धार्मिकमध्य प्रदेश

वैदिक एवं सनातन और हिंदू नाम अलग होते हुए भी इनका अर्थ एक ही है : वेदाचार्य पंडित राम कृपालु शर्मा

पूर्व विधायक देवेद्र पटेल पहुचें समापन कार्यक्रम में शाल श्रीफल भेंट कर लिया संतो से आशीर्वाद
सिलवानी । नगर के रघुवंशी गार्डन मंगल भवन में पंच दिवसीय श्री रामचरित मानस सम्मेलन के समापन अवसर पर अध्यक्षता करते हुए वेदाचार्य पंडित रामकृपालु शर्मा ने कहा कि हमारे धर्म के नाम को प्रायः वैदिक एवं सनातन और हिंदू नाम से संबोधित करते हैं। लेकिन तीनों का अर्थ एक ही संदर्भ में मान्य किया जाता है हमारी परंपरा में वेदत्रयी महत्वपूर्ण है जिसमें ऋवेद ज्ञान क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है। यजुर्वेद में कर्मकांड का का वर्णन किया गया है एवं सामवेद में उपासना पद्धति को विस्तार से समझाया गया है एवं जब बात अथर्ववेद की आती है तो तीनों का परिशिष्ट भाग इसमें समाहित है इसमें तीनों वेदों का निचोड़ समाहित है।
पंडित श्री कृपालु ने धर्म की विस्तृत व्याख्या करते हुए कहा कि धर्म हमें जीवन जीना सिखाता है धर्म सर्वप्रथम है इससे हमारे मूल्य संस्कृति और परंपराओं का संवहन होता है। संसार में केवल सनातन वैदिक और हिंदू को ही धर्म की परिभाषा में संयुक्त किया जा सकता है। शेष संसार में जितने भी उपासना पूजा पद्धति के मार्ग हैं उनको पंथ नाम से निरूपित किया गया है। वह सभी पंथ हैं जो कि उपासनाए पूजा पद्धति के मार्ग है धर्म नहीं।
समापन कार्यक्रम को कथा वाचक निर्मल कुमार शुक्ला (मानस महारथी) महाराष्ट्र ब्रहमचारी परीक्षा पीठाधीश्र, राघव रामायणी (झांसी) नगर खेरापति नरेश शास्त्री ने भी अपने प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि धर्म की अनेक लोग विकृत व्याख्या कर रहे हैं जोकि धर्म के मर्म से सर्वथा विपरीत है।
उन्होंने कहा कि विद्वान व्यक्ति को चाहिए कि वह धर्म के मर्म को जानने के लिए स्वाध्याय नियम और तपस्या का मार्ग चुने इसी माध्यम से धर्म की वस्तु स्थिति को जानकर हम अपने जीवन काल में जो हमारा सर्वोच्च लक्ष्य है आत्म जागरण का उसको प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने कहा कि धर्म हमें सिखाता है किए संपूर्ण जगत में हमारा जो अस्तित्व है। वह सहअस्तित्व के भाव से ही संबंधित है। यदि प्रत्येक प्राणी का अस्तित्व इस संपूर्ण जगत में है तभी हमारा अस्तित्व समन्वित रूप से रह पाएगा। प्रकृति ने समस्त प्राणियों का पालन पोषणए प्रत्येक वस्तु की पूर्ति बिना भेदभाव के की है। संसार में सूर्य का प्रकाश बिना भेदभाव के समस्त प्राणियों को समान रूप से प्राप्त होता है और सूर्य से प्राप्त उर्जा को समस्त प्राणी ग्रहण करते हैं। इसी प्रकार जल वायु की पूर्ति बिना भेदभाव के समस्त प्राणियों को हो जाती है लेकिन किसी एक के स्वार्थ की पूर्ति प्रकृति के संसाधन कदापि नहीं करते हैं। स्वार्थ के वशीभूत होकर व्यक्ति अपना विवेक खो देता है। विवेक शून्य प्राणी को स्वयं अपने कल्याण के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति का कल्याण दिखाई नहीं देता है।
कथा श्रवण करने पहुचें पूर्व विधायक
श्रीराम चरित मानस सम्मेलन के समापन अवसर पर पूर्व विधायक व कांग्रेस जिलाध्यक्ष दैवेद पटेल कांग्रेस कार्यकर्ता ब्लॉक अध्यक्ष संदीप शर्मा आदि के साथ पहुच कर कथा का श्रवण की तथा संतो को शाल श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया तथा व्यास गादी की पूजा अर्चना की। पंच दिवसीय श्रीराम चरित मानस सम्मेलन का आयोजन मानस सम्मेलन समिति के द्वारा 23 साल से लगातार किया जा रहा हैं।

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