धार्मिक

09 अगस्त 2024: सावन में नाग पंचमी कब? जानें डेट, महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
–••●☆सब शिव है☆●••-
🔮 09 अगस्त 2024: सावन में नाग पंचमी कब? जानें डेट, महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
🔘 HIGHLIGHTS
▪️ सावन में नाग पंचमी मनाई जाती है।
▪️ इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है।
▪️ उपासना करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है।
हिंदू धर्म में नाग पंचमी के पर्व का विशेष महत्व है। नाग देवताओं को समर्पित यह पर्व देश के कुछ राज्यों में सावन मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि यानी 25 जुलाई दिन गुरुवार को मनाया जाएगा। वहीं कुछ राज्यों में सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि यानी 9 अगस्त दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा। सावन मास भगवान शिव का प्रिय मास है और इस मास में शिव के गण नाग देवता की पूजा करने का भी विधान हैं। नाग पंचमी पर मुख्य रूप से आठ नाग देवताओं की पूजा की जाती है और वे हैं वासुकि, ऐरावत, मणिभद्र, कालिया, धनंजय, तक्षक, कर्कोटकस्य और धृतराष्ट्र। इनकी पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है और सर्प भय से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से बड़ा नाग पंचमी का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि…
🐍 नाग पंचमी कब है ?
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, इस साल सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 9 अगस्त 2024 को सुबह 8 बजकर 15 मिनट पर हो रही है और अगले दिन यानी 10 अगस्त को सुबह 06 बजकर 09 मिनट पर इसका समापन होगा। इसलिए उदयातिथि के अनुसार, 9 अगस्त को ही नाग पंचमी मनाया जाएगा।
⚛️ पूजा का शुभ मुहूर्त : इस दिन पूजा का विशेष मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट पर शुरू होगा और दोपहर 1 बजे समाप्त होगा। इस दिन प्रदोष काल में नाग देवता की पूजा का बड़ा महत्व है। 9 अगस्त को शाम 6:33 पीएम से रात 8:20 पीएम तक नाग देवता की पूजा के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त रहेगा।
🧘🏻‍♀️ सुमिरन करने से होगा लाभ
धार्मिक मान्यता के अनुसार नाग पंचमी के दिन नाग देवता की आराधना करने से भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और सर्प दोष से मुक्ति मिलती है। नाग पंचमी के दिन अनन्त, वासुकि, पद्म, महापद्म, तक्षक, कुलीर, कर्कट और शंख नामक अष्टनागों का ध्यान कर पूजा करें। इसके बाद नाग देवता से घर में सुख-शांति और सुरक्षा की प्रार्थना करें।
🙇🏻‍♀️ पूजा विधि :
🔹 नागपंचमी के दिन सुबह स्नानादि के बाद स्वच्छ कपड़े धारण करें।
🔹 शिवलिंग पर जल अर्पित करें और शिवजी की आराधना करें।
🔹 इसके बाद घर के एंट्रेस गेट, मंदिर और रसोई घर के बाहर के दरवाजे को खड़िया से पुताई करें।
🔹 इस पर कोयले से नाग देवताओं का चिन्ह बनाएं या नागदेवता की प्रतिमा भी घर ला सकते हैं।
🔹 इसके बाद पूजा आरंभ करें और नागदेवता फल, फूल, धूप-दीप, कच्चा दूध और नैवेद्य अर्पित करें।
🔹 अंत में नागदेवता का ध्यान करे और उनकी आरती उतारें।
🔹 आरती करने के बाद नाग पंचमी की कथा का पाठ कर सकते हैं।
🔹 संभव हो, तो पूजा के बाद दूध का एक कटोरा खेत या ऐसे स्थान पर रख दें, जहां सांप के आने की संभावना हो।
📖 नाग देवता को इन मंत्रों से करें प्रसन्न
ॐ श्री भीलट देवाय नम:।।
ॐ भुजंगेशाय विद्महे, सर्पराजाय धीमहि, तन्नो नाग: प्रचोदयात्।।
सर्वे नागा: प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले।
ये च हेलिमरीचिस्था ये न्तरे दिवि संस्थिता:।।
ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिन:।
ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु वै नम:।।
💁🏻 नाग पंचमी का महत्व
सावन का महीना वर्षा ऋतु का होता है और इस माह में सांप भू गर्भ से निकलकर भू तल पर आ जाते हैं। नाग निकलकर किसी को भी आहत ना कर दें, इसलिए नाग पचंमी का पूजा अर्चना की जाती है। बिहार, बंगाल आदि क्षेत्रों में कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व पूरे श्रद्धाभाव से मनाया जाता है। शास्त्रों व पुराणों में बताया गया है कि पंचमी तिथि के स्वामी स्वयं नागदेव हैं और इन दिनों सांपों की पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी और घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। इस दिन नाग देवताओं की पूजा करने से कुंडली में मौजूद राहु व केतु से संबंधित दोषों से मुक्ति मिलती है और कालसर्प दोष की पूजा भी करवाई जाती है। पंचमी के दिन इनकी पूजा करने से सभी तरह की रुकावट दूर रहती हैं और मनुष्य को सांपों के भय से मुक्ति भी मिलती है। पुराणों में बताया गया है कि नाग देवता पाताल के स्वामी हैं इसलिए नाग पंचमी या किसी भी अन्य पंचमी के दिन व्यक्ति को भूमि की खुदाई करने से बचना चाहिए।
🗣️ पौराणिक कथा_

पौराणिक कथा के अनुसार, अर्जुन के पौत्र और राजा परीक्षित के पुत्र जन्मजेय ने सर्पों से बदला लेने और नाग वंश के विनाश के लिए एक नाग यज्ञ किया। क्यों कि उनके पिता राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नामक सर्प के काटने से हुई थी।नागों की रक्षा के लिए इस यज्ञ को ऋषि जरत्कारु के पुत्र आस्तिक मुनि ने रोका था। उन्होंने सावन की पंचमी वाले दिन ही नागों को यज्ञ में जलने से रक्षा की थी। और इनके जलते हुए शरीर पर दूध की धार डालकर इनको शीतलता प्रदान की थी। उसी समय नागों ने आस्तिक मुनि से कहा कि पंचमी को जो भी मेरी पूजा करेगा उसे कभी भी नागदंश का भय नहीं रहेगा। तभी से पंचमी तिथि के दिन नागों की पूजा की जाने लगी।जिस दिन इस यज्ञ को रोका गया, उस दिन श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि थी एवं तक्षक नाग व उसका शेष बचा वंश विनाश से बच गया।

Related Articles

Back to top button