स्वास्थ्य विभाग में करोड़ों रूपए के जीपीएफ घोटाले का मास्टर माईंड अभी भी महफूस
भोपाल कोषालय की टीम ने सस्पेंड लेखापाल की मौजूदगी में की घोटाले की जांच
मुख्यमंत्री के सांची कार्यक्रम के दौरान घोटाले की होगी शिकायत
ब्यूरो चीफ विनीत माहेश्वरी
रायसेन । मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी के गृह जिले के स्वास्थ्य महकमे में जीपीएफ का बड़ा घोटाला सामने आने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। यहां पर पहले इस मामले को गुपचुप तरीके से रफा दफा करने की कोशिश की गई, लेकिन जब यह पूरा घोटाला मीडिया की सुर्खियां बना तो अब जिम्मेदार इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की दुहाई देते दे रहे है। जबकि पिछले 10 दिन पहले ही इस घोटाले की परते खुल गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई और अब जैसे ही मामला सुर्खियों में आया तो इस पूरे घोटाले के मास्टर माईंट को बचाने के लिए पूरा महकमा जुटा हुआ है और कार्रवाई के नाम पर तीन को सस्पेंड कर घोटाले को दफन करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन यह पूरा घोटाले की गूंज जल्द प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने 17 अगस्त 2023 को सांची में गूंजेंगी, क्योकि मुख्यमंत्री सांची सोलर सिटी का उद्भाटन करने आ रहे है।
अब तक नहीं हो सकी एफआईआर:- इस पूरे मामले में एफआईआर दर्ज किए जाने की प्रक्रिया लंबित है और अब तक इस पूरे मामले में एफआईआर दर्ज तक नहीं हो सकी है। सूत्रों की माने तो 10 अगस्त 2023 की शाम सीएमएचओ थाना कोतवाली पहुंचे थे, लेकिन इस पूरे मामले की एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है। वहीं सूत्रों की माने तो इस घोटालें में शामिल अन्य कर्मचारिको सीधे तौर पर बचाया जा रहा है, सिर्फ तीन को ही इस पूरे मामले में दोषी ठहराया जा रहा है, जबकि यह पूरा घोटाल 2018 से मिल बांट कर हुआ है, जिसमे कई सीएमएचओ बदल गए, लेखापाल बदल गए, लेकिन एक मास्टर माईंट नहीं बदला है। सूत्रों की माने तो लेखापाल जैलानी को कुछ साल पहले ही चार्ज दिया गया है, लेकिन इससे पहले से अन्य लेखापाल भी घोटाल करते हुए आ रहे थे, जिन्हें बचाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं 13 स्वास्थ्य कर्मियों के खाते में राशि आई और निकाली भी गई, लेकिन उनको कार्रवाई से बचाया जा रहा है।
कलेक्टर को कोषालय अधिकारी ने बताया हुआ घोटाला:-
वहीं इस घोटाले की परते जिला कोषालय अधिकारी ने खोली और कलेक्टर को अवगत कराया गया। सूत्रों की माने तो इस पूरे घोटाले को भोपाल कोषालय द्वारा पकड़ा गया, क्योकि रायसेन कोषालय तक के कुछ कर्मचारियों की सांठगांठ से इस घोटाले को बहुत असानी से अंजाम दिया जा रहा था। वहीं इस घोटाले के मामले में कलेक्टर अरविंद दुबे ने बताया कि इस मामले में राज्य स्तर कोषालय की टीम विस्तृत जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में जिन कर्मचारियों को दोषी पाया गया है, उन पर निलंबन की कार्रवाई की गई है और एफआईआर दर्ज किए जाने के निर्देश दिए है और यह पूरी जांच अच्छे तरीके से की जाए।



