महिलाओं को कानूनी साक्षरता का ज्ञान होना उनके व परिवार के विकास के लिए जरुरी : केएस शाक्य
ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । आज के समय में महिलाओं को कानूनी साक्षरता का ज्ञान होना उनके लिए व उनके परिवार के विकास के लिए आवश्यक है। विधिक जागरूकता से ही महिलाओं का सशक्तिकरण संभव है। इसी उद्देश्य से महिलाओं के लिए यह विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया है। अक्सर देखा गया है कि महिलाएं अपने अधिकारों के लिए कानून के ज्ञान के अभाव में आवाज नहीं उठा पाती है। इसी वजह से वे कई तरह की प्रताड़नाओं का सामना करती है।
नालसा नई दिल्ली तथा अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायसेन के निर्देशानुसार मंगलवार को आयोजित शिविर में तहसील विधिक सेवा समिति अध्यक्ष केएस शाक्य ने उक्त बात कहते हुए महिलाओं से संबंधित कानून एवं उनके अधिकारों के संबंध में जागरूक करते हुए
महिलाओं से संबंधित कानून जैसे घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, मप्र अपराध पीड़ित प्रतिकर योजना, विधिक सहायता एवं विधिक सलाह तथा आगामी 12 नवंबर को आयोजित नेशनल लोक अदालत के संबंध में बताया कि महिलाओं के संरक्षण के लिए भारत सरकार द्वारा विभिन्न प्रकार के कानून बनाए हैं। बहुत सी महिलाएं जो घरेलू हिंसा का शिकार होती है उनके लिए घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 बनाया गया है। साथ ही लैंगिक अपराधों से बाल्को का संरक्षण अधिनियम के बारे में भी जानकारी दी। केएस शाक्य द्वारा महिलाओ से आव्हान किया गया कि शिविर में जो जानकारी उन्हें प्राप्त हुई है उसकी जानकारी अपने घर के अन्य सदस्यों सहित अपनी सहेलियों तक भी पहुंचाए।
आगामी 12 नवंबर को आयोजित लोक अदालत के संबंध में उपस्थित सदस्यो को बताया कि न्यायालय में लंबित प्रकरण एवं
प्रीलिटिगेशन प्रकरणों में आपसी सहमति से राजीनामा द्वारा लोक अदालत में प्रकरण का निराकरण किया जा सकता है, अधिक से अधिक संख्या में लोक अदालत में उपस्थित होकर लाभ उठाएं तथा अन्य लोगों को लोक अदालत की जानकारी दें।
कार्यक्रम में रिसोर्स पर्सन महिला बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक प्रेम बाई पंथी, ने महिलाओं को विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी और महिलाओं को बाल विवाह की आयु व बाल विवाह के नुकसान के बारे में बताते हुए विधिक सहायता के महत्व को समझाया।
रिसोर्स पर्सन के रूप में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सृष्टि पटेल ने महिलाओं को विभिन्न कानूनों के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी देते हुए महिलाओं के हक व अधिकार के संबंध में जागरूक किया ।
रिसोर्स पर्सन मीडिएटर अधिवक्ता
पीडी नेमा ने उपस्थित महिलाओं एवं सदस्यों को मध्यस्थता प्रक्रिया एवं मध्यस्थता से लाभ के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी ।
कार्यक्रम का संचालन बद्री विशाल गुप्ता अपर लोक अभियोजक द्वारा किया गया साथ ही महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक कर शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिवराज कुमार वर्मा, व्यवहार न्यायाधीश वर्ग एक एमए देहलवी अधिवक्ता गण राजेश यादव, हेमराज राठौर, सईद कमर खान, पैनल अधिवक्ता डी पी चौबे, आरके गुप्ता, फारुख सिद्दीकी, इंद्राज सिंह ठाकुर, आरएन रावत, पीएस राजपूत, आरके खरे, राघवेंद्र यादव, विवेक श्रीवास्तव व अन्य अधिवक्तागण, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, सुपरवाइजर व अन्य महिला पक्षकार उपस्थित रही।



