वास्तविक ज्ञान बाहर से नहीं जीव के अंदर से प्रगट होता हैः शांतानंद महाराज
सिलवानी । ज्ञान गुण विशेष गुण है यह सारभूत है। ज्ञान के द्वारा ही सम्यग दर्शन की शुद्धि होती है। ज्ञान सहित ही तप होता है, ज्ञान ही ज्ञानी ही आंख होता है जिससे वह मोक्ष मार्ग पर चलता है। यह उद्गार बाल ब्रह्मचारी शांतानंद महाराज ने तारण तरण जैन चैत्यालय में सोमवार को समाजजनों के बीच व्यक्त किए। यहां पर तीन दिवसीय तारण जयंती महोत्सव के प्रथम दिवस जैन चैत्यालय में तारण त्रिवेणी के अखंड पाठ का अस्ताप किया गया। उन्होंने बताया कि सबकी आत्मा में ज्ञान पाया जाता है लेकिन धन्य है वो जिनके ज्ञान में आत्मा है। वास्तविक ज्ञान बाहर से प्रगट नहीं होता है, वह जीव में अंदर से प्रगट होता है। शांतानंद महाराज ने बताया कि ज्ञान गुण है यह स्वयं में है। ज्ञान कभी भी नुकसान का कारण नहीं बनता, चाहे लौकिक हो या परलौकिक। इसके अतिरिक्त उन्होंने महान अध्यात्मिक संत श्रीमद् जिन तारण तरण स्वामी के व्यकित्व व कृतित्व पर भी प्रकाश डाला। बाल ब्रह्मचारी शांतानंद महाराज के व्याख्यान के बाद श्रीतारण तरण जैन चैत्यालय के शिखर पर प्रभावना के साथ केसारिया ध्वज फहराया गया। यहां पर बड़ी संख्या में मौजूद समाजजनों द्वारा ध्वजगान का गायन किया गया। ध्वजारोहण के बाद जिनवाणी वंदना व आरती का कार्यक्रम संपन्न किया गया।



