
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 13 अप्रैल 2026
13 अप्रैल 2026 दिन सोमवार को बैशाख मास के कृष्ण पक्ष कि एकादशी तिथि है। आज की एकादशी को वरुथिनी एकादशी व्रत के नाम से जाना जाता है। आज की वरुथिनी एकादशी व्रत स्मार्त और वैष्णव भक्तो के लिए है। आज भक्ति मार्ग के विख्यात और वैष्णव सम्प्रदाय श्री वल्लभाचार्य जी की जन्म जयन्ती भी है। शास्त्र अनुसार एकादशी सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वाधिक पुण्यदायी व्रत होता है। इसे हर व्यक्ति को अवश्य करना चाहिए। आज यायीजययोग भी है। आप सभी सनातनियों को “वरुथिनी एकादशी व्रत के पावन पर्व एवं श्रीवल्लभाचार्य जी के जन्म जयन्ती” की हार्दिक शुभकामनायें।।
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ *दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं । *सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
*सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है। *जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
*सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है। 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी* 🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,
✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल
☸️ काली सम्वत् 5127_
🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
☀️ मास – बैशाख मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – सोमवार बैशाख माह के कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि 01:08 AM तक उपरांत द्वादशी
📝 तिथि स्वामी – एकादशी के देवता हैं विश्वेदेवगणों और विष्णु। इस तिथि को विश्वेदेवों पूजा करने से संतान, धन-धान्य और भूमि आदि की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र धनिष्ठा 04:03 PM तक उपरांत शतभिषा
🪐 नक्षत्र स्वामी – धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी मंगल ग्रह है। तथा इसके देवता अष्टवसु माने जाते हैं।
⚜️ योग – शुभ योग 05:16 PM तक, उसके बाद शुक्ल योग
⚡ प्रथम करण : बव 01:19 PM तक
✨ द्वितीय करण : बालव 01:09 AM तक, बाद कौलव
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 05:49:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:24:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 04:28 ए एम से 05:13 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : प्रातः 04:51 ए एम से 05:58 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : दोपहर 11:56 ए एम से 12:47 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : दोपहर 02:30 पी एम से 03:21 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:44 पी एम से 07:07 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या: शाम 06:46 पी एम से 07:53 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : दोपहर 11:59 पी एम से 12:44 ए एम, अप्रैल 14
🔥 अग्निवास आकाश – 01:08 ए एम, अप्रैल 14 तक
🚓 यात्रा शकुन- सोमवार को मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शिवजी का दुग्धाभिषेक करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – वरुथिनी एकादशी (सर्वे स्मार्त)/ श्रीवल्लभाचार्य जी जन्म जयन्ती/ पञ्चक जारी/ बैसाखी पर्व/ सिख धर्म नव वर्ष/ खालसा पंथ की स्थापना दिवस, जलियांवाला बाग हत्याकांड शहादत दिवस, अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा जन्म दिवस, प्रसिद्ध तबला वादक अहमद जान थिरकवा स्मृति दिवस, विश्व रेडियो दिवस, अंतरराष्ट्रीय जाट दिवस, अभिनेत्रा बलराज साहनी पुण्य तिथि, बिहार के मुख्यमंत्री बी. पी. मंडल स्मृति दिवस, निर्माता व निर्देशक सतीश कौशिको जन्म दिवस, रेल सप्ताह (Rail Week)
✍🏼 *तिथि विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये। यह इस तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।। 🏘️ *_Vastu tips* 🏚️
घर में मकड़ियों, मक्खियों, चूहों और अन्य छोटे कीटों का होना न केवल परेशानी का सबब बनता है, बल्कि यह स्वच्छता के लिहाज से भी चिंताजनक है। बाजार में मिलने वाले रासायनिक कीटनाशक अक्सर सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं, खासकर यदि घर में बच्चे या पालतू जानवर हों। ऐसी स्थिति में, आप अपने रसोई घर में मौजूद दो साधारण सामग्रियों की मदद से एक सुरक्षित और शक्तिशाली स्प्रे तैयार कर सकती हैं।
*इस प्राकृतिक स्प्रे को बनाने के लिए आपको केवल सफेद सिरका और पानी की आवश्यकता है। एक खाली स्प्रे बोतल लें और उसमें बराबर मात्रा में पानी और सिरका भरें। उदाहरण के लिए, यदि आप एक कप पानी ले रही हैं, तो उसमें एक कप ही सिरका मिलाएँ। इन दोनों को अच्छी तरह हिलाकर मिला लें और आपका घरेलू कीटनाशक तैयार है। *सफेद सिरके में एसिटिक एसिड होता है, जिसकी गंध बेहद तीखी होती है। मनुष्य इसे सहन कर सकते हैं, लेकिन छोटे कीटों, चींटियों और चूहों के लिए यह गंध असहनीय होती है। यह मिश्रण न केवल उन्हें दूर भगाता है, बल्कि उनके द्वारा छोड़े गए गंध के निशानों को भी मिटा देता है, जिससे अन्य कीट उसी रास्ते से घर में प्रवेश नहीं कर पाते। चींटियाँ और मकड़ियाँ विशेष रूप से इस अम्लीय गंध के संपर्क में आने से बचती हैं।
*इस मिश्रण का अधिकतम लाभ उठाने के लिए आप इसे घर के प्रवेश द्वारों, खिड़कियों की दरारों, किचन के सिंक के नीचे और कूड़ेदान के आसपास छिड़कें। चूहों को रोकने के लिए, उन जगहों पर इसका अधिक उपयोग करें जहाँ से उनके आने की संभावना हो। यदि आप चाहें, तो इस मिश्रण की शक्ति बढ़ाने के लिए इसमें पिपरमेंट या नीलगिरी के तेल की कुछ बूंदें भी डाल सकते हैं, क्योंकि इनकी तेज खुशबू चूहों और मक्खियों को तुरंत दूर करने में सहायक होती है। ❇️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ डायबिटीज के दर्दियो के लिए गुग्गुल बहुत ही फायदेमंद साबित होता हे क्योकि गुग्गुल में इंसुलिन प्रोटेक्शन को सही करने का काम करता हे। *गुग्गुल ब्लड शुगर को नियंत्रित रखता हे।
*अगर आपको एसिडिटी की सामान्य हे तो आप एक चम्मच गुग्गुल के चूर्ण को कप में पानी के साथ मिलाकर रख लो फिर उस मिश्रण का सेवन करने से एसिडिटी की समस्या ख़त्म हो जाती हे। *सुबह और श्याम एक चम्मच गुग्गुल के चूर्ण को गुनगुने पानी के साथ लेने से सूजन और दर्द में आराम और हड्डिया जोड़ने में मदद मिलती हे।
*गुग्गुल मुँह में रखे या फिर पानी में भिगोये फिर उसे पानी से दिन में चार या पांच बार कुल्ले करने से मुँह के छालों में राहत मिलती हे। 🫗 आरोग्य संजीवनी 🍶
अदरक एक बेहद उपयोगी औषधीय जड़ है, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होती है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं।
*पाचन को बेहतर बनाता है अदरक खाने से गैस, अपच और पेट फूलने की समस्या कम होती है। खाना पचाने में मदद करता है।
*सर्दी-खांसी में राहत अदरक में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो गले की खराश और खांसी में आराम देते हैं। अदरक वाली चाय बहुत फायदेमंद होती है। *इम्यूनिटी बढ़ाता है यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और संक्रमण से बचाता है।
*उल्टी और मिचली में राहत यात्रा (motion sickness) या प्रेग्नेंसी में होने वाली मिचली में अदरक मदद करता है। *दर्द और सूजन कम करता है अदरक में मौजूद गुण शरीर के दर्द, खासकर जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में सहायक हैं।
*दिल के लिए फायदेमंद यह कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है। *वजन घटाने में सहायक अदरक मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है, जिससे फैट बर्न करने में मदद मिलती है।
*ध्यान रखें: ज्यादा मात्रा में सेवन करने से जलन या एसिडिटी हो सकती है 📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
गांव की सीमा जहाँ समाप्त होती थी, वहीं एक प्राचीन और रहस्यमयी कुआँ था। काई से ढकी उसकी दीवारें और उसका अथाह गहरा जल न जाने कितनी सदियों की कहानियाँ समेटे हुए था। इसी कुएँ के तट पर हर भोर एक तपस्वी संत पधारते थे।
*उन संत की ख्याति दूर-दूर तक थी। उनकी तपस्या का ढंग बड़ा ही विस्मयकारी था—वे अपने शरीर को भारी-भरकम लोहे की जंजीरों से जकड़ लेते और उस गहरे कुएँ के भीतर लटक जाते। घंटों बीत जाते, वे हवा में झूलते हुए आँखें मूंदकर बस एक ही नाम रटते— “कृष्ण… कृष्ण…”
*गांव वाले किनारे पर खड़े होकर श्रद्धा से भर जाते। वे सोचते कि इतनी भारी जंजीरों का कष्ट सहकर जो व्यक्ति भगवान को पुकार रहा है, वह निश्चित ही सिद्ध पुरुष होगा। संत भी अक्सर गर्व से कहते, “जिस दिन ये जंजीरें टूटेंगी, समझ लेना उसी दिन गोविंद से मेरा मिलन होगा।” वे जंजीर को अपनी सुरक्षा और अपनी तपस्या का प्रमाणपत्र मानते थे। *एक दिन, गांव का एक सीधा-साधा व्यक्ति, जिसके पास न तो ज्ञान था और न ही कोई सिद्धि, चुपचाप खड़ा यह सब देख रहा था। उसके मन में एक भोली सी जिज्ञासा जागी— “क्या भगवान सिर्फ कष्ट सहने वालों को मिलते हैं? क्या मुझ जैसा साधारण व्यक्ति उन्हें नहीं देख सकता?”
*उसके पास कोई लोहे की जंजीर नहीं थी। उसने पास पड़ी एक पुरानी और कमजोर सी रस्सी उठाई। उसके मन में कोई अहंकार नहीं था, बस एक तड़प थी। उसने उस कच्ची रस्सी को अपने पैरों से बांधा और कुएँ की गहराई में लटक गया। *उसने आँखें बंद कीं और डूबते हुए मन से पुकारा: “हे सांवरे! मुझे नहीं पता तपस्या क्या होती है। मेरे पास न जंजीरें हैं, न शक्ति। बस ये टूटी सी रस्सी है और मेरा अटूट भरोसा। मुझे थाम लो प्रभु!”
*तभी एक विस्मयकारी घटना घटी। उस व्यक्ति का भार पड़ते ही वह कच्ची रस्सी ‘तड़ाक’ से टूट गई। वह व्यक्ति मौत के मुंह में गिरने ही वाला था कि अचानक कुएँ के भीतर एक अलौकिक प्रकाश फैल गया। *इससे पहले कि वह ठंडे पानी को छू पाता, दो कोमल और शक्तिशाली भुजाओं ने उसे बीच हवा में ही थाम लिया। स्वयं भगवान श्रीकृष्ण मंद-मंद मुस्कान लिए उसे अपनी गोद में उठाए हुए थे।
*वह व्यक्ति भावुक होकर प्रभु के चरणों से लिपट गया और सिसकते हुए पूछा— “प्रभु! मैं तो पापी हूँ, साधारण हूँ। वो महात्मा तो वर्षों से लोहे की जंजीरों में लटककर आपको पुकार रहे हैं, आप उनके पास क्यों नहीं गए?” भगवान कृष्ण की मुस्कान और गहरी हो गई। उन्होंने बड़े प्रेम से कहा: *“पुत्र! वह संत मुझे पुकारते तो हैं, लेकिन उन्हें भरोसा मुझ पर नहीं, बल्कि उस मजबूत लोहे की जंजीर पर है। उन्हें लगता है कि जब तक जंजीर है, वे सुरक्षित हैं। उन्होंने जंजीर को अपनी रक्षा का आधार मान लिया है।”
*_”परंतु तुमने… तुमने एक कमजोर रस्सी चुनी। तुम जानते थे कि यह रस्सी तुम्हें नहीं बचा सकती। तुमने अपना पूरा जीवन, अपनी पूरी सुरक्षा मुझ पर छोड़ दी। जहाँ ‘भरोसा’ सौ प्रतिशत होता है, वहाँ मुझे दौड़े चले आना ही पड़ता है।”
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⚜️ एकादशी तिथि के देवता विश्वदेव होते हैं। नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।।
यदि एकादशी तिथि रविवार और मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा एकादशी तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय में किसी भी कार्य की सिद्धि प्राप्ति का योग निर्मित होता है। यदि किसी भी पक्ष में एकादशी सोमवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, जो अशुभ होता है। इसमें शुभ कार्य निषिद्ध बताये गये हैं। एकादशी तिथि नंदा तिथियों की श्रेणी में आती है। वहीं किसी भी पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है।।



