ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 14 नवम्बर 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 14 नवम्बर 2023

हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – कार्तिक मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथी – कार्तिक मास शुक्ल पक्ष वार मंगलवार प्रतिपदा तिथि 02:36 PM तक उपरांत द्वितीया
✏️ तिथी स्वामी – द्वितीया तिथि के देवता हैं ब्रह्मा। इस तिथि में ब्रह्मा की पूजा करने से मनुष्य विद्याओं में पारंगत होता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र अनुराधा 03:24 AM तक उपरांत ज्येष्ठा
🪐 नक्षत्र स्वामी – अनुराधा नक्षत्र का स्वामी शनि है, तथा राशि के स्वामी मंगल हैं।
🔕 योग – शोभन योग 01:56 PM तक, उसके बाद अतिगण्ड योग
प्रथम करण : बव – 02:36 पी एम तक
द्वितीय करण – बालव – 02:15 ए एम, नवम्बर 15 तक
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का (अशुभ गुलिक) काल 12:21 पी एम से 01:58 पी एम
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से गुड़ खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : मंगलवार का राहुकाल 03:35 पी एम से 05:11 पी एम राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:35:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:25:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:39 ए एम से 05:30 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:04 ए एम से 06:20 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:38 ए एम से 12:23 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 01:54 पी एम से 02:39 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:41 पी एम से 06:06 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:41 पी एम से 06:57 पी एम
💧 अमृत काल : 05:00 पी एम से 06:36 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:35 पी एम से 12:26 ए एम, नवम्बर 15
💥 शोभन योग- 14 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 56 मिनट तक।
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-हनुमान मंदिर बूंदी के लड्डू चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
💮 पर्व एवं त्यौहार – गुजराती नववर्ष प्रारंभ/ बलीप्रतिपदा/ दिपावली पाडवा/ विक्रम संवत 1980/ राक्षसनाम स्वत्सर/ अभ्यंग स्नान/ अन्नकूट/ महावीर जैन संवत 2550/ विश्व मधुमेह दिवस, भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू जयन्ती, उद्योगपति आदित्य विक्रम बिड़ला जयन्ती, भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता सिंधुताई सपकाल, जन्म दिवस, ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद पुण्य तिथि, भारतीय अभिनेता मनोज तिवारी जन्म दिवस, कवि बलवीर सिंह रंग जन्म दिवस, अर्थशास्त्री लक्ष्मीचंद जैन स्मृति दिवस, बाल दिवस (Children’s Day), राष्ट्रीय पुस्तक दिवस (सप्ताह), मूल प्रारंभ
✍🏼 विशेष – द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षण दोनों त्याज्य बताया गया है। द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्माजी हैं। यह द्वितीया तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।
🌷 Vastu Tips 🪷
वास्तु शास्त्र में घर बनवाने से लेकर खरीदने तक, घर के हर एक हिस्से को लेकर कुछ न कुछ नियम बताए गए हैं। जिनका पालन हमें जरूर करना चाहिए, अगर आप इन नियमों का पालन नहीं करेंगे तो आपको भारी परिणाम भुगतना पड़ सकता है। इन्हीं नियमों से एक घर के खिड़की-दरवाजे को लेकर है। तो चलिए वास्तु शास्त्र में आज आचार्य श्री गोपी राम से जानते हैं घर के मुख्य दरवाजे पर खिड़की बनवाने के बारे में।
मुख्य दरवाजे पर खिड़की बनवाएं या न बनवाएं और बनवाएं तो कैसे और कितनी बनवानी चाहिए ? वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के मुख्य दरवाजे पर खिड़की बनवाना अच्छा रहता है। मुख्य दरवाजे पर खिड़की बनवाने से घर में माहौल अच्छा बना रहता है और घर में सुख-शांति रहती है। अब हम आपको बताते हैं कि मुख्य दरवाजे पर किस तरह खिड़की बनवानी चाहिए।
⏺️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
सिद्ध मंत्र कौन से हैं?
मंत्र सिद्धि के विधि बहुत कठिन होने से सिद्ध किया हुआ मंत्र सदगुरु से लेना ठीक रहता है। क्योंकि ग्रहस्थ जीवन में मंत्र सिद्ध करना आसान नहीं है। मंत्र के 10 संकार का वर्णन मंत्र, तंत्र संहिता, मंत्र महोदधि में मिलता है।
श्रीयंत्र, तंत्र संहिता में लिखा है कि महर्षि अगस्त्य और दैत्य गुरु आदि शुक्राचार्य के अनुसार धनदायक दुर्लभ मंत्र इस ब्रह्माण्ड में एक ही है।
अष्टाक्षर अग्नि मन्त्र, सूर्य के मन्त्र, प्रणव सहित गणपति एवं हरिद्रा गणपति, सूर्य मन्त्र, षडक्षर राम मन्त्र, प्रणवादि मन्त्रराज नृसिंह मन्त्र, प्रणव तथा वैदिक मन्त्र ये सभी मन्त्र ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य इन त्रैवर्णिकों को ही देना चाहिए।
सुदर्शन, पाशुपत, आग्नेयास्त्र और नृसिंह के मन्त्र ब्राह्मण और क्षत्रिय केवल वर्णों को ही देना चाहिए । अन्य वर्णों को कभी नहीं देना चाहिए।
चारों छिन्नमस्ता, मातंगी, त्रिपुरा, कालिका, शिव, लघुश्यामा, कालरात्रि, गोपाज, जानकीपति राम, उग्रतारा और भैरव के मन्त्र चारों वर्णों को देना चाहिए स्त्रियों के लिए ये मन्त्र विशेषरूपेण सिद्धिदायक कहे गये हैं।
🧉 आरोग्य संजीवनी 🍾
मोटापा नाशक कायाकल्प तेल चन्दन, केसर, खस, प्रियंगु, इलाइची , गोरोचन, लोबान, अगर, कस्तूरी, कपूर, जावित्री , जायफल, कंकोल, सुपारी, लौंग, नली, जटामासी, कूट-रेणुका , तगर, नागरमोथा, नविन नख, बोल, दौना, चोरक शैलेय, एलुआ, सरल, सतवन , जाख, आँवला, लजौनी घास, पदमाख , धाय के फूल, पुंडरिक , कचूर, अपामार्ग का पंचांग , धतूरे के पत्ते – 10- 10 ग्राम (अलग – अलग कूटकर जौ कूट कर ले या कूटकर सिलबट्टे पर पिसे ) एक लीटर शुद्ध सरसों का तेल । 4 लीटर पानी । इसमें घोंट कर 1 लीटर बेल के पत्तों का रस डाले । फिर घोंटे और आग पर धीमी आंच में गरम करके सब कुछ जला कर तेल रह जाने तक ठंडा करके निचोड़ कर छान लें ।
👉🏽 उपयोग – प्रतिदिन मालिश करके 1 घंटे बाद स्नान करे ।
🪔 गुरु भक्ति योग 🕯️
वो कोनसी वस्तु हैं जो कभी अपवित्र नहीं होती हैं ?
वायु पुराण और तन्त्र रहस्य ग्रन्थ के मुताबिक सृष्टि में पाँच वस्तु ऐसी हैं, जो अशुद्ध होकर भी शुद्ध कहलाती हैं- अमृतम पत्रिका अघोर विशेषांक से साभार
पुराणों में लिखा संस्कृत का यह श्लोक दिमाग को खोल देगा
उच्छिष्टं शिवनिर्माल्यं
वमनं शवकर्पटम् ।
काकविष्टा ते पञ्चैते
पवित्राति मनोहरा॥
उच्छिष्ट का अर्थ है- शेष, बचा हुआ, अस्वीकृत, त्यक्त, झूठन। गाय का दूध।
गाय का दूध पहले उसका बछड़ा पीकर उच्छिष्ट करता है। फिर भी वह शुद्ध रहकर शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है।
शिव निर्माल्यं के बारे में अधिकांश हिन्दू जानते हैं। पूजन के पश्चात शिंवलिंग पर चढ़ा हुआ सामान शिव निर्माल्य कहा जाता है।
एक शब्द गंगा का जल भी है। गंगा जी का अवतरण स्वर्ग से सीधा शिव जी के मस्तक पर हुआ। नियमानुसार शिव जी पर चढ़ायी हुई हर चीज़ निर्माल्य है पर गंगाजल पवित्र है।
वमनम्—वमनम का अर्थ है उल्टी।— शहद यानी मधु को मधुमक्खी का वमन कहा गया है।
मधुमख्खी जब पुष्पों का रस लेकर अपने छत्ते पर आती है, तब वह अपने मुहं से उस रस की शहद के रूप में उल्टी करती है ,जो पवित्र कार्यों मे उपयोग किया जाता है। मधुमक्खी के कड़े परिश्रम के बाद मधु एकत्रित होता है।
शव कर्पटम् अर्थात रेशमी वस्त्र धार्मिक कार्यों को सम्पादित करने के लिये हर वस्तु का शुद्ध होना जरूरी है। पूजा-अनुष्ठान में रेशमी वस्त्र को बहुत अधिक पवित्र माना गया है। लेकिन रेशम का श्रेष्ठ बनाने के लिए रेशमी कीडे़ को उबलते पानी में डाला जाता है।
फिर रेशम के कीड़े मर जाते हैं। उसके बाद रेशम मिलता है, इसे शव कर्पट कहते हैं, जो कि पूर्णतः पवित्र है।
काक विष्टा— यानि कौए का मल कौवा विशेषकर पीपल वृक्ष के फल खाता है ओर उन पेड़ों के बीज अपनी विष्टा में इधर उधर छोड़ देता है, इसे पशु-पक्षी द्वारा किया गया वृक्षारोपण कहते हैं।
कौए के मल विसर्जनवसे पेड़ों की उत्पत्ति होती है। पीपल के पेड़ को उगाने में काक का बहुत बड़ा योगदान है।
ऐसे ही नाग ओर शेषनाग में क्या अंतर है। इस तरह की अनेक जानकारी amrutam कालसर्प विशेषांक में दी गई हैं।
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⚜️ प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये। वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये।
शास्त्र कहता है, द्वितीया तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है, उस व्यक्ति का हृदय साफ नहीं होता है। इस तिथि के जातक का मन किसी की खुशी को देखकर आमतौर पर खुश नहीं होता, बल्कि उनके प्रति ग़लत विचार रखता है। इनके मन में कपट और छल का घर होता है, ये अपने स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए किसी को भी धोखा दे सकते हैं। इनकी बातें बनावटी और सत्य से बहुत दूर होती हैं। इनके हृदय में दया की भावना बहुत ही कम होती है तथा यह किसी की भलाई तभी करते हैं जबकि उससे अपना भी लाभ हो। ये परायी स्त्री से अत्यधिक लगाव रखने वाले होते हैं जिसके वजह से कई बार इन्हें अपमानित भी होना पड़ता है।

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