सर्व सुविधाओं से लेस रहेगी एंबुलेंस : रायसेन जिले को 8 पशु चिकित्सा एंबुलेंस मिली
टोल फ्री नंबर 1962 कॉल करने पर अब घटनास्थल पर ही घायल गौवंश को मिलेगा इलाज
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन । रायसेन जिले को 8 पशु चिकित्सा एंबुलेंस मिली हैं। अब रायसेन जिले में जहां भी घायल गौवंश की सूचना मिलेगी, वहां मौके पर पशु चिकित्सा एंबुलेंस पहुंचेगी। जिसका शुभारंभ गौरक्षा संकल्प सम्मेलन के साथ भोपाल में किया गया। भोपाल से पशु चिकित्सा एंबुलेंस रवाना होकर रायसेन पशु चिकित्सा लय पहुंची। गौरतलब है कि जिले में गौवंश बढ़ने से सड़कों पर घूमता रहता है। जिससे लगातार हादसे सामने आते हैं। ऐसे में कई गौवंशों की मौत हो जाती है। साथ ही जो गौवंश घायल अवस्था में रहता है। उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ पीके अग्रवाल हेड क्लर्क कैलाश रघुवंशी ने बताया कि उन्हें तत्काल में इलाज नहीं मिल पाता। इसके अलावा दूर दराज गांव से पशु पालकों को भी निजी वाहनों से गंभीर घायल गाैवंश को इलाज कराने लाना पड़ता है। जिससे अब पशु पालकों को भी परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। इसके अलावा गौसेवकों को भी पशु चिकित्सा वाहन से गौवंशों का इलाज करने में मदद मिलेगी। धरातल पर यह योजना सुचारु रुप से चलने पर गौवंशों की दुर्दशा को दूर करेगी।
रायसेन आते ही संचालित की जाएगी एंबुलेंस…..
पशु चिकित्सा विभाग के उपसंचालक डॉ. अग्रवाल ने बताया कि पशु चिकित्सा एंबुलेंस वाहन रायसेन आते ही यहां से हरी झंडी दिखाकर जिले के विकासखंडों के लिए रवाना किया जाएगा। जिससे सभी वाहनों से घायल गौवंशों को इलाज मिलना शुरु हो सके। इसके अलावा पशु अस्पतालों का भी लोड कम होगा।
टोल फ्री नंबर 1962 पर कॉल करने पर पहुँचेगी एंबुलेंस……
पशु चिकित्सा एंबुलेंस वाहन में पशु उपचार, शल्य चिकित्सा, कृत्रिम गर्भाधान, रोग परीक्षण आदि के लिए सभी संबंधित उपकरण मौजूद रहेंगे। कॉल सेंटर के टोल फ्री नंबर 1962 पर कॉल करके पशुपालक अपने घर पर ही पशु चिकित्सा का लाभ उठा सकेंगे।
जीपीएस सिस्टम से होगी मॉनिटरिंग…..
एंबुलेंस राज्य स्तरीय कॉल सेंटर से जुड़ी रहेंगी। एंबुलेंस की मॉनिटरिंग जीपीएस से की जाएगी। जिससे कि पशु चिकित्सा वाहनाें का दुरुपयाेग न हाे सके।
खास बात ये है इन एंबुलेंस को मोबाइल वेटनरी यूनिट की तर्ज पर तैयार किया गया है। प्रत्येक एंबुलेंस में एक वेटनरी डॉक्टर, एक पैरामेडिकल स्टॉफ और तीसरा ड्राइवर कम सहायक तैनात रहेगा। दवाइयों से लेकर माइनर सर्जरी तक की सुविधा: मोबाइल एंबुलेंस में दवाईयों की किट उपलब्ध रहेगी।
पशु चिकित्सा विभाग के उप संचालक डॉ प्रमोद कुमार अग्रवाल ने बताया कि वर्ष 2018-19 में संजीवनी पशु चिकित्सा सेवा के लिए भी यही नंबर 1962 चलता था। फिर उसी नंबर को एंबुलेंस के लिए रखा गया है। वहीं एंबुलेंस में तैनात वेटनरी डॉक्टर और स्टॉफ आउट सोर्स के माध्यम रख गया है। इसमें सरकारी कर्मचारी शामिल नहीं हैं।



