मध्य प्रदेश

मुख्य मार्ग छोड़कर ग्रामीण अंचलों के रास्ते सीधे पहुंच रहे ओवरलोड गि‌ट्टी, रेत के डंपर, अफसरों को भनक तक नहीं

730 रुपए की बचत करने चालक स्वयं और ग्रामीणों की जिंदगी से कर रहे खिलवाड़, सड़कें भी छलनी, लग रहा जाम
चालक को 270 रुपए टोल टैक्स, 460 रुपए डीजल के साथ समय की भी होती है बचत

रिपोर्टर : राजकुमार रघुवंशी
सिलवानी । नर्मदा तट बौरास घाट और अन्य नर्मदा घाटों से सागर जाने वाले रेत के डंपर और आसपास लगी गिट्टियों के डंपर सागर जाने के लिए मुख्य मार्ग छोड़कर ग्रामीण अंचलों का रास्ता अपना रहे हैं। इससे चालक को महज 730 रुपए की बचत होती है। साथ ही प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर पूरी तरह से सुरक्षित रहते हैं, लेकिन चालक इस बचत के चक्कर में स्वयं और ग्रामीणों की जिंदगी को खतरे में डालने से नहीं चूक रहे हैं। क्योंकि इन डंपरों की आवाजाही से ग्रामीण मागों की सड़कें भी अब क्षतिग्रस्त होने लगी है । जरा सी चूक पर डंपर अनियंत्रित होकर पलटेंगे बल्कि चालक, क्लीनर के अलावा आसपास के ग्रामीणों के साथ बड़ी दुर्घटना हो सकती है। वैसे तो बौरास से उदयपुरा, सिलवानी होते हुए स्टेट हाईवे 44 से होकर सागर जाने का मुख्य मार्ग है, लेकिन डंपर चालक सिलवानी न आकर उदयपुरा से मुआर से जैतपुर, हीरापुर, ककरुआ खमेरा से सीधे सागर रोड पर लग जाते हैं। जबकि उदयपुरा से सिलवानी होते हुए सागर जाना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं कर रहे हैं बल्कि ग्रामीण मार्गों से जाकर गांवों में जाम की स्थिति निर्मित कर रहे हैं और अनहोनी को न्यौता दे रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि इन डंपरों को ग्रामीण मागों से रोक लगाना चाहिए ताकि ग्रामीणों की जिंदगी सुकून भरी हो सके।
ऐसे होती है 730 रुपए की बचत
डंपर चालक यदि उदयपुरा से सिलवानी होते हुए सागर जाएंगे तो उन्हें 270 रुपए का टोल टैक्स अदा करना पड़ेगा। वहीं 10 किमी की दूरी अधिक होने पर 460 रुपए का डीजल अतिरिक्त खर्च होगा। क्योंकि एक डंपर का एवरेज प्रति एक लीटर डीजल पर दो किमी का रहता है। अभी 92 रुपए प्रति लीटर डीजल के दाम है और 10 किमी पर 5 लीटर डीजल खर्च होगा इस हिसाब से 5 लीटर डीजल 460 रुपए का आएगा। यानि 460 डीजल और 270 टोल टैक्स कुल 730 रुपए की बचत करने लोगों की जिंदगी से चालक खिलवाड़ कर रहे है और उदयपुरा से मुआर से जैतपुर, हीरापुर, ककरुआ खमेरा से सीधे सागर रोड पहुंच रहे हैं।
8 टन वजन सहने की क्षमता, निकल रहे 50 टन वजनी डंपर
ग्रामीण अंचलों में सड़कों की गुणवत्ता और लंबे समय तक सड़कों को चलाने के लिए शासन ने इनके वजन सहने की क्षमता में इजाफा किया है और अब 8 टन वजन सहने की क्षमता के अनुरूप सड़कें बनाई जा रही है, लेकिन सड़कें अच्छी होने से डंपर चालकों का मन इन मागों से आवागमन करने का होने लगा और अब यहां से 50 टन वजनी डंपरों की आवाजाही हो रही है, जिससे यह सड़कें अब छलनी हो रही है।
क्रेशर संचालक भी बरत रहे लापरवाही
तहसील में चल रही क्रेशर संचालक भी ओवरलोड डंपरों को इन मार्गों से निकाल रहे हैं। चालक और संचालक दोनों की लापरवाही का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा था। ऐसे में यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो ग्रामीणों की नाराजगी का सामना इन क्रेशर संचालक और प्रशासनिक अफसरों व पुलिस को भुगतना पड़ सकता है।
इस संबंध में प्रकाश नायक, एसडीएम सिलवानी का कहना है कि माइनिंग अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा, जो भी होगा उसमें नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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