मध्य प्रदेश

मुनियो का जीवन नदी के बहते पानी के समान होता है : मुनि सुदत्त सागर महाराज

मुनि संघ के नगर आगमन पर गाजे बाजे के साथ जैन समाज ने की भव्य आगवानी
जयकारा लगा कर पारसनाथ जिनालय तक लाया गया

सिलवानी । नगर में मुनि संध के आगमन पर अखण्ड दिगंबर जैन समाज के द्वारा भव्य आगवानी की गई। आचार्य निर्भय सागर महाराज के शिष्य मुनि सुदत्त सागर महाराज व क्षुल्लक चंद्रदत्त सागर महाराज का शनिवार को सुबह के समय नगर आगमन हुआ। सियरमऊ के रास्ते नगर आगमन पर सागर मार्ग स्थित त्रिमूर्ति जिनालय पर बड़ी संख्या में एकत्रित हुए समाजजनो के द्वारा जयकारा लगा कर अगवानी की गई। मुनि संघ सागर जिले के टड़ा नगर से विहार करते हुए सिलवानी आए। मुनि संघ को गाजे बाजे के साथ पारसनाथ जिनालय लाया गया। रास्ते में अनेको स्थानो पर समाजजनो के द्वारा मुनि संध के पाद प्रक्षालन कर आरती उतारी। कई स्थानो पर आकर्षक रंगोली भी सजाई गई थी।
मुनियो का जीवन नदी के बहते पानी के समान होता हैः- मुनि सुदत्त सागर महाराज मुनि संध के पारसनाथ जिनालय में संक्षिप्त प्रवचन भी हुए। यहां पर मुनि सुदत्त सागर महाराज ने कहा कि प्रत्येक श्रावक का दायित्व है कि वह निरंतर धर्म ध्यान करता रहे। धर्म ध्यान करने से मन में सात्विकता के भाव आते है। बल्कि आडंबर का जीवन में स्थान नही बन पाता है। साधु, संत, ऋषि, मुनि आते जाते रहते है। मुनियो का जीवन नदी के बहते पानी के समान होता है। वह कभी भी स्थाई नही रुकते है। महापुरुष हमेशा ही नागरिको को सदमार्ग पर चलने को प्रेरित करते है। आवष्यकता इस बात की है कि व्यक्ति सुने गए सात्विक उपदेशो को आत्म सात कर अपने जीवन को सुचिता पूर्ण पूर्ण बनावे। उन्होने कहा कि जिनालयों में निरंतर पूजन, अभिषेक आदि धार्मिक अनुष्ठान होते रहना चाहिए। किसी भी स्थिति में अनुष्ठान बंद नही होने चाहिए। जिनालयो में भगवान विराजते है। अनुष्ठान करने व सहभागिता करने से परिणामो में बिशुद्वी आती है। मुनिश्री ने समाजजनो को कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने का आषीर्वाद भी दिया ।

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