मध्य प्रदेश

सड़क पर बसें खड़ी कर बैठाते हैं यात्री, लगता है जाम

बस स्टैंड नहीं होने से बन रही समस्या, प्रस्ताव फाइलों में हुआ गुम, आपस खींचतान योजना को अमलीजामा पहनाने बन रहा रोड़ा
रिपोर्टर : बृजेन्द्र कुशवाहा
साईंखेड़ा। लगभग पंद्रह हजार की आबादी वाले नगर साईखेड़ा को भले ही तहसील का दर्जा मिल गया हो, परन्तु एक अदद बस स्टैंड के लिए वह आज भी मोहताज है। रेल सुविधा न होने से केवल सड़क मार्ग पर निर्भर जिले का साईखेड़ा नगर रायसेन और होशंगाबाद जिले की सीमाओं से सटा हुआ है। यहां से प्रतिदिन गाडरवारा, नरसिंहपुर, उदयपुरा, भोपाल के लिए बसों का आना-जाना लगा रहता है। बस स्टैंड न होने की वजह से बसे मेन रोड पर खड़ी रहती हैं। बसों के कहीं भी खड़े रहने से सबसे ज्यादा मुश्किल यात्रियों की होती है। उल्लेखनीय है कि बस स्टैंड के अभाव में सड़क किनारे बसों के जमावड़े से आए दिन जाम की स्थिति बनती है। मवेशी बाजार में पूर्व नगर परिषद द्वारा अधोसंरचना योजनांतर्गत प्रस्तावित था। आपसी खींचतान में योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया गया। बस स्टैंड को मवेशी बाजार में नया बस स्टैंड बनने का प्रस्ताव की जिले के प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मिल गई थी।
नगर परिषद उदासीन
परिषद की उदासीनता के कारण बस स्टैंड का प्रस्ताव फाइलों में पड़ा धूल खा रहा है। करीब पाँच साल पहले मवेशी बाजार में बस स्टैंड बनाने का फैसला लिया गया था, जिसके तहत दो तरफ से बसों का आना जाना और चारों तरफ दुकानें बनाकर युवाओ को रोजगार दिये जा सकते हैं। बस स्टैंड बन लिए न्यूमार्केट की दुकानों का जीर्णोद्धार कर वहां पर यात्री प्रतिक्षालय और सुलभ शौचालय टिकट घर बनाया जा सकता है।
बदल दिया प्रस्ताव
नवगठित नगर परिषद ने प्रस्ताव को बदलते हुऐ मवेशी बाजार में सब्जी बाजार लगाने की कवायद शुरू कर दी है। मवेशी बाजार में सब्जी बाजार लगाने से व्यापारियों के रोजगार को आर्थिक संकट आ जाएगा। दुकानदार वहां दुकानें न लगाकर सड़क किनारे हाथ ठेला पर दुकान लगाने मजबूर होंगे जिससे स्थिति जस की तस रहेगी। नगर के बुद्धिजीवियों का मानना है पूर्व परिषद के प्रस्ताव को यथावत रखते हुए मवेशी बाजार में बस स्टैंड और पुराने तहसील परिसर में सब्जी बाजार और साप्ताहिक बाजार लगाना सुनिश्चित करे जिससे आवागमन में परेशानी नहीं होगी।
होती है असुविधा
नगर में बस स्टैंड न होने से बस आपरेटर और ड्रायवर कंडक्टरों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बस के ड्रायवर कंडक्टर बताते है कि साईखेड़ा में बस स्टैंड न होने से मेन रोड पर बसें खड़ी कर सवारियां बैठाते हैं। कई बार सड़कों पर जाम की वजह से कुछ सवारियां छूट जाती है और बस आपरेटर को नुकसान होता है। वहीं बस स्टैंड न होने से ड्राइवर, कंडक्टर सहित यात्रियों को प्रसाधन में असुविधा होती है।
अतिक्रमण भी समस्या
मवेशी बाजार में अतिक्रमण के चलते बस स्टैंड बनाने का काम अधूरा रह गया। वर्तमान समय में मवेशी बाजार में अतिक्रमण के कारण पैर रखने की भी जगह नहीं है। प्रशासन चाहे तो मवेशी बाजार के अतिक्रमण हटा कर बस स्टैंड का काम शुरू कर सकता है। लेकिन नगर परिषद के अधिकारियों की उदासीनता से नगरवासियों को बस स्टैंड की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
मुख्य मार्ग पर लग रहीं दुकानें
नगर में बुधवार के दिन साप्ताहिक बाजार मेन रोड पर दुकानें लगने से पूरे दिन आवागमन की समस्या से दुकानदारों और आम नागरिकों को जूझना पड़ता है। ऐसे में बस स्टैंड का निर्माण ही ट्रैफिक की समस्या का समाधान हो सकता है। मवेशी बाजार में बस स्टैंड बनाकर ट्रैफिक की समस्या के समाधान के साथ ही रोजगार के लिए मवेशी बाजार में अस्थाई दुकान लगाने वालों को दुकान आवंटित कर उन्हें अपना व्यवसाय जमाने का मौका मिलेगा और नगर परिषद को भी अतिरिक्त आय होगी। मवेशी बाजार की पैमाइश कर अतिक्रमण हटाकर चारों ओर लगभग सैकड़ो की संख्या में दुकानें बनाकर बीचों बीच बस स्टैंड बनाया जा सकता है। बस स्टैंड बनने से मुख्य सड़क पर दबाव कम होगा और ट्रैफिक जाम की समस्या से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सकती है।

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