Today Panchang आज का पंचांग बुधवार, 25 जून 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 25 जून 2025
25 जून 2025 दिन बुधवार को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष कि अमावस्या तिथि है। आज शुभ वार अर्थात बुधवार की अमावस्या होने के वजह से सुभिक्ष एवं प्रजा में सुख का सुन्दर सुयोग बनेगा। आज स्नान – दान एवं श्राद्ध की पुण्यतमा अमावस्या हें। आज रवियोग एवं सर्वार्थ सिद्धि योग भी है। आप सभी सनातनियों को ” बुधवार के शुभ अमावस्या” की हार्दिक शुभकामनाएं।
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
👸🏻 शिवराज शक 352
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
☂️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
☀️ मास – आषाढ़ मास
🌑 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – बुधवार आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि 04:01 PM तक उपरांत प्रतिपदा
🖍️ तिथि स्वामी – अमावस्या तिथि के देवता हैं अर्यमा जो पितरों के प्रमुख हैं। अमावास्या में पितृगणों की पूजा करने से वे सदैव प्रसन्न होकर प्रजावृद्धि, धन-रक्षा, आयु तथा बल-शक्ति प्रदान करते हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र म्रृगशीर्षा 10:40 AM तक उपरांत आद्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी – मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल ग्रह है। जो व्यक्ति मृगशिरा नक्षत्र में जन्म लेते हैं उनपर मंगल का प्रभाव देखा जाता है।
⚜️ योग – गण्ड योग 06:00 AM तक, उसके बाद वृद्धि योग 02:38 AM तक, उसके बाद ध्रुव योग
⚡ प्रथम करण : चतुष्पाद – 05:28 ए एम तक नाग – 04:00 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : किंस्तुघ्न – 02:39 ए एम, जून 26 तक बव
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 11:10 से 12:35 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:35 से 2:00 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:13:00
🌄 सूर्यास्तः- सायं 06:47:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:05 ए एम से 04:45 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:25 ए एम से 05:25 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
🔯 विजय मुहूर्त : 02:43 पी एम से 03:39 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:21 पी एम से 07:42 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 07:23 पी एम से 08:23 पी एम
💧 अमृत काल : 11:34 पी एम से 01:02 ए एम, जून 26
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:04 ए एम, जून 26 से 12:44 ए एम, जून 26
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 05:25 ए एम से 10:40 ए एम
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकले।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को हरे फल दान करें।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : सर्वार्थसिद्धि योग/देवपितृकार्ये अमावस्या/ अमावस्या समाप्ति शाम 04.01/ परमवीर चक्र सम्मानित मनोज कुमार पांडे जन्म दिवस, सरस्वती समाज सुधारक क्रांतिकारी स्वामीसहजानंद स्मृति दिवस, राष्ट्रीय कैटफ़िश दिवस, राष्ट्रीय चर्मपत्र पाक कला दिवस, राष्ट्रीय स्ट्रॉबेरी पैराफ़ेट दिवस, स्कूल प्रार्थना प्रतिबंध वर्षगांठ, प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह जन्म दिवस, माइकल जैक्सन पुण्य तिथि, चन्द्रशेखर पांडे जयन्ती, सुचेता कृपलानी जन्म दिवस, विश्वनाथ प्रताप सिंह जन्म दिवस, अभिनेत्री करिश्मा कपूर जन्म दिवस, कैप्टन मनोज कुमार पांडे जयन्ती, विश्व विटिलिगो दिवस, वैश्विक बीटल्स दिवस, संविधान हत्या दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – अमावस्या को मैथुन एवं प्रतिपदा को कद्दू और कूष्माण्ड के फल का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य होता है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि को सम्भोग वर्जित तिथि बताया गया है। अमावस्या तिथि एक पीड़ाकारक और अशुभ तिथि मानी जाती है। अमावस्या तिथि पितृगणों को समर्पित तिथि है अर्थात इसके स्वामी पितृगण हैं। यह केवल कृष्ण पक्ष में ही होती है तथा अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
🗺️ Vastu tips 🗽
वास्तु के अनुसार, अगर आपको कोई दिमागी परेशानी तो उत्तर पश्चिम, पेट की तो दक्षिण पश्चिम, पैरों में तो पूर्व दिशा, कान में तो उत्तर दिशा और अगर हाथों में दिक्कत है तो ईशान कोण को ठीक करें। वहीं अगर कमर में परेशानी है तो दक्षिण पूर्व, आंखें ठीक रखनीहै तो दक्षिण और अगर मुख यानि चेहरे को निरोगी और तरोताजा रखना चाहते हैं तो पश्चिम दिशा के वास्तु को सही कीजिए।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
🌞 1. सुबह जल्दी उठना — दिन की सबसे बड़ी जीत जो व्यक्ति ब्रह्म मुहूर्त में उठता है, वह दिन को नहीं, खुद को जीतता है। यह वो समय होता है जब शरीर, मन और आत्मा तीनों सबसे शांत अवस्था में होते हैं। आप अगर इस समय उठकर सिर्फ 20 मिनट ध्यान कर लें, 10 मिनट खुली हवा में टहल लें, और बस थोड़ा-सा गुनगुना पानी पी लें, तो समझिए आपने अपने शरीर को एक नेचुरल डिटॉक्स दे दिया।
👉 सुबह जल्दी उठो, जीवन खुद आसान हो जाएगा।
🔸️ सुबहकीताज़गी ब्रह्ममुहूर्त प्राकृतिकऊर्जा मनकीशांति
🧘♀️ 2. योग और ध्यान — आत्मा का ट्यून-अप
जैसे कोई गाड़ी बिना सर्विसिंग के धीरे-धीरे खराब होती जाती है, ठीक वैसे ही शरीर भी योग और ध्यान के बिना बोझिल होता जाता है। 5 आसन, 5 मिनट ध्यान और 5 गहरी साँसें — यही है वो “अलौकिक नुस्खा” जो आपकी इम्यूनिटी, मूड, और माइंड तीनों को चमत्कारी रूप से बदल सकता है।
🔸️ योगसेस्वास्थ्य ध्यानसेशांति प्राणायामकाचमत्कार तनमनएक
🥦 3. सादा भोजन — पेट खुश, शरीर स्वस्थ
आपका खाना जितना रंग-बिरंगा और मसालेदार होता है, आपका शरीर उतना ही असंतुलित हो जाता है। असली सेहत छिपी है सादगी में घर का बना खाना, मौसमी फल-सब्जियाँ, छाछ, दाल, और रोटी यानी पैकिंग में आई बीमारियाँ।
कहते हैं — “अगर तुम अपने किचन को दवा की दुकान बना लोगे, तो अस्पताल तुम्हारे घर नहीं आएगा।”
🔸️ सादाभोजन देसीखानाबेस्टहै जैसाखाओगेवैसाबनोगे पेट का ख्याल 🎋 आरोग्य संजीवनी ☘️
सीताफल के छिलके के पाउडर के उपयोग:
त्वचा रोगों में –_
छिलके का पाउडर एंटीसेप्टिक और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण फंगल इंफेक्शन, खुजली और दाद जैसे त्वचा रोगों में बाहरी लेप के रूप में प्रयोग किया जाता है।
बालों की देखभाल में –
इसे हेयर पैक में मिलाकर रूसी (dandruff) और जुओं (lice) की समस्या से राहत के लिए प्रयोग किया जाता है।
कृमिनाशक (Anthelmintic) गुण –
लोक चिकित्सा में इसे पेट के कीड़ों को मारने के लिए भी उपयोग किया जाता है, परंतु इसका उपयोग प्रशिक्षित वैद्य की देखरेख में ही करना चाहिए।
आयुर्वेदिक औषधियों में संभावित प्रयोग:
हालांकि यह मुख्य घटक के रूप में आम आयुर्वेदिक दवाओं में नहीं मिलता, लेकिन कुछ विशिष्ट औषधियों में या उपचार विधियों में इसका उपयोग हो सकता है जैसे: त्वचा रोग नाशक लेप/उबटन
कुष्ठ (leprosy) एवं विस्फोटक त्वचा रोगों के लिए वैकल्पिक प्रयोग
वात-पित्त नियंत्रण हेतु लोक औषधियों में
🌷 गुरु भक्ति योग 🌹
हयग्रीव अवतार की पौराणिक कथा
पुराणों में हयग्रीव अवतार की कई कथाएँ मिलती हैं, जिनमें से प्रमुख यह है:
मधु-कैटभ और वेदों की रक्षा सृष्टि के आरंभ में, ब्रह्मा जी ने वेदों के माध्यम से सृष्टि निर्माण का कार्य शुरू किया। लेकिन असुर मधु और कैटभ ने वेदों को चुरा लिया और समुद्र में छिपा दिया। इससे संसार में अज्ञान और अंधकार फैल गया।
तब भगवान विष्णु ने हयग्रीव का रूप धारण किया। उनका मुख घोड़े के समान था और वे तेजस्वी थे। वेदों को पुनः प्राप्त करने के लिए उन्होंने असुरों से युद्ध किया और उनका संहार कर दिया। इसके बाद, वेदों को ब्रह्मा जी को लौटाकर सृष्टि में ज्ञान और धर्म की स्थापना की।
हयग्रीव और असुर हयग्रीव का युद्ध एक अन्य कथा में, असुर हयग्रीव (जो दैत्यराज हिरण्याक्ष का पुत्र था) ने कठोर तपस्या कर ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया कि उसे कोई मनुष्य या देवता नहीं मार सकेगा, और वह केवल उसी के समान एक अन्य “हयग्रीव” के द्वारा मारा जा सकता है। वरदान के कारण वह अजेय हो गया और पूरे ब्रह्मांड में आतंक फैलाने लगा।
देवताओं की प्रार्थना पर, भगवान विष्णु ने हयग्रीव अवतार लिया—एक दिव्य पुरुष, जिनका मुख घोड़े के समान था। उन्होंने असुर हयग्रीव से भयंकर युद्ध किया और अंततः उसका वध कर संसार में शांति स्थापित की।
विष्णु का सिर कटना और हयग्रीव रूप में पुनर्जन्म
एक अन्य कथा के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु ध्यानमग्न थे, और देवताओं ने ब्रह्मांड के कल्याण के लिए उनसे मार्गदर्शन माँगा। लेकिन ध्यान के दौरान, अचानक उनके सिर का एक भाग कटकर अलग हो गया।
इस संकट से उबरने के लिए, ब्रह्मा जी ने एक घोड़े का सिर भगवान विष्णु के धड़ से जोड़ दिया। इस प्रकार, वे हयग्रीव (अश्वमुखी विष्णु) बन गए। इसके बाद, उन्होंने पुनः वेदों का ज्ञान प्रदान किया और संसार में विद्या एवं ज्ञान की स्थापना की।
हयग्रीव अवतार का महत्व वेदों की रक्षा – भगवान हयग्रीव को ज्ञान और वेदों के रक्षक के रूप में पूजा जाता है।
विद्या और बुद्धि के देवता – वे विद्यार्थियों और ज्ञान seekers के आराध्य हैं।
अंधकार पर प्रकाश की विजय – हयग्रीव अवतार यह दर्शाता है कि अज्ञान (अंधकार) पर सदैव ज्ञान (प्रकाश) की विजय होती है।
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⚜️ अमावस्या को दूध का दान श्रेष्ठ माना जाता है। किसी कुआँ, तलाब, नदी अथवा बहते जल में दो-चार बूंद दूध डालने से कार्यों में आनेवाली परेशानियाँ दूर होती है। जौ दूध में धोकर नदी में प्रवाहित करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस तिथि को पीपल में जल देना परिक्रमा करना मिश्री दूध में मिलाकर अर्घ्य देना अत्यन्त शुभ फलदायी माना जाता है।
ऐसा करने से शनिदेव का प्रकोप कम होता है तथा भगवान नारायण एवं माँ लक्ष्मी कि पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। अमावस्या को तुलसी और बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिये। आज घर की सफाई करना और कबाड़ बेचना शुभ माना जाता है। अमावस्या को भूलकर भी सम्भोग (स्त्री सहवास) नहीं करना चाहिये। घर के मन्दिर एवं आसपास के नजदीकी मन्दिर में तथा तुलसी के जड़ में सायंकाल में घी का दीपक जलाना चाहिये इससे लक्ष्मी माता प्रशन्न होती हैं।।


