विश्व विकलांग दिवस का किया बहिष्कार दमोह के दिव्यांगों ने मनाया काला दिवस
भ्रष्ट अधिकारियों की उदासीनता के कारण दिव्यांग अनेक योजनाओं से वंचित
रिपोर्टर : भगवत सिंह लोधी
दमोह । विश्व विकलांग दिवस के अवसर पर पूरे देश में 3 दिसंबर को विश्व विकलांग दिवस के रूप में मनाया जाता है जिसमें शासन की योजनाओं का प्रचार प्रसार कर दिव्यांगों को लाभान्वित कराए जाने का प्रावधान है एवं साथ ही जिले के दिव्यांगों को एक छत के नीचे उनकी कला पारंगता निपुणता क्षमता को दिखाने का अवसर दिया जाता है जिससे कि भविष्य में वह अपनी कला को और निखार सकें एवं आत्मनिर्भर बन सकें तथा साथ ही विजेता पक्ष को पुरस्कार वितरण कर उत्साहवर्धन किया जाता है सामाजिक न्याय विभाग के द्वारा इस कार्यक्रम को प्रत्येक वर्ष किया जाता है जिसमें विभिन्न प्रकार की सामर्थ खेल कूद संगीत रंगोली चित्रकला शतरंज खो-खो कबड्डी साइकिल रेस आदि कार्यक्रमों का आयोजन कर दिव्यांगों को पुरस्कृत किया जाता है । परंतु सामाजिक न्याय विभाग में पदस्थ विकास श्रीवास्तव बाबू की एवं सामाजिक न्याय विभाग उप संचालक अधिकारी एवं उच्च अधिकारियों की उदासीनता के चलते दमोह में संचालित दिव्यांग संगठनों के पदाधिकारियों को सम्मिलित नहीं किया गया ना ही किसी प्रकार की सूचना दी गई एवं उन संस्थाओं के बच्चों को भी कार्यक्रम में सम्मलित नहीं किया गया जिससे उन संस्थाओं के बच्चे निराश हैं, बिकलांग उत्थान समिति जिला अध्यक्ष जागेश्वर सिंह लोधी ने बताया कि जहां एक और देश के प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदी जी के द्वारा 1995 के अधिनियम में संशोधन करते हुए 2016 में अनेक दिव्यांग हितैषी योजनाओं को जोड़ा गया एवं समान अवसर समान अधिकार अधिनियम पारित किया गया एवं उनका नाम दिव्यांग दिया गया अर्थात दिव्य अंश, साथ ही दिव्यांगों के अंदर भी अपार शक्तियां विद्यमान हैं पूर्व में भी भारत में कई दिव्य शक्तियों का जन्म हुआ जिनमें महर्षि अष्टावक्र जिन्होंने राजा जनक की राजसभा में सभी को सहस्त्र में पराजित किया, महाकवि तुलसीदास जी, सूरदास जी की गिनती बड़े-बड़े साहित्यकारों में होती हैं,। रविंद्र जैन जिन्होंने रामायण जैसी विश्व प्रसिद्ध धार्मिक ग्रंथ को संगीत एवं भजन में व्यक्त किया ऐसे अनेक नाम हैं जिनसे सिद्ध होता है कि दिव्यांग असक्षम नहीं है परंतु वर्तमान समाज की संकीर्ण सोच एवं प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता के चलते दिव्यांगों का शोषण किया जा रहा है सरकार की जिम्मेदारी है कि दिव्यांगों के कानून एवं योजनाओं का सही क्रियान्वयन कर समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाये, कनिष्ठा विकलांग उत्थान समिति एवं कल्याण समिति जिलाध्यक्ष हेमेंद्र रजक ने बताया कि पहले दिव्यांगों को शासकीय योजनाओं से वंचित किया जाता रहा है और अब कार्यक्रमों में भी नहीं सम्मलित किया जा रहा परंतु 3 दिसंबर विश्व बिकलांग दिवस पर सभी संस्थाओं को सम्मलित किया जाता था परन्तु अधिकारियों की उदासीनता के चलते इस बार नहीं बुलाया गया आज दिव्यांग अनेक योजनाओं से वंचित हैं जिनमें पेंशन निशक्त विवाह प्रोत्साहन राशि, आवास, मोटरसाइकिल सुधार एवं बैशाखी ट्राय साइकिल, कान मशीन सालों से आवेदन लंबित पड़े हुए हैं, आज दिनांक तक कोई उचित कार्यवाही नहीं की जा सकी जिससे कि अधिकारियों की मानसिकता दिव्यांगों के प्रति लगाई जा सकती है।



