शिक्षक कैसे बनाएं विद्यालय की व्यवस्था, वर्ष में एक बार मिलती है राशि, और खर्च भी करना पड़ती है मार्च में ही
शिक्षकों की व्यथा
सिलवानी। मध्यप्रदेश में शिक्षा विभाग द्वारा गत वर्ष से खातों को जीरो बेलेंस खातों में बदल दिया गया है, जिस कारण विद्यालयों को अक्टूबर महीने तक सर्व शिक्षा अभियान एवं अन्य मदों से जारी होने वाली राशि का कुछ अता पता नहीं रहता, जबकि विद्यालयों में जून माह से ही खर्चे शुरू हो जाते हैं।
जानकारी के अनुसार वरिष्ठ कार्यालय आदेशित तो कर देते हैं कि स्कूल खुलते ही भवन साफ सफाई, पुताई, लघु मरम्मत, पौधारोपण करें लेकिन यह ध्यान ही नहीं कि विद्यालयों में खर्च करने राशि ही नहीं है, न हर समय खर्च करने की कोई अधिकृत सूचना। शिक्षक चाक, झाड़ू, परिसर की सफाई, स्वतंत्रता दिवस पर पारितोषिक, प्रसाद आदि तक खुद खरीद कर ही खर्च कर रहे हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गत सत्र में अचानक मार्च माह में एक मुश्त बिल बनाकर लगाए गए, क्या शिक्षक साल भर उधारी करे या नगद खरीदी कर फिर जो नहीं लिया गया उसके बिल समिट करे यह व्यवस्था कितनी व्यवहारिक है यह एक बड़ा प्रश्न है ?
शिक्षा विभाग द्वारा हर दिन कुछ न कुछ गतिविधियों हेतु आदेश तो भेजे जाते है लेकिन वित्तीय संसाधन हेतु कोई दिशा निर्देश नहीं दिये जाते है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत जारी बजट जिला स्तर पर ही करोड़ो में होता है, फिर विद्यालयों को गतिविधियों हेतु राशि हमेशा उपलब्ध क्यों नहीं है।
जानकारी के अुसार प्रदेश के शिक्षा विभाग द्वारा विद्यालयों को साल भर के मेंटनेंस एवं अन्य खर्च हेतु मात्र 25 हजार रूप्ये की राशि उपलब्ध कराई जाती है। जो मार्च के माह में ही खर्च करना होती है। अप्रेल लगने पर वह राशि लेप्स हो जाती है। किसी विद्यालय में दो कमरे है तो चार, या अधिक कमरे सभी के लिए एक जैसी राशि भेजी जाती है। प्रशासन को चाहिये कि छात्र संख्या और स्कूल भवन के अनुपात में राशि विद्यालयों को उपलब्ध कराई जाये। कुछ शिक्षकों ने बताया कि मार्च में राशि लेप्स होने के भय में हर किसी का बिल लगाना पड़़ता है जो कि व्यवहारिक नही है।
इस संबंध में शासकीय माध्यमिक विद्यालय बम्हौरी वर्धा के प्रधानाध्यापक अशोक शुक्ला का कहना है कि हमारी शाला माध्यमिक शाला है, इसमें सात कमरे, और हमें ही आंगनबाड़ी को आवंटित तीन कमरे, एक सांस्कृतिक मंच, किचिन शेड, तीन शौचालय एवं अस्सी मीटर के लगभग बाउंड्रीवाल की साफ सफाई एवं पुताई कराना पड़ती है। हमारे विद्यालय में दर्ज संख्या हमेशा नब्बे से ज्यादा व एक सौ के आसपास रहती है। इन सबके रखरखाव पुताई व खेल मैदान, परिसर की सफाई आदि हेतु कितने धन की आवश्यकता होती, इसका आकलन कोई नहीं करता। इसके अतिरिक्त साल भर कक्षा कक्षों में उपयोगी सामग्री, बिछावन, पारितोषिक, राष्ट्रीय उत्सवों को मनाने प्रसाद आदि में भी खर्चा होता रहता है। विभाग को चाहिए कि छात्र संख्या के साथ भवन संरचना के अनुपात में खर्च करने राशि जारी हो व राशि आहरण शाला प्रबंधन समिति की सुविधानुसार वित्तीय वर्ष भर हो जिससे समय समय पर कार्य होते रहें।



