राजा और घोड़ों का अंत कोई अवतार नहीं, मतदाता ही करेंगे !

दिव्य चिंतन : डॉ शेजवार की कहानी का विश्लेषण
हरीश मिश्र : लेखक- स्वतन्त्र पत्रकार
पुराने समय में घर के बुजुर्ग अपने नाती पोतों को कहानी सुनाते थे। कहानी रोचक और रोमांचक लगे इसके लिए भाषा सरल, आवाज़ के उतार-चढ़ाव , चेहरे के हावभाव से उसे सजीव बनाते। कहानी के अंत में वे बच्चों को अनुभव या सीख दे जाते । कहानी अनुभव, दृष्टिकोण या भविष्य के रुख को समझाने का एक माध्यम होती थी ।
एक कहानी मध्य प्रदेश में राजनीति के दादा जी पूर्व केबिनेट मंत्री डॉ गौरीशंकर शैजवार ने अपने जन्मदिन पर सुनाई, जो एक दो लोग नहीं हजारों बच्चे, जवान और बुजुर्ग सुन रहे थे। जैसे ही कहानी सुनाना शुरू किया…सब तरफ सन्नाटा छा गया। कहानी सुनाते समय उनकी भाषा सरल थी, आवाज़ में उतार-चढ़ाव था, कभी नरम, कभी कड़क, चेहरे के हावभाव देखकर सभी हैरान थे। हावभाव पर उनका पूरा नियंत्रण था। कहानी के अंत में अपने दृष्टिकोण से अपने समर्थकों को भविष्य के रुख को समझाने में राजनीति के दादा जी सफल रहे…
जैसे ही उन्होंने कहा अभी एक साल बाकी है, राजा भी मरेगा और घोड़ा भी । समागम में उपस्थित हजारों समर्थकों ने ताली बजा कर एहसास कराया कि वे समझ गए, कौन जादूगर ! कौन राजा ! और कौन घोड़ा है ! और कब मरेगा !
उत्सव की समाप्ति के बाद तरंगों के माध्यम से सोशल मीडिया पर यह कहानी वायरल हो गई। कहानी के अर्थ ने राजनीति के क्षत्रपों की नींद उड़ा दी।
राजनेता, पत्रकार अपने- अपने अर्थ निकालने लगे। कहानी में राजा और घोड़े दोनों को चुनौती है , और समर्थकों को संदेश है। विधानसभा चुनाव में एक साल बाकी है। एक साल का समय बहुत होता है।
ऐसा माना जाता है कि भाजपा मूल्यों की राजनीति करती है और ये कटु सत्य है ! पहले नैतिक मूल्य आधारित राजनीति करती थी और अब बाजार भाव से दलालों के माध्यम से मूल्य चुकाकर राजनीति करती है। किसका कितना मूल्य है, मिलता सभी को है ।
भाजपा ने 2021 में मूल्य चुकाकर अपने मूल्यवान कार्यकर्ताओं के भविष्य से खिलवाड़ किया। एक राजा के निजी हितों पर आंच आई तो उस राजा ने अपने अस्तबल के घोड़ों को हरा चारा खिलाकर संवैधानिक सरकार को सड़क पर ला कर लोकतंत्र को दिगंबर दिया। ऐसे राजा और घोड़ों को लोकतंत्र में मरना ही होगा जो अपने हित के लिए लोकतंत्र में निर्वाचित सरकार को दिगंबर करते हैं। इस कहानी का अर्थ है ऐसे राजा और घोड़ों का अंत कोई अवतार नहीं, मतदाता ही करेंगे।




