2024: कब है कजरी तीज ? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🔮 2024: कब है कजरी तीज ? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
🔘 HIGHLIGHTS
🔹 सावन के बाद भाद्रपद का महीना आता है।
🔹 इस माह में कजरी तीज का पर्व मनाया जाता है।
🔹 यह त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है।
हिंदू धर्म में कजरी तीज का विशेष महत्व है। यह पर्व हरियाली और हरतालिका तीज की तरह ही होता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए तीज माता की पूजा करने के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। इसके बाद शाम को चंद्रोदय के समय अर्घ्य देने के साथ अपना व्रत खोलती है। इस साल कजरी तीज पर काफी शुभ योग बन रहा है। इस साल कजरी तीज में पंचक भी लग रहा है। आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से कजरी तीज का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, पारण का समय से लेकर आरती तक…
❄️ पूजा की विधि और शुभ मुहूर्त
कजरी तीज भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि में 21 अगस्त को शाम को 5:06 से शुरू होगी जो 22 अगस्त को दोपहर 1:46 पर समाप्त होगी. इस दौरान पूजा का शुभ मुहूर्त प्रात काल में 4:26 से प्रातः काल 5:10 तक रहेगा. कजरी तीज के दिन चंद्र उदय होने पर पूजा करें. इस दौरान हाथ में एक चांदी की अंगूठी और गेहूं के कुछ दाने लेकर चंद्रदेव की पूजा करें फिर अर्ध्य दें. पूजा के बाद किसी सौभाग्यवती स्त्री को सुहाग की चीज दान में देकर उनसे आशीर्वाद लें.
🍱 कजरी तीज की पूजा सामग्री
कजरी तीज पर पूजा करने के लिए पीला वस्त्र, श्रीफल, चंदन, गाय का दूध, गंगाजल, दही, मिश्री, शहद, पंचामृत जरूर शामिल करें। इसके बाद कच्चा सूता, नए वस्त्र, केला के पत्ते, बेलपत्र, शमी के पत्ते, जनेऊ, जटा नारियल, सुपारी, कलश, भांग, धतूरा, अक्षत या चावल, दूर्वा घास, घी और कपूर रख लें। इस दौरान माता पार्वती को हरे रंग की साड़ी, चुनरी, बिंदी, चूडियां, कुमकुम, कंघी, बिछुआ, सिंदूर और मेहंदी अर्पित करें।
🌙 कजरी तीज का व्रत कैसे रखा जाता है ?
कजरी तीज के दिन व्रत रखने से पहले आपको सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए. इसके बाद व्रत का संकल्प लेकर व्रत के नियमों का पालन करना आवश्यक है.
🌚 रात में ऐसे करें पूजा
कजरी तीज में चंद्रोदय होने पर पूजा करें। इस दौरान हाथ में एक चांदी की अंगूठी और गेहूं के कुछ दाने लेकर चंद्रदेव की पूजा करें। इसके बाद उन्हें अर्घ्य दें। पूजा समाप्त होने के बाद किसी सौभाग्यवती स्त्री को सुहाग की चीजें दान में देकर उनसे आशीर्वाद लें।
👉🏽 ऐसे दें चंद्रमा को अर्घ्य- चंद्रमा को जल के छींटे देकर रोली, मौली, अक्षत चढ़ाएं। फिर चांद को भोग अर्पित करें व चांदी की अंगूठी और आंखें (गेंहू) हाथ में लेकर जल से अर्घ्य देना चाहिए। अर्घ्य देते समय थोड़ा-थोड़ा जल चंद्रमा की मुख की और करके गिराते रहें। चार बार एक ही जगह खड़े हुए घूमें। परिक्रमा लगाएं।
अर्घ्य देते समय बोलें, ‘सोने की सांकली, मोतियों का हार, चांद ने अरग देता, जीवो वीर भरतार’ सत्तू के पिंडे पर तिलक करें व भाई / पति, पुत्र को तिलक करें। पिंडा पति / पुत्र से चांदी के सिक्के से बड़ा करवाएं। यानी जो आपने सत्तु का बड़ा सा केक बनाया है उसे चांदी के सिक्के से पुत्र या पति को तोड़ने के लिए कहें। इस क्रिया को पिंडा पासना कहते हैं। पति पिंडे में से सात छोटे टुकड़े करते हैं, व्रत खोलने के लिए यही आपको सबसे पहले खाना है। पति बाहर हो तो सास या ननद पिंडा तोड़ सकती है।
सत्तू पर ब्लाउज, रुपए रखकर बयाना निकाल कर सासुजी के चरण स्पर्श कर कर उन्हें देना चाहिए। सास न हो तो ननद को या ब्राह्मणी को दे सकते हैं। आंकड़े के पत्ते पर सातु खाएं और अंत में आंकड़े के पत्ते के दोने में सात बार कच्चा दूध लेकर पिएं इसी तरह सात बार पानी पिएं।
दूध पीकर इस प्रकार बोलें- ‘दूध से धायी, सुहाग से कोनी धायी, इसी प्रकार पानी पीकर बोलते हैं- पानी से धायी, सुहाग से कोनी धायी’ सुहाग से कोनी धायी का अर्थ है पति का साथ हमेशा चाहिए, उससे जी नहीं भरता। बाद में दोने के चार टुकड़े करके चारों दिशाओं में फेंक देना चाहिए।
इस व्रत में गर्भवती स्त्री फलाहार कर सकती हैं। यह व्रत सिर्फ पानी पीकर किया जाता है। चांद उदय होते नहीं दिख पाए तो चांद निकलने का समय टालकर आसमान की ओर अर्घ्य देकर व्रत खोल सकते हैं। इस तरह तीज माता की पूजा संपन्न होती है।
📖 कजरी तीज की कहानियां
🗣️ कजरी तीज से जुड़ी कई रोचक कहानियां हैं. इन कहानियों में माता पार्वती और भगवान शिव के प्रेम की गाथाएं होती हैं.
🔱 शिव-पार्वती का मिलन: एक कहानी के अनुसार, माता पार्वती ने कठोर तपस्या करके भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया था. कजरी तीज के दिन ही उनका विवाह हुआ था.
🌧️ ऋतुओं का वर्णन: कजरी तीज के गीतों में बारिश, मेघा, पेड़-पौधे आदि का वर्णन होता है. इन गीतों में प्रकृति के सौंदर्य का बखान किया जाता है.
✡️ महिलाओं का उत्सव: कजरी तीज महिलाओं का एक विशेष त्योहार है. इस दिन वे एक-दूसरे के घर जाती हैं, गीत गाती हैं और झूले झूलती हैं.
🤷🏻 कजरी तीज का महत्व क्या है ?_
सुहाग की रक्षा: कजरी तीज का व्रत सुहाग की रक्षा के लिए किया जाता है.
मानसिक शांति: यह व्रत मन को शांत और स्थिर रखता है.
पारिवारिक सुख: यह पारिवारिक सुख और समृद्धि लाता है.
सांस्कृतिक महत्व: यह एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक त्योहार है जो भारतीय परंपराओं को जीवित रखता है.


