मध्य में सबसे कमजोर होता है । फिर चाहे आप सो रहे हो या जाग रहे हो । प्रायः ऐसा देखा गया है कि हृदय या अन्य बीमारियों से ग्रस्त लोग इस समय के दौरान ज्यादातर मृत्यु को प्राप्त होते हैं ।
शरीर में लीवर ही एक मात्र ऐसा अंग है जो कट जाने पर दोबारा उग सकता है ।
छींकने पर शरीर की हर प्रक्रिया रुक जाती है, यहां तक कि धड़कन भी ।
मनुष्य की जांघ में फीमर नाम की हड्डी होती है स्टील से ज्यादा स्ट्रांग होती है, ऐसा माना जाता है कि ये हड्डी करीब 1 टन तक का वजन उठा सकती है ।
🌷 गुरु भक्ति योग 🌹
एक दिन वह यूंही घूमते-घूमते आम के एक बाग़ में पहुँच गया. वहाँ रसीले आमों से लदे कई पेड़ थे. रसीले आम देख उसके मुँह में पानी आ गया और आम तोड़ने वह एक पेड़ पर चढ़ गया.
लेकिन जैसे ही वह पेड़ पर चढ़ा तभी उसकी नज़र एक लोमड़ी पर पड़ी.उस लोमड़ी की एक टांग टूटी हुई थी और वह लंगड़ाकर चल रही थी.
लोमड़ी को देख आलसी आदमी सोचने लगा कि ऐसी हालत में भी इस जंगली जानवरों से भरे जंगल में ये लोमड़ी बच कैसे गई? इसका अब तक शिकार कैसे नहीं हुआ?
कुछ ही पल बीते थे कि पूरा जंगल शेर की भयंकर दहाड़ से गूंज उठा जिसे सुनकर सारे जानवर डरकर इधर उधर भागने लगे. लेकिन लोमड़ी अपनी टूटी टांग के साथ भाग नहीं सकती थी. वह वहीं खड़ी रही.।
शेर लोमड़ी के पास आने लगा. आलसी आदमी ने सोचा कि अब शेर लोमड़ी को मारकर खा जायेगा. लेकिन आगे जो हुआ, वह कुछ अजीब था.
शेर लोमड़ी के पास पहुँचकर खड़ा हो गया. उसके मुँह में मांस का एक टुकड़ा था, जिसे उसने लोमड़ी के सामने गिरा दिया. लोमड़ी इत्मिनान से मांस के उस टुकड़े को खाने लगी. थोड़ी देर बाद शेर वहाँ से चला गया.।
यह घटना देख आलसी आदमी सोचने लगा कि भगवान सच में सर्वेसर्वा है. उसने धरती के समस्त प्राणियों के लिए, चाहे वह जानवर हो या इंसान, खाने-पीने का प्रबंध कर रखा है. वह अपने घर लौट आया.।
घर आकर वह 2-3 दिन तक बिस्तर पर लेटकर प्रतीक्षा करने लगा कि जैसे भगवान ने शेर के द्वारा लोमड़ी के लिए भोजन भिजवाया था. वैसे ही उसके लिए भी कोई न कोई खाने-पीने का सामान ले आएगा.।
लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. भूख से उसकी हालात ख़राब होने लगी. आख़िरकार उसे घर से बाहर निकलना ही पड़ा.
घर के बाहर उसे एक पेड़ के नीचे बैठे हुए बाबा दिखाए पड़े. वह उनके पास गया और जंगल का सारा वृतांत सुनाते हुए वह बोला, “बाबा जी! भगवान मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं? उनके पास जानवरों के लिए भोजन का प्रबंध है. लेकिन इंसानों के लिए नहीं.”।
बाबा जी ने उत्तर दिया, “बेटा! ऐसी बात नहीं है. भगवान के पास सारे प्रबंध है. दूसरों की तरह तुम्हारे लिए भी. लेकिन बात यह है कि वे तुम्हें लोमड़ी नहीं शेर बनाना चाहते हैं.”।
याद रखें क्योंकि गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी कहा है कि….
सकल पदारथ एहि जग माहीं। करमहीन नर पावत नाहीं।
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⚜️ आज द्वादशी तिथि के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का पूजन और जप आदि करने से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है। यह द्वादशी तिथि यशोबली अर्थात यश एवं प्रतिष्ठा प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों प्रकार के सिद्धियों को देनेवाली तिथि भी मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
द्वादशी तिथि में जन्म लेनेवाले व्यक्ति का स्वभाव अस्थिर होता है। इनका मन किसी भी विषय में केन्द्रित नहीं हो पाता है। इस व्यक्ति का मन हर पल चंचल बना रहता है। इस तिथि के जातक का शरीर पतला व कमज़ोर होता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इनकी स्थिति अच्छी नहीं होती है। ये यात्रा के शौकीन होते हैं और सैर सपाटे का आनन्द लेते रहते हैं।

