भगवान श्रीराम के आदर्शों से सभी को शिक्षा लेनी चाहिएः पं. रामकृपालु
श्रीरामचरित मानस सम्मेलन के तीसरे दिन बड़ी संख्या में कथा श्रवण करने पहुंचे श्रद्धालु
सिलवानी । वर्तमान समय में पाश्चात्य संस्कृति अपने पैर पसार रही है। भारतीय संस्कृति का हास हो रहा, परिवार समाज में मर्यादा, संस्कार भक्ति कम होती जा रही है। इसका प्रमुख कारण युवाओं का धर्म प्रभावना से दूर होना है। अभिभावक ‘भी कम होती मर्यादा व संस्कृति के लिए जिम्मेदार है। प्रत्येक अभिभावक को चाहिए वह अपने बच्चों में धर्म प्रभावना का बीजारोपण कर संस्कारित करें। ताकि बच्चे धर्म के अनुसार आचरण कर जीवन को धन्य बना सकें।
यह उद्गार वेदाचार्य पंडित रामकृपालु उपाध्याय ने मंगल भवन में श्रीरामचरित मानस सम्मेलन के तृतीय दिवस आयोजन में व्यक्त किए। पांच दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन श्रीरामचरित मानस सम्मेलन समिति द्वारा कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदशों से सभी को शिक्षा लेनी चाहिए। समाज का प्रत्येक बच्चा संस्कारित हो इसके लिए प्रत्येक हिंदु परिवार में रामायण का पाठ प्रतिदिन होना चाहिए। इस पाठ में परिवार के सभी सदस्य शामिल हो। रामायण पाठ होने से सदस्यो में सकारात्मकता का भाव आता है। इससे बच्चे भी भगवान श्रीराम की मर्यादा से परिचित होते हैं। सनातन क्या है, धर्म क्या है इसका बोध होता है। युवा ही देश की विकृत होती संस्कृति को बचा सकते हैं। कथा व्यास ने कहा कि परमात्मा श्रीराम प्रत्येक जीव को भव सागर से पार लगाने में समर्थ है। जीव कितना ही भटक ले, लेकिन जीवन के अंत समय में उसे श्रीराम की शरण में ही जाना पड़ता है। भगवान के पास प्रत्येक व्यक्ति के कर्मों का लेखा-जोखा है, उसी हिसाब से मानव को फल मिलता है। व्यक्ति अच्छे कर्म करने के साथ ही विचार भी सकारात्मक रखे बल्कि एक दूसरे के प्रति सम्मान की भावना भी रखे। इसके अतिरिक्त उन्होंने भगवान श्रीराम के व्यकित्व व कृतित्व पर भी प्रकाश डालकर श्रद्धालुओं से श्रीराम के पद चिन्हों पर चलकर जीवन को सार्थक करने का आग्रह किया।



