मध्य प्रदेश

राज्य सूचना आयोग ने नगर परिषद तेंदूखेड़ा को लगाई फ़टकार, 15 दिवस में जानकारी करे मुहैया

(धारा 7 (1) में पाया दोषी अन्यथा की स्थिति में धारा 20 (1) के तहत मामले को लिया संज्ञान में)
रिपोर्टर : भगवत सिंह लोधी
तेंदूखेड़ा
।-भारत सरकार द्वारा वर्ष 2005 में कार्यो में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से लोक सूचना अधिनियम को बनाया और उसे कुछ जगहों को छोड़ कर सम्पूर्ण भारत मे लागू किया गया है।कानून जब अमल में आया तो भृष्टाचार में कमी देखी गयी और पारदर्षिता भी। मगर कुछ लोग अभी भी इस कानून को हंसी में टॉल देते हैं। ओर वे जानकारी देने में आना कानी करते हैं और कानून की धाराओं में उलझ जाते हैं और दण्डित भी हो जाते हैं।नगर तेंदूखेड़ा के वार्ड 12 के निवासी लक्ष्मण रैकवार ने दिनाक 23 मार्च 22 को नगर परिषद तेंदूखेड़ा में आरटीआई के तहत विगत 2 वर्ष कोविड काल में खर्च की गई राशि की एवम लोगो को जो सरकारी मदद दी है उसकी जानकारी के लिये आवेदन किया था। जानकारी ना मिलने की स्थिति में आवेदक ने दिनाक 4 मई 22 को नगरीय प्रशासन, सँयुक्त संचालक सागर में अपील प्रस्तुत की ओर सयुक्त संचालक ने 23 मई 22 को अपील सुनवाई में आवेदक को जानकारी नि:शुल्क देने के लिये नगर परिषद तेंदूखेड़ा को आदेशित किया मगर आदत्तन नगर परिषद तेंदूखेड़ा ने जानकारी नही दी और आवेदक द्वारा द्बितीय अपील राज्य सूचना आयोग को कर दी जिसकी सुनवाई राज्य सूचना आयोग में प्रकरण क्रमांक ए 4744/2022 दिनाक 11 नम्बवर 22 को सुनवाई हुई जिसमें सुनील कांत पांडे की ओर से उनके प्रतिनिधि प्रह्लाद ठाकुर गए हुए थे जहाँ पर प्रकरण को देखा और सुना गया जिसमें आयोग ने नगर परिषद को धारा 7(1) का दोषी पाया इसमे 30 दिवस की समयावधि निशिचित रहती है प्रकरणों को जानबूझ कर लम्बिन्त या कोई जवाव ना देना अधिकतम शास्ति के दायरे में आता है। माननीय आयोग ने नगर परिषद को 15 दिवस में जानकारी आवेदक को नि:शुल्क देने का कहा है नही तो धारा 20(1) के तहत क्यो ना अधिकतम शास्ति प्रावधान संज्ञान में है। नगर परिषद तेंदूखेड़ा एक मगरूर संस्था है नगर परिषद तेंदूखेड़ा द्वारा आज दिनाक तक लोगो ने कई आवेदन किये होंगे मगर उन्होंने शायद ही कभी किसी आवेदक को जानकारी नियमानुसार दी गयी हो।
नगर परिषद के सुनील कांत पांडे का कहना है कि हमने प्रह्लाद ठाकुर से कह दिया था फिर में मामले को दिखवाता हूं।

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