मुनिश्री आस्तिक्यसागर प्रणीतसागर ने बड़े मंदिर प्रवचन हाल का नाम किया विद्या निलय

रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर। धार्मिक नगरी के साथ-साथ आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज की स्मृतियों से ओतप्रोत गौरझामर मे कई उदाहरण देखने को मिलते हैं जिसमें आज एक और प्रागंण सभागार अब नवीन नाम से जाना जायेगा जिसका नामकरण विद्यासागर निलय किया गया। आचार्य गुरुदेव के भक्तों की अपने-अपने ओर से कुछ न कुछ अर्पण करने के लिए समर्पित भाव देखे जा रहे हैं इसी क्रम में आज अतिशय क्षेत्र श्री देव पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर मढ़ी /रहली रोड पर स्थित है प्रवचनहाल सभाग्रह टीन सेट के नाम से जाना जाता रहा है जिसका आज नामकरण यमल (ग्रहस्त जुड़वा भाई) आचार्य विशुद्ध सागर जी के शिष्य द्वय मुनिराज आस्तिक्य सागर, प्रणीतसागर जिनके माता-पिता द्वारा गौरझामर में विशाल बाहुबली भगवान की प्रतिमा प्रतिष्ठित करवाई अभी सिद्धचक्र विधान संपन्न हुआ उनके द्वारा नए नाम हुए विद्या निलय से सर्वप्रथम श्री जी की अभिषेक और फिर सर्व जगत के कल्याण हेतु की जाने वाली शांतिधारा करवाई जिसके पात्र दोनों ओर से दाहिनी ओर से दीपक, संजय/संतोष चौधरी एवं दूसरी ओर से सनी /सन्नू रेडीमेड द्वारा “श्री विद्यासागर निलय” प्रथम शांतिधारा की बोली ली गई शांतिधारा संपन्न हुई फिर पूजन उपरांत मुनिश्री के द्वारा प्रवचन दिए गए जिसके उपरांत बड़े मंदिरजी से आहारचर्या के लिए पड़गाहन हुआ और आज ही केसली की और दोनों मुनिराज का विहार हुआ यमल मुनि पूज्य श्री आस्तिक्य सागर जी व पूज्य श्री प्रणीत सागर जी का गौरझामर से केसली कल पहुंच जाएंगे।



