सब जेल में गीता का सास्वर पाठ

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । मध्यप्रदेश शासन एवं जेल मुख्यालय भोपाल के निर्देशानुपालन में सब जेल में श्रीमद्भागवत गीता के प्रथम अध्याय से लेकर प्रत्येक अध्याय के मुख्य श्लोको के सार का सस्वर पाठ एवं वाचन पंडित मनीष तिवारी द्वारा किया गया । उपदेश के दौरान पंडित मनीष तिवारी द्वारा कहा गया कि गीता जी सार्वभौम है। धर्म के नाम पर प्रचलित विश्व के समस्त धर्मग्रन्थों में गीता का स्थान अद्वितीय है। यह स्वयं में धर्मशास्त्र ही नही बल्कि अन्य धर्मग्रन्थो में निहित सत्य का मानदण्ड भी है। सभी को इसका अध्ययन और बताए गए मार्ग का अनुशरण करना चाहिए। उपदेश के दौरान पंडित जी द्वारा बंदियों एवं उपस्थित जेल स्टाफ को प्रसंग अनुसार बतलाया कि क्रोध से विशेष मूढता अर्थात् अविवेक उत्पन्न होता है। नित्य- अनित्य वस्तु का विचार नहीं रह जाता। अविवेक से स्मरण शक्ति भ्रमित हो जाती है स्मृति भ्रमित होने से योग परायण बुद्धि नष्ट हो जाती है और बुद्धिनाश होने से यह पुरूष अपने श्रेय साधन से च्युत हो जाता है। यहां श्रीकृष्ण ने बल दिया है कि विषयों का चिन्तन नहीं करना चाहिए। साधक को नाम, रूप, लीला और धाम में ही कहीं लगे रहना चाहिए। भजन में ढील देने पर मन विषयों में जाएगा।
इस अवसर पर समुद्र स्टाफ सहित बंदी उपस्थित थे जिन्हें श्रीमद् भागवत गीता के उपदेशों को अपने जीवन में आत्मसात करने के लिए प्रेरित किया गया।



