मध्य प्रदेश

175 आंगनवाडियों को नसीब नहीं हो रही ‘खुद की छत’,

कहीं छोटे-छोटे कमरों में तो कहीं कार्यकर्ता और सहायिकाओं के घर पर चल रहा है केंद्र
सिलवानी।
तहसील में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 259 आंगनवाडियां संचालित की जा रही हैं, लेकिन करीब 175 के पास आज भी स्वयं का भवन नहीं। करीब 39 किराये के भवन में चल रही है, जबकि काफी को ग्राम पंचायत ने भवन मुहैया करवाए हैं।
दरअसल, किराये के भवनों में इनके संचालन में व्यावहारिक दिक्कतें आती हैं। ऐसे भवनों में मनमर्जी से कई काम नहीं कर सकते हैं। जगह की कमी में करना मुश्किल होता है। तहसील की कई आंगनवाडियों में यहां बच्चों की संख्या अधिक है और ग्रामीण इलाका है, वहां व्यवस्थित संचालन करने में दिक्कतें आती है। सुरक्षा और सुविधाओं की कमी और बच्चों के लिए पठनीय और पोषण आहार जैसे सामग्री की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। लिहाज खुद के भवनों में इस तरह की दिक्कतें नहीं आती हैं। इसे लेकर विभाग किराये के भवनों में संचालित आंगनवाडियों को भवन मुहैया कराने कदम उठा रहा है।
6 वर्ष के बच्चों को मलती है शिक्षा, पोषण आहार
तहसील की निजी और मुख्य आंगनवाडियों के माध्यम से 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को अनौपचारिक शिक्षा, 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों को पोषण आहार एवं स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने का काम किया जाता है। गर्भवती महिलाएं, शिशुवती माताओं को स्वास्थ्य सेवा, एवं पोषण आहार सेवा मुहैया कराई जाती है। महिला एवं बाल विकास के अलावा समय≤ पर अन्य विभागों के कार्य जैसे बीएलओ, जनगणना, जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र बनवाना, किशोरियों को आयरन सहित अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं का ध्यान रखना, पल्स पोलियो ड्रॉप पिलाना, कुष्ठ उन्मूलन कार्य, टीबी मरीजों का चिह्नांकन, दवा का सेवन कराना, आयुष कार्यक्रम स्रद्ध जिम्मेदारियों का निर्वहन होता है।

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