
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 10 मार्च 2026
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
⛈️ मास – चैत्र मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – मंगलवार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष सप्तमी तिथि 01:54 AM तक उपरांत अष्टमी
✏️ तिथि स्वामी – सप्तमी के देवता हैं चित्रभानु। सप्तमी तिथि को चित्रभानु नाम वाले भगवान सूर्यनारायण का पूजन करने से सभी प्रकार से रक्षा होती है। यह मित्रवत, मित्रा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र अनुराधा 07:05 PM तक उपरांत ज्येष्ठा
🪐 नक्षत्र स्वामी – अनुराधा नक्षत्र के स्वामी शनि देव हैं। जो राशि स्वामी मंगल का शत्रु है।
⚜️ योग : हर्षण योग 08:21 AM तक, उसके बाद वज्र योग
⚡ प्रथम करण : विष्टि 12:40 PM तक
✨ द्वितीय करण : बव 01:54 AM तक, बाद बालव
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:23:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:04:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:59 ए एम से 05:48 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:24 ए एम से 06:37 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:08 पी एम से 12:55 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:17 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:24 पी एम से 06:48 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:26 पी एम से 07:39 पी एम
💧 अमृत काल : 07:26 ए एम से 09:13 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:07 ए एम, मार्च 11 से 12:55 ए एम, मार्च 11
❄️ रवि योग : 06:37 ए एम से 07:05 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
💁🏻♀️ आज का उपाय-देवी मन्दिर में सवाकिलो अनार चढ़ाएं।
🌴 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – शीतला सप्तमी/ बासेड़ा/ भद्रा/ विंछुड़ो/ गण्ड मूल/ रवि योग/ आडल योग/ विडाल योग/ पंजाब के भूतपूर्व मुख्यमंत्री दारा सिंह स्मृति दिवस, समाज सुधारक लल्लन प्रसाद व्यास जन्म दिवस, महिला न्यायाधीशों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला जन्म दिवस, दिग्गज नेता माधवराव सिंधिया जन्म दिवस, महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले स्मृति दिवस, CISF स्थापना दिवस, राष्ट्रीय जीडीएम जागरूकता दिवस, अंतर्राष्ट्रीय गौरव दिवस, ऐतिहासिक महिला दिवस, राष्ट्रीय मारियो दिवस
✍🏼 *तिथि विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। 🌷 *_Vastu tips* 🌹
आचार्य श्री गोपी है के अनुसार, मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित करने के लिए पूर्व दिशा सबसे शुभ मानी जाती है। इस दिशा को उगते सूर्य की दिशा माना जाता है, जो नई ऊर्जा और ज्ञान का प्रतीक है। इस दिशा में मूर्ति रखने से घर में सकारात्मक वातावरण बनता है और पढ़ाई या बौद्धिक कार्यों में एकाग्रता बढ़ने की मान्यता है।
उत्तर-पूर्व दिशा पूर्व दिशा के अलावा उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण भी मूर्ति स्थापना के लिए उत्तम माना जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस दिशा में मां सरस्वती की मूर्ति रखने से ज्ञान, समृद्धि और नए अवसरों का मार्ग खुल सकता है। यह दिशा घर में आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
उत्तर दिशा में रखने के लाभ घर की उत्तर दिशा में मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित करने से सुख-समृद्धि और सकारात्मकता बढ़ने की मान्यता है। इससे घर का वातावरण शांत और संतुलित बना रहता है। कई लोग मानते हैं कि इस दिशा में मूर्ति रखने से पढ़ाई और करियर से जुड़े प्रयासों में भी मदद मिल सकती है।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
क्या खाली पेट ले सकते हैं? हाँ, ले सकते हैं, लेकिन कुछ सावधानियों के साथ। खाली पेट नीम का चूर्ण लेने से यह रक्त को शुद्ध (Blood Purification) करने और त्वचा रोगों को ठीक करने में सबसे अधिक प्रभावी होता है।
*खाली पेट लेने के फायदे रक्त शुद्धि (Blood Purifier): यह शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालता है, जिससे चेहरे पर चमक आती है और कील-मुहासे (Acne) कम होते हैं। *शुगर कंट्रोल: डायबिटीज के मरीजों के लिए यह इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाने में मददगार हो सकता है।
*पेट के कीड़े: खाली पेट सेवन करने से पेट के हानिकारक बैक्टीरिया और कीड़े खत्म होते हैं। *इम्युनिटी: यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
*जरूरी सावधानियाँ नीम बहुत शक्तिशाली होता है, इसलिए इसे सावधानी से इस्तेमाल करें: *मात्रा (Dosage): सुबह खाली पेट बहुत कम मात्रा में लें (आधा छोटा चम्मच या लगभग 2-3 ग्राम से ज्यादा नहीं)। इसे गुनगुने पानी के साथ लेना सबसे अच्छा है।
*लगातार सेवन न करें: नीम को कभी भी महीनों तक लगातार नहीं लेना चाहिए। इसे 15-20 दिन लें, फिर एक हफ्ते का ब्रेक दें। लंबे समय तक लगातार लेने से यह किडनी और लिवर पर दबाव डाल सकता है। 🧅 *आरोग्य संजीवनी* 🍓 🔶आयुर्वेदिक मतानुसार गुण दोष🔶 🔷 तीक्ष्ण गंध,, भूख बढ़ाने वाला,, मन के रजोगुण तथा तमोगुण को बढ़ाने वाला,, कब्ज,, बवासीर,, पीलिया मिटाने वाला,, हिस्टीरिया,, नपुंसकता,, मूत्र की रुकावट एवं पथरी नष्ट करता है।। हृदय की दुर्बलता मिटाने वाला,, वातव्याधि,, संधिवात दूर करने वाला,, कम मात्रा में सेवन करने से कफनाशक,, अनिद्रा,, नकसीर,, उदरशूल दूर करने वाला,, मूत्राशयकी पथरी नष्ट करता है।। घाव भरने का गुण भी है।। 🔶🔷घरेलू उपयोग🔶🔷 🔷हैजा में–प्याज 30 ग्राम,, काली मिर्च ७ नग, मिश्री 20 ग्राम मिलाकर महीन पीसकर दो गिलास पानी में मिलाकर पिला दें।। आमाशय में जाते ही प्यास और घबराहट दूर हो जाएगी तथा उल्टी दस्त बंद हो कर रोगी धीरे धीरे स्वस्थ होने लगता है।। एक रत्ती कपूर मुंह में लेकर चूसना चाहिए।। *प्याज का रस एवं समान मात्रा में पुदीने का रस मिलाकर पिलानेसे लाभ होता है।।
*दो बतासों पर अमृतधारा 4-5 बूंद डालकर पिला दें।। 3-2 घंटे बाद इसे दोहराते रहें।। *🔷 स्मरण शक्ति तथा जीवनी शक्ति बढ़ाने हेतु– सफेद प्याज का रस,, अदरक का रस तथा शहद 5-5 ग्राम दो ग्राम गोघृत मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से याददाश्त तेज होती है।। शारीरिक बल,, ओज की वृद्धि होती है।।
*🔷 एक्जिमा इत्यादि चर्म रोग में– प्याज का रस 60 ग्राम,, पिसी मिश्री 10 ग्राम,, पिसा हुआ सफेद जीरा 1 ग्राम मिलाकर सुबह निराहार प्रतिदिन सेवन करने से रक्तविकार दूर होता है,, चर्म रोग मिटते हैं।। 🪔 गुरु भक्ति योग 🕯️
गुरु दीक्षा देते समय गुरु अपने शिष्य के कान में कौन सा मंत्र बोलते हैं?
*कान में मंत्र फुंकवाए हुए लोग, उस मंत्र को किसी के सामने कभी उजागर नहीं करते हैं जो उनके गुरु घंटाल ने उनके कान में दिया है । सभी गुरु घंटालों का मंत्र भी अलग अलग होता है । अतः यह बता पाना मुश्किल है कि कौन से गुरु ने क्या मंत्र दिया है । सही मानो तो वह मंत्र ही नहीं होता है । मंत्र होता तो सब के लिए डंके की चोट पर बताया जाता । विचार कीजिए कि जब परमात्मा ने चारों वेदों के मंत्र मनुष्य मात्र के लिए प्रकाशित किए हैं तो गुरु घंटाल उन्हें छुपाते क्यों हैं ?
कनफुकवा गुरु , मंत्र के नाम पर कान में क्या फूंकते हैं ? नहीं पता । लेकिन एक सच्चे गुरु को अपने शिष्यों को कौन कौन से मंत्र देने चाहिएं , इसको ऋषि के शब्दों में जानिए । जो वेदारम्भ संस्कार के समय गुरु अपने शिष्यों को देता है । वेदों का पठन-पाठन शुरू करने से पहले गुरु उपदेश करता है कि —
सत्यं वद । धर्मं चर । स्वाध्यायान्मा प्रमद: । सत्यान्न प्रमदितव्म् । धर्मान्न प्रमदितव्म् । स्वाध्याय प्रवचनाभ्यां न प्रमदितव्म् । देवपितृकार्याभ्यां न प्रमदितव्म् । मातृदेवो भव।पितृदेवो भव । आचार्य देवो भव । अतिथि देवो भव । यान्यस्माकं सुचरितानि तानि त्वयोपास्यानि ,नो इतराणि । अतः यदि ये कर्मविचिकित्सा वा वृत्ति विचिकित्सा वा स्यात् । ये तत्र ब्राह्मणा: समदर्शिनो युक्ता अयुक्ता अलूक्षा धर्मकामा स्युयर्था ते तत्र वर्त्तेरन्, तथा तत्र वर्तेथा: । एष आदेश एष उपदेश एषा वेदोपनिषत् । एतदनुशासनम् ।एवमुपासितव्यम् । एवं चैतदुपास्यम् ।
*( तैत्तिरीय उपनिषद् १/११ )*
👉🏼 अर्थात् —सत्य बोल । धर्म का आचरण कर । स्वाध्याय में कभी आलस्य मत कर । सत्य बोलने में, धर्म का पालन करने में , स्वाध्याय और प्रवचन करने में , देवों और पितरों की आज्ञा पालन करने में कभी प्रमाद मत कर । माता, पिता, आचार्य और विद्वान अतिथियों की देवताओं के समान सेवा सुश्रुषा कर । जो हमारे अच्छे आचरण ( चाल-चलन ) हैं उन्हीं का तू अनुसरण कर , अन्य का नहीं । जब कभी किसी कर्म अथवा व्यवहार को करने में शंका वा दुविधा हो ,तब समदर्शी , पक्षपात रहित, योगी , अयोगी , आर्द्रचित्त, धर्म की कामना करने वाले धर्मात्मा जन जैसा धर्ममार्ग में शर्तें वैसे तू भी वर्त्ता कर । यही आदेश है । यही उपदेश है । यही वेद और उपनिषद की शिक्षा है । सदा इसी प्रकार वर्त्ता कर ।
*_कान में मंत्र फूंक कर अपने चंगुल में फंसाने वाले नकली गुरुओं को चाहिए कि यदि कान में मंत्र फूंकने से ही तुम्हारी स्वार्थ सिद्धि होती है तो कम से कम अपने शिष्यों को , जो तुम्हारे पास बहुत आशाओं के साथ आते हैं, उन्हें इस प्रकार का अच्छा उपदेश तो दे दिया करो
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⚜️ सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।।



