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Today Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 30 अप्रैल 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501

✦••• जय श्री हरि •••✦

🧾 आज का पंचाग 🧾

गुरुवार 30 अप्रैल 2026

मंगल श्री विष्णु मंत्र :-मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)*गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए। *गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।*गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं । *इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल☸️ काली सम्वत् 5127🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव☣️ आयन – उत्तरायण☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु☀️ मास – बैशाख मास🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष📅 तिथि – गुरुवार बैशाख माह के शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि 09:12 PM तक उपरांत पूर्णिमा🖍️ तिथि स्वामी :- चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी है। प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है । चतुर्दशी को चौदस भी कहते हैं। चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं।💫 नक्षत्र- नक्षत्र चित्रा 02:16 AM तक उपरांत स्वाति🪐 नक्षत्र स्वामी – चित्रा नक्षत्र का स्वामी मंगल ग्रह है। जिसके अधिष्ठाता देव विश्वकर्मा हैं, जिन्हें देवताओं का शिल्पकार माना जाता है।⚜️ योग – वज्र योग 08:54 PM तक, उसके बाद सिद्धि योग⚡ प्रथम करण : गर 08:30 AM तक✨ द्वितीय करण : वणिज 09:13 PM तक, बाद विष्टि🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 09:45:00 से 11:10:00 तक⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।🤖 राहुकाल – दिन – 2:00 से 3:25 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |🌞 सूर्योदयः – प्रातः 05:33:00🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:31:00👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 04:15 ए एम से 04:58 ए एम🌇 प्रातः सन्ध्या : प्रातः 04:37 ए एम से 05:41 ए एम🌟 अभिजित मुहूर्त : दोपहर 11:52 ए एम से 12:45 पी एम✡️ विजय मुहूर्त : दोपहर 02:31 पी एम से 03:24 पी एम🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:54 पी एम से 07:16 पी एम🏙️ सायाह्न सन्ध्या : शाम 06:56 पी एम से 08:00 पी एम💧 अमृत काल : शाम 07:20 पी एम से 09:04 पी एम🗣️ निशिता मुहूर्त : रात्रि 11:57 पी एम से 12:40 ए एम, मई 01❄️ रवि योग : प्रातः 05:41 ए एम से 02:16 ए एम, मई 01🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शमी पूजन करें।🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भगवान नरसिम्हा देव प्रकटोत्सव/ आयुष्मान भारत दिवस/ श्री नरसिम्हा चतुर्दशी/ पूर्णिमा प्रारम्भ रात्रि 09.12/ बुध का मीन राशि में गोचर/ छिन्नमस्ता जयन्ती/ भद्रा/ रवि योग/ आडल योग/ विडाल योग/ प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु माँ आनंदमयी जयन्ती, राजनीतिज्ञ मिनाक्षी लेखी जन्म दिवस, केरल के भूतपूर्व मुख्यमंत्री आर. शंकर जन्म दिवस, बाल श्रम विरोधी दिवस, भारतीय अभिनेता ऋषि कपूर स्मृति दिवस, (साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता) कवि श्रीरंगम श्रीनिवास उर्फ श्री श्री राव जन्म दिवस, पूर्व न्यायाधीश फातिमा बीबी जन्म दिवस, भारतीय क्रिकेटर रोहित शर्मा जन्म दिवस, राष्ट्रीय ईमानदारी दिवस, गजनवी वंश के सुल्तान महमूद पुण्य तिथि, भारतीय सिनेमा के पितामह दादा साहब फाल्के जन्म दिवस, जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर स्मृति दिवस, अंतरराष्ट्रीय इंटरनेशनल जैज़ डे (International Jazz Day), नेशनल ऑनेस्टी डे (National Honesty Day)✍🏼 तिथि विशेष – चतुर्दशी तिथि को शहद त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि को एक क्रूरा तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं चतुर्दशी तिथि को उग्रा तिथि भी माना जाता है। यह चतुर्दशी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्दशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। इस चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिवजी हैं।।🗽 Vastu tips 🛕रसोई में भूलकर भी न करें ये गलतियां*रसोई में कभी भी टूटे फूटे हुए कांच या चटके बर्तनों का इस्तेमाल न करें। ये चीजें दरिद्रता का प्रतीक मानी जाती है और इनका इस्तेमाल करने से घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है।*रसोई में अन्न की देवी अन्नपूर्णा का वास होता है तो यहां जूते चप्पल पहनकर कभी भी प्रवेश न करें। *रसोईघर को कभी भी पूरा अंधेर कर के न छोड़ें। रात के समय भी कोई एक लाइट जलाकर रखें।*वास्तु शास्त्र में आग और पानी को एक दूसरे का शत्रु माना गया है। तो रसोई में सिंक और चूल्हा को कभी भी बिल्कुल आमने-सामने न रखें। *रसोई में कभी भी दवाइयां नहीं रखनी चाहिए। आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, इससे घर के सदस्यों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️जब आप कांच के गिलास में पानी, नमक और सिरका (विनेगर) मिलाकर उसे किसी कमरे में रखते हैं, तो मुख्य रूप से भौतिक और रासायनिक परिवर्तन होते हैं।*सिरका (एसिटिक एसिड) में गंध के अणुओं को बेअसर करने की अद्भुत क्षमता होती है। जब इसे पानी के साथ मिलाकर खुला छोड़ दिया जाता है, तो यह कमरे में मौजूद सीलन, पालतू जानवरों की गंध या रसोई के तीखे मसालों की महक को सोख लेता है। यह कृत्रिम रूम फ्रेशनर का एक सस्ता और रासायनिक मुक्त विकल्प है। *सिरके की तेज और तीखी गंध कई छोटे कीड़ों और मक्खियों को पसंद नहीं होती। इसे कमरे के किसी कोने में रखने से मक्खियाँ और मच्छर दूर रहते हैं। यदि आपके कमरे में छोटे फल-मक्खियों (fruit flies) की समस्या है, तो यह मिश्रण उन्हें आकर्षित कर एक जाल की तरह काम करता है, जिससे वे पानी में गिरकर खत्म हो जाते हैं।*लोक मान्यताओं और आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, नमक को नकारात्मक ऊर्जा सोखने वाला माना जाता है। बहुत से लोग मानते हैं कि यह मिश्रण कमरे के वातावरण को हल्का और सकारात्मक बनाता है। भले ही यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध न हो, लेकिन इस प्रक्रिया को करने से व्यक्ति को मानसिक रूप से शांति और अपने परिवेश के स्वच्छ होने का आभास होता है। 🩸 *आरोग्य संजीवनी*घेरलू नुस्खा: पेट दर्द और अपच के लिए अजवाइन का पानीअगर पेट में दर्द, गैस या अपच की समस्या हो, तो दादी माँ का यह नुस्खा तुरंत राहत देता है।सामग्री:1 छोटा चम्मच अजवाइन* 1 कप पानी*चुटकी भर काला नमक (वैकल्पिक)* बनाने की विधि:*एक बर्तन में 1 कप पानी गर्म करें।*इसमें 1 छोटा चम्मच अजवाइन डालें और 3-4 मिनट तक उबालें।* पानी को गुनगुना होने दें, फिर इसे छान लें।*चाहें तो इसमें चुटकी भर काला नमक मिलाएँ।इसे धीरे-धीरे घूँट-घूँट पियें।*फायदा:*यह नुस्खा पेट की गैस, अपच और हल्के पेट दर्द को ठीक करता है। अजवाइन पाचन को बेहतर बनाती है और पेट को हल्का रखती है। दिन में 1-2 बार ले सकते हैं। *नोट:* अगर पेट दर्द गंभीर हो या बार-बार हो, तो वैद्य या डॉक्टर से सलाह लें। गर्भवती महिलाएँ और छोटे बच्चे इसे बिना सलाह न लें। 📖 गुरु भक्ति योग 📖 “नियमकामहत्व”*एक संत थे। एक दिन वे एक जाट के घर गए। जाट ने उनकी बड़ी सेवा की। संत ने उसे कहा कि रोजाना नाम-जप करने का कुछ नियम ले लो। जाट ने कहा बाबा,हमारे को वक्त नहीं मिलता। संत ने कहा कि अच्छा,रोजाना ठाकुर जी की मूर्ति के दर्शन कर आया करो। जाट ने कहा मैं तो खेत में रहता हूँ और ठाकुर जी की मूर्ति गाँव के मंदिर में है,कैसे करूँ? *संत ने उसे कई साधन बताये कि वह कुछ-न-कुछ नियम ले लें। पर वह यही कहता रहा कि मेरे से यह बनेगा नहीं,मैं खेत में काम करूँ या माला लेकर जप करूँ। इतना समय मेरे पास कहाँ है? बाल-बच्चों का पालन पोषण करना है। आपके जैसे बाबा जी थोड़े ही हूँ कि बैठकर भजन करूँ। संत ने कहा कि अच्छा तू क्या कर सकता है? जाट बोला कि पड़ोस में एक कुम्हार रहता है। उसके साथ मेरी मित्रता है। उसके और मेरे खेत भी पास-पास हैं और घर भी पास-पास है। रोजाना एक बार उसको देख लिया करूँगा। संत ने कहा कि ठीक है, उसको देखे बिना भोजन मत करना। जाट ने स्वीकार कर लिया। जब उसकी पत्नी कहती कि भोजन कर लो। तो वह चट बाड़ पर चढ़कर कुम्हार को देख लेता। और भोजन कर लेता। इस नियम में वह पक्का रहा।*एक दिन जाट को खेत में जल्दी जाना था। इसलिए भोजन जल्दी तैयार कर लिया। उसने बाड़ पर चढ़कर देखा तो कुम्हार दीखा नहीं। पूछने पर पता लगा कि वह तो मिट्टी खोदने बाहर गया है। जाट बोला कि कहाँ मर गया कम से कम देख तो लेता। अब जाट उसको देखने के लिए तेजी से भागा। उधर कुम्हार को मिट्टी खोदते-खोदते एक हाँडी मिल गई। जिसमें तरह-तरह के रत्न,अशर्फियाँ भरी हुई थीं। उसके मन में आया कि कोई देख लेगा तो मुश्किल हो जायेगी। अतः वह देखने के लिए ऊपर चढा तो सामने वह जाट आ गया। कुम्हार को देखते ही जाट वापस भागा तो कुम्हार ने समझा कि उसने वह हाँडी देख ली। और अब वह आफत पैदा करेगा। कुम्हार ने उसे रूकने के लिए आवाज लगाई। जाट बोला कि बस देख लिया,देख लिया। कुम्हार बोला कि अच्छा,देख लिया तो आधा तेरा आधा मेरा,पर किसी से कहना मत। *जाट वापस आया तो उसको धन मिल गया। उसके मन में विचार आया कि संत से अपना मनचाहा नियम लेने में इतनी बात है। अगर सदा उनकी आज्ञा का पालन करूँ तो कितना लाभ है। ऐसा विचार करके वह जाट और उसका मित्र कुम्हार दोनों ही भगवान् के भक्त बन गए।*_तात्पर्य यह है कि हम दृढता से अपना एक उद्देश्य बना ले,नियम ले लें तो वह भी हमारी डुबती किश्ती पार लगा सकता है।———-:::×:::———-⚜️ चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना करवाना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये। आज चतुर्दशी तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है। जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है।।

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