धार्मिक

महालक्ष्मी कब विराजेंगी, जानिए शुभ तिथि और पूजा विधि

आचार्य श्री गोपी राम जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
वर्ष 2022 में श्री महालक्ष्मी व्रत शनिवार, 3 सितंबर से मनाया जाएगा। इस व्रत के तहत 16 दिनों तक देवी महालक्ष्मी घर में विराजेंगी। इस व्रत का समापन 17 ‍ सितंबर 2022 को होगा। महाराष्ट्रीयन परिवारों में मनाया जाने वाला यह खास श्री महालक्ष्मी व्रत कई घरों में 3 दिवसीय मनाया जाता है, जिसे तीन दिनी महालक्ष्मी पर्व के नाम से जाना जाता है। भारत के कई जगहों पर यह पर्व 8 दिन तो कई स्थानों पर 16 दिनों तक मनाया जाता है। इस व्रत में गौरी यानी माता पार्वती और देवी माता लक्ष्मी का पूजनकिया जाता है।
_शास्त्रों में महालक्ष्मी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। व्रत संबंधित मान्यतानुसार लक्ष्मी जी की इन मूर्तियों में कोई भी बदलाव तभी किया जा सकता है, जब घर में कोई शादी हो या किसी बच्चे का जन्म हुआ हो। इन माता की प्रतिमाओं के अंदर गेहूं और चावल भरे जाते हैं, जो इस बात का प्रतीक है कि घर धन-धान्य से भरा-पूरा रहे। यहां पढ़ें महालक्ष्मी व्रत की शुभ तिथियां एवं पूजन की सबसे सरल विधि_*
👸🏻 *_महालक्ष्मी व्रत की शुभ तिथि महालक्ष्मी व्रत तिथि- भाद्रपद शुक्ल अष्टमी_*
*_अष्टमी तिथि का प्रारंभ- 3 सितंबर 2022 को अपराह्न 12.28 से।_*
*_महालक्ष्मी व्रत प्रारंभ- शनिवार, 3 सितंबर 2022 को।_*
*_चंद्रोदय का समय- 12.35 पी एम_*
*_अष्टमी तिथि समाप्त- रविवार, 4 *_सितंबर 2022 को 10.39 ए एम पर।_*
*_महालक्ष्मी व्रत पूर्ण शनिवार, 17 सितंबर 2022 को समापन।_*
🤷🏻‍♀️ *_पूजन विधि :_*
👉🏼         *_श्री महालक्ष्मी व्रत में मां लक्ष्मी का विधि-विधान से पूजन किया जाता है।_*
👉🏼           *_इस व्रत को करने से पहले भादो शुक्ल अष्टमी को स्नान करके दो दूने से सकोरे में ज्वारे (गेहूं) बोये जाते हैं। प्रतिदिन 16 दिनों तक इन्हें पानी से सींचा जाता है।_*
👉🏼          *_ज्वारे बोने के दिन ही कच्चे सूत (धागे) से 16 तार का एक डोरा बनाएं। डोरे की लंबाई इतनी लें कि आसानी से गले में पहन सकें। इस डोरे में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर 16 गठानें लगाएं तथा हल्दी से पीला करके पूजा के स्थान पर रख दें तथा प्रतिदिन 16 दूब और 16 गेहूं चढ़ाकर पूजन करें।_*

👉🏼        *_आश्विन (क्वांर) कृष्ण पक्ष (बिदी) की अष्टमी के दिन उपवास (व्रत) रखें। स्नान के बाद पूर्ण श्रृंगार करें। 18 मुट्ठी गेहूं के आटे से 18 मीठी पूड़ी बनाएं। आटे का एक दीपक बनाकर 16 पु‍ड़ियों के ऊपर रखें तथा दीपक में एक घी-बत्ती रखें, शेष दो पूड़ी महालक्ष्मी जी को चढ़ाने के लिए रखें।_*
👉🏼           *_पूजन करते समय इस दीपक को जलाएं तथा कथा पूरी होने तक दीपक जलते रखना चाहिए। अखंड ज्योति का एक और दीपक अलग से जलाकर रखें।_*
👉🏼          *_पूजन के पश्चात इन्हीं 16 पूड़ी को बियें (सिवैंया) की खीर या मीठे दही से खाते हैं। इन 16 पूड़ी को पति-पत्नी या पुत्र ही खाएं, अन्य किसी को नहीं दें।_*
👉🏼        *_मिट्टी का एक हाथी बनाएं या कुम्हार से बनवा लें जिस पर महालक्ष्मी जी की मूर्ति बैठी हो।_*
👉🏼         *_सायंकाल में जिस स्थान पर पूजन करना हो, उसे गोबर से लीपकर पवित्र करें।_*
👉🏼         *_रंगोली बनाकर बाजोट पर लाल वस्त्र बिछाकर हाथी को रखें।_*
👉🏼         *_तांबे का एक कलश जल से भरकर पटे के सामने रखें।_*
👉🏼          *_एक थाली में पूजन की सामग्री (रोली, गुलाल, अबीर, अक्षत, आंटी (लाल धागा), मेहंदी, हल्दी, टीकी, सुरक्या, दोवड़ा, दोवड़ा, लौंग, इलायची, खारक, बादाम, पान, गोल सुपारी, बिछिया, वस्त्र, फूल, दूब, अगरबत्ती, कपूर, इत्र, मौसम का फल-फूल, पंचामृत, मावे का प्रसाद आदि) रखें।_*
👉🏼        *_केल के पत्तों से झांकी बनाएं। संभव हो सके तो कमल के फूल भी चढ़ाएं। पटे पर 16 तार वाला डोरा एवं ज्वारे रखें।_*
👉🏼          *_अब विधिपूर्वक महालक्ष्मी जी का पूजन करें तथा कथा सुनें एवं आरती करें। इसके बाद डोरे को गले में पहनें अथवा भुजा से बांधें।_*
👉🏼       *_भोजन के पश्चात रात्र‍ि जागरण तथा भजन-कीर्तन करें।_*
👉🏼       *_दूसरे दिन प्रात: हाथी को जलाशय में विसर्जन करके सुहाग-सामग्री ब्राह्मण को दें तथा व्रत का समापन करें।_*
👉🏼       *_इस व्रत में नमक नहीं खाते हैं।_*
      🙏🏼  *_Astologar Gopi Ram_* 🙏🏼
                      *_9812224501_*
             *●★᭄ श्री राधे कृष्णा जी★᭄●*

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